RAS लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
RAS लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 6 नवंबर 2014

चर्चित पुस्तके

चर्चित पुस्तके
(1)'प्ले एट माय वे'
भारत रत्न सचिन तेंदुलकर की आत्म कथा जो हाल ही में चर्चा का विषय बनी है।
(2) ए गाइड टू प्राइवेट इक्विटीज
भारतीय चार्टर्ड एकाउटेंट नेहा भुवानिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘ए गाइड टू प्राइवेट इक्विटीज’ नवंबर 2014 के प्रकाशित की गई।
(3)हाफ गर्लफ्रेंड
चेतन भगत द्वारा लिखित इस उपन्यास का 1 अक्टूबर 2014 को अनावरण किया गया।
(4)‘द नैरो रोड टू द डीप नॉर्थ'
ऑस्ट्रेलियाई लेखक रिचर्ड फ़्लैनागन को उनके उपन्यास ‘द नैरो रोड टू द डीप नॉर्थ' के लिए वर्ष 2014 का मैन बुकर पुरस्कार प्रदान किया गया।
(5) 'अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियन पब्लिक सेक्टर'
डॉ. यू.डी.चौबे द्वारा लिखित इस पुस्तक का विमोचन 14 अक्टूबर 2014 को किया गया।
(6)‘फाइनल टेस्ट : एक्जिट सचिन तेंदुलकर’
‘फाइनल टेस्ट : एक्जिट सचिन तेंदुलकर’ नामक पुस्तक लेखक एवं पत्रकार दिलीप डिसूजा द्वारा लिखी गई है।
(7) ‘ए मैन एंड ए मोटरसाइकिलहाउ हामिद करजई केम टू पावर'
बीट डैम द्वारा रचित पुस्तक ‘ए मैन एंड ए मोटरसाइकल, हाउ हामिद करजई केम टू पावर’ का लोकार्पण सितंबर 2014 में किया गया।
(8) ‘वर्थी फाइट्स: ए मेमॉयर ऑफ लीडरशिप इन वार एंड पीस’
लियोन पेनेटा एवं जिम न्यूटन की पुस्तक ‘वर्थी फाइट्स: ए मेमॉयर ऑफ लीडरशिप इन वार एंड पीस’ प्रकाशित की गई।
(9) ‘एंड देन वन डे: ए मेमौर’
बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा ‘एंड देन वन डे: ए मेमौर’ को 12 सितम्बर 2014 को जारी किया।
(10)‘गॉड ऑफ अंटार्कटिका’
दिल्ली के 13 वर्षीय छात्र यशवर्धन शुक्ला द्वारा लिखित ‘गॉड ऑफ अंटार्कटिका’ उपन्यास प्रकाशित किया गया।
(11)‘नाट जस्ट ऐन एकाउंटेंट’
‘नाट जस्ट ऐन एकाउंटेंट’ नामक पुस्तक भारत के पूर्व नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय द्वारा लिखी गई है।
(12)एसासिनेशन ऑफ राजीव गांधी, एन इनसाइड जॉब
'एसासिनेशन ऑफ राजीव गांधी, एन इनसाइड जॉब' नाम की किताब का लोकार्पण 19 अगस्त 2014 को किया गया।
(13)'स्ट्रिक्टली पर्सनल : मनमोहन एंड गुरशरण'
दमन सिंह कौर द्वारा लिखित ‘स्ट्रिक्टली पर्सनल : मनमोहन एंड गुरशरण’ नामक पुस्तक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जीवनी है।
(14)' मुंगेर थ्रू दि एजेज’
डीपी यादव द्वारा लिखित पुस्‍तक ‘मुंगेर थ्रू दि एजेज’ पुस्‍तक की पहली प्रति राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को 7 जुलाई 2014 को भेंट की गई।
(15)‘वन लाइफ इज नॉट इनफ: एन आटोबायोग्राफी’
यह पुस्तक पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह द्वारा लिखित उनकी एक आत्मकथा है।यह पुस्तक राजनीतिक हलकों में चर्चित रही।
(16) ‘द विजय माल्या स्टोरी’
के. गिरिप्रकाश द्वारा लिखित ‘द विजय माल्या स्टोरी’ पुस्तक को वर्ष 2014 में पेंगुइन बुक्स लिमिटेड द्वारा लोकार्पण किया गया।
(17) ऐ बेड करैक्टर
दीप्ति कपूर ने उपन्यास ऐ बेड करैक्टर की रचना की. इसका प्रकाशन अगस्त 2014 में किया जाएगा।
(18) ब्लड फ्यूड: ओबामा बनाम क्लिंटन
एडवर्ड क्लेन द्वारा लिखित पुस्तक ब्लड फ्यूड: ओबामा बनाम क्लिंटन जारी की गई।
(19) ‘वॉरियर स्टेट’
टी वी पॉल की किताब ‘वॉरियर स्टेट' 13 जून 2014 को उप–राष्ट्रपति हामिद अंसारी के समक्ष प्रस्तुत की गयी।
(20)‘गेटिंग इंडिया बैक ऑन ट्रैक’
'गेटिंग इंडिया बैक ऑन ट्रैक–एन एक्शन अजेंडा फॉर रिफॉर्म' नाम की किताब का विमोचन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में 8 जून 2014 को किया।
(21) ‘सब्स्टांस एंड शेडो’
फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार की जीवनी ‘सब्स्टांस एंड शेडो’ का 10 जून 2014 को मुंबई में आयोजित एक समारोह में लोकार्पण हुआ।
(22) ‘ग्रीन पोयम्स’
कवि और गीतकार गुलजार द्वारा लिखित पुस्तक ‘ग्रीन पोयम्स’ का विमोचन पटना में 5 जून 2014 को किया गया।

ध्यानाकर्षक संरक्षण विधेयक, 2011

भ्रष्टाचार से निपटने के लिए उठाया गया एक और कदम

ध्यानाकर्षक संरक्षण विधेयक, 2011 को राष्ट्रपति की मंजूरी-

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ध्यानाकर्षक संरक्षण विधेयक, 2011 (व्हिसल ब्लोअर्स संरक्षण विधेयक 2011, Whistleblowers Protection Bill 2011) को 12 मई 2014 को मंजूरी प्रदान की. इस मंजूरी के साथ ही यह विधेयक ध्यानाकर्षक संरक्षण अधिनियम, 2011 (Whistleblowers Protection Act 2011) बन गया.

ध्यानाकर्षक संरक्षण विधेयक, 2011 को लोकसभा ने 11 दिसंबर 2011 को जबकि दो संशोधनों के साथ राज्य सभा ने 21 फरवरी 2014 को पारित किया था.

ध्यानाकर्षक संरक्षण अधिनियम, 2011 के मुख्य बिंदु -

• इस अधिनियम में मंत्रियों सहित सरकारी अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार या अधिकारों के दुरूपयोग से संबंधित सूचना देने वाले व्यक्ति को संरक्षण देने के लिए नियमित व्यवस्था करने का प्रावधान है.
• अधिनियम में सरकार को हुए नुकसान की जानकारी देने वाले व्यक्ति को पर्याप्त संरक्षण देने का भी प्रावधान है.
• यह अधिनियम जनता को मंत्रियों और लोकसेवकों द्वारा अधिकारों का जानबूझकर दुरुपयोग करने के बारे में या भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी का खुलासा करने के लिए उत्साहित करने की प्रणाली प्रदान करता है.
• कोई व्यक्ति किसी सक्षम प्राधिकार के समक्ष भ्रष्टाचार के मामले में जनहित में जानकारी सार्वजनिक कर सकता है.
• शिकायत करने हेतु केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) सक्षम प्राधिकरण है.
• भारत सरकार अधिसूचना जारी करके भ्रष्टाचार के बारे में इस तरह की शिकायतें प्राप्त करने के लिए भी किसी को नियुक्त कर सकती है.
• इस कानून में झूठी या फर्जी शिकायतों के मामले में दो वर्ष तक की कैद और 30000 रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान है.

केंद्रीय सतर्कता आयोग को सशक्त करने के लिए यह विधेयक वर्ष 2004 में संघ सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया था.

भारत की उर्जा जरूरते और पूर्ण विद्युतीकरण का सपना

भारत की उर्जा जरूरते और पूर्ण विद्युतीकरण का सपना

पर्याप्त संसाधनों की कमी की वजह से भारत में क़तार के आख़िर लोगों तक बिजली पहुंचाना सिर्फ एक सपना बन कर ही रह गया है और इसकी भी संभावनाएं भी कम हैं कि अगले 15 सालों में भी यह संभव हो पाएगा.

योजना आयोग के आंकड़ों के अनुसार लगभग चालीस करोड़ लोग यानी आबादी के एक तिहाई लोग भारत में आज भी ऐसे हैं जिनके पास बिजली नहीं पहुंच पाई है. इनमे ज़्यादातर वो लोग हैं जो सुदूर ग्रामीण अंचलों में रहते हैं.

जिन 80 करोड़ लोगों तक बिजली पहुंच भी पा रही है, उन्हें ये पर्याप्त तौर पर नहीं मिल पाती है. ख़ास तौर पर उन लोगों को, जो शहरों में नहीं रहते हैं.

मनमोहन सिंह ने वर्ष 2004 में कहा था कि 2009 तक सरकार हर नागरिक तक बिजली पहुंचा पाएगी. वर्ष 2009 में उन्होंने कहा की 2011 तक ये संभव हो पाएगा.

2011 में उन्होंने कहा कि 2012 तक भारत का पूरी तरह विद्युतीकरण हो जाएगा. वर्ष 2012 में उन्होंने कहा कि शायद 2017 तक ऐसा संभव हो पाए. मगर अब जब 2014 के कई महीने भी बीत चुके हैं तो ऐसा लगता है कि अगले पंद्रह सालों भी इसके आसार दूर दूर तक नहीं हैं.

बिजली का हिसाब किताब

पिछले 25 सालों पर अगर नज़र डाली जाए तो पूर्ण विद्युतीकरण की दिशा में हुए प्रयास लक्ष्य के 50 प्रतिशत टार्गेट तक भी नहीं पहुंच पाए हैं.

भारत में ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता (इन्सटाल्ड कैपेसिटी) 234602 मेगावाट की है जबकि ज़रूरत के हिसाब से वर्ष 2030 तक 8 लाख मेगावाट तक की स्थापित क्षमता की ज़रूरत होगी.

मौजूदा क्षमता में कोयले पर आधारित 160,484 मेगावाट है जबकि पन-बिजली पर 39,875 मेगावाट, सौर ऊर्जा की 29,463 और परमाणु पर सिर्फ 4780 मेगावाट है.

ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत में ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता (इन्सटाल्ड कैपेसिटी) का 54 प्रतिशत कोयले पर आधारित है जबकि 24 प्रतिशत पन-बिजली पर, 12 प्रतिशत सौर ऊर्जा पर, 8 प्रतिशत गैस पर और मात्र 2 प्रतिशत परमाणु ऊर्जा पर.

आंकड़े बताते हैं कि आज भी परमाणु ऊर्जा को वैकल्पिक ऊर्जा के रूप में नहीं देखा जा सकता है क्योंकि यूरेनियम की आपूर्ति के लिए रूस, मंगोलिया, कज़ाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया पर निर्भर होना पड़ेगा.

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संसद में वर्ष 2014-15 का अंतरिम बजट पेश करते हुआ कहा था कि भारत की विद्युत उत्पादन की स्थापित क्षमता दस सालों में दोगुनी हो गई है.

उनका कहना था कि दस साल पहले ये क्षमता सिर्फ 112,700 मेगावाट ही थी. चिदंबरम का दावा है कि सिर्फ़ पिछले वित्तिय वर्ष में ही 29,000 मेगावाट की क्षमता जोड़ी गई.

कोयले के अलावा चारा नहीं

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सदस्य रहे अलोक गुप्ता का कहना है कि आने वाले कई सालों तक विद्युत उत्पादन के लिए कोयले और गैस पर ही निर्भर रहना पड़ेगा. बीबीसी से उन्होंने कहा, "अभी तो इन दो संसाधनों पर ही पूरी निर्भरता रहेगी. सौर ऊर्जा पर लम्बे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता है. ये पूरी तरह से मौसम के भरोसे ही चलती है."

मगर गुप्ता का कहना है कि कोयला और गैस के संसाधन भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं इसलिए ऊर्जा का संकट बना ही रहेगा.

कोयले की अगर बात की जाए तो भारत के पास कोयले के भण्डार हैं तो ज़रूर, मगर यह सब उन इलाक़ों में ज़्यादा हैं जहां जंगल हैं. इसलिए ये फैसला करना कठिन होगा की हमें कोयला चाहिए या पर्यावरण.

दूसरी तरफ कोयले के जो भंडार भारत में मौजूद हैं वो उतनी अच्छी गुणवत्ता वाले नहीं हैं और निर्भरता आखिरकार दूसरे देशों पर बनी हुई है. चूंकि आयात किए हुए कोयले का मूल्य अधिक पड़ता है इसलिए आने वाले दिनों में भी बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी होती रहेगी.

ऊर्जा क्षेत्र पर नज़र रखने वाले केशव चतुर्वेदी का कहना है कि सौर ऊर्जा से औद्योगिक ज़रूरतें पूरी नहीं हो सकती हैं, इसलिए उस पर पूरी तरह निर्भर भी नहीं रहा जा सकता है.

वो कहते हैं, "हमारे पास यूरेनियम के उतने भंडार नहीं हैं, और ना ही उतना कोयला ही है. पन-बिजली के लिए बड़े बड़े बांध बनाने पड़ेंगे जो किफ़ायती भी नहीं हैं और उनके बनने से पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा."

बिजली के उत्पादन के लिए जो मुख्य स्रोत बचता है वो है कोयला और कोयले का निर्यात करने के अलावा भारत के पास कोई दूसरा चारा नहीं है.

सौर ऊर्जा से करें रोशन

जानकारों का कहना है कि इस परिस्थिति से निपटने का उपाय है कि सौर ऊर्जा का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल ग्रामीण इलाक़ों में विद्युतीकरण के लिए किया जाना चाहिए जिससे काफी राहत मिल सकती है और कोयले से उत्पादित बिजली औद्योगिक ईकाइयों के लिए मुहैया करायी जा सकती है. सौर ऊर्जा का इस्तेमाल उन इलाक़ों तक बिजली पहुंचाने में किया जा सकता है.

अलोक गुप्ता का कहना है कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत ग्रामीण इलाक़ों में बिजली के तार तो पहुँच चुके हैं. लेकिन एक बड़े इलाक़े में आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है
बीबीसी हिन्दी सेवा से साभार
क्या भारत में क्षेत्रीय दलों की राजनीति ढलान पर है

लेखक और पत्रकार साइमन डेनयर लिखते हैं, "भारत के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत ने साबित कर दिया है कि भारत का जनतंत्र अच्छे प्रशासन के लिए जनादेश दे सकता है."

दुनिया भर में भारतीय लोकतंत्र लगातार ग़लत वजहों से सुर्ख़ियों में रहा है, जिनमें से कुछ समझे जाने लायक वजहें हैं.

इस बहस के केंद्र में राजनेताओं को भ्रष्टाचार और संरक्षण देने के मामले, नीति की जगह लोकप्रियता, संसद का अक्सर स्थगित होना और मर्यादाहीन विरोध प्रदर्शन रहे हैं.

पिछले एक दशक में कांग्रेस की दमघोटू वंशवादी राजनीति जो ऐसा लगता है विश्वास और स्थिरता खो चुका था, के ख़िलाफ़ एक हिंदू राष्ट्रवादी विपक्ष खड़ा हुआ है.

गठबंधन का दौर

दोनों ब्रांडों के बीच एक ठोस राष्ट्रीय राजनीति की पटकथा लिखने के संघर्ष के बीच क्षेत्रीय और जाति आधारित पार्टियों ने खाई को भरा था.

मगर यह राजनीति अब ढलान पर है और ऐसा लगता है गठबंधन सरकार के तहत कमज़ोर और दिशाहीन शासन का दौर ख़त्म हो गया है.

मतदाताओं ने केवल अपने संकीर्ण हितों को देखा है, जिसके बारे में आमतौर पर कहा जाता है लोग सिर्फ़ अपनी जाति को मत देने के लिए मत देते हैं.

उद्यमी वर्ग सिर्फ़ यह चाहता था कि सरकार उनको अकेला छोड़ दे और वे शायद ही मत देते थे.

चीन में कई लोग भारतीय जनतंत्र को निर्णायक और सत्तावादी शासन के तौर पर देख रहे हैं.

हालांकि 2014 के आम चुनाव ने, भारत का लोकतंत्र निर्णायक रूप से गिरावट की ओर है, का मिथक तोड़ दिया है.

लोकतंत्र में गिरावट

स्थापित पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों में दशकों से मतदान एक दीर्घकालिक गिरावट की ओर रहा है, वहीं भारत में मतदान में महिलाओं की अधिकाधिक भागीदारी से, और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की बदौलत 66.5 फ़ीसदी का रिकॉर्ड मतदान हुआ.

देश में तेज़ी से बढ़ते मध्यम वर्ग के बीच भी इसे लेकर उत्साह पाया गया. बदलाव की ज़मीन सालों से तैयार हो रही थी.

चौबीस घंटे चलने वाले समाचार चैनलों ने राजनीति को सनसनी में तब्दील कर दिया है, लेकिन इसने भ्रष्टाचार के मामलों को बेनकाब करने में मदद की है.

सूचना के अधिकार ने ग़रीब भारत की जनता को नौकरशाही के ख़िलाफ़ सवाल पूछने का अधिकार देकर सशक्त बनाया है.

बूढ़े और जवानों ने एकजुट होकर हज़ारों की संख्या में सड़कों पर निकलकर भ्रष्टाचार और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन किया.

भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र मोदी ने इस विरोधी लहर बखूबी लाभ उठाया. उन्होंने उन सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित किया, जहां उनको जीतने की उम्मीद थी और लोकसभा में बड़ी चतुराई से 31 फ़ीसदी मत लेने में कामयाब रहे.

राष्ट्रीय पृष्ठभूमि में राजनीति

लेकिन सबसे अहम रहा कि यह चुनाव स्थानीय मुद्दों और जाति आधारित नहीं रहा. यह राष्ट्रीय पृष्ठभूमि में लड़ा गया चुनाव था, जिसमें भ्रष्ट और अकुशल सरकार को ख़ारिज कर दिया गया है.

जनादेश में एक ऐसे व्यक्ति में विश्वास जताया गया, जो साफ़, निर्णायक नेतृत्व, अच्छा प्रशासन और विकास का दावा करता है.

मोदी सब्सिडी की राजनीति से अलग हैं और इसके बजाए सभी वर्गों के भारतीयों अमीर और ग़रीब, शहरी और ग्रामीण को शिक्षा, नौकरियों और इससे अधिक मौलिक मसलों एक बेहतर जीवन, बिजली और साफ़ पानी जैसी उनकी आकांक्षाएं साकार करने का मौक़ा देने का वादा करते हैं.

अपने अभियान में मोदी ने एक शक्तिशाली ब्रांड बनाया है और एक महत्वाकांक्षी वादा किया है.

उम्मीदों पर खरा उतरना मोदी के लिए इतना आसान नहीं होगा, लेकिन उनको मिला जनादेश स्पष्ट है.

भारतीय मतदाताओं ने अपने नेताओं को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि वे भ्रष्टाचार के बजाय शासन और दान के बजाय अवसर चाहते हैं.

भारत के लोकतंत्र ने अपना काम किया

बासेल-।।।: नवीन पहल

बासेल-।।।: नवीन पहल

IAS /PSC की प्री एवं मुख्य परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण टॉपिक।

क्या है बासेल III -

बैंकिंग क्षेत्र के अंतर्गत विनियमन, पर्यवेक्षण और जोखिम-प्रबंधन में सुधार लाने के लिए निरूपित किए गए सुधारात्मक उपायों का एक व्यापक सेट है बासेल ।।।.
बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासेल समिति ने 2009 के अंत में बासेल III का पहला वर्जन प्रकाशित किया था और बैंकों को समस्त अपेक्षाएँ पूरी करने के लिए लगभग तीन वर्ष का समय दिया था।
मोटे तौर पर, ऋण-संकट के प्रत्युत्तर में बैंकों को उपयुक्त लीवरेज रेश्यो कायम रखना और कतिपय पूंजीगत अपेक्षाएँ पूरी करना आवश्यक है।

नवीन पहल-

बासेल III मानदंड लागू करने में बैंकिंग क्षेत्र की मदद करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 7 मार्च 2014 को वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) के अंतर्गत एक समिति गठित करने की घोषणा की।

समिति का कार्य-

* य़ह समिति बासेल-III पूँजी मानदंड लागू करने हेतु बैंकिंग क्षेत्र के लिए दिशा-निर्देश तय करेगी

महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व-

• वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) की गैर-विधायी सिफारिशों का कार्यान्वयन।

• निवेशकों को वित्तीय परिसंपत्तियों की समस्त श्रेणियों का एक सिंगल व्यू उपलब्ध कराने के लिए एक रिपोजिटरी स्थापित करने का मुद्दा।

• बासेल-III विनियमों और पर्यवेक्षीय पूँजीगत अपेक्षाओं को मद्देनजर रखते हुए अगले पाँच वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र की पूंजीगत आवश्यकताएँ सुझाने के उपाय।

• विभिन्न क्षेत्रों के बीच समान क्रियाकलापों के लिए विनियमों के अत्यधिक सामंजस्य के मुद्दे पर भी विचार किया जायेगा।

• इसमें वित्तीय क्षेत्र के लिए एक कारगर समाधान तंत्र स्थापित करने के उपायों पर भी विचार किया जायेगा।

नोबेल पुरस्कार

*. नोबेल पुरस्कार :-
*. इतिहास:-
1. नोबेल पुरस्कार नोबेलफाउंडेशन द्वारा स्वीडन केवैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेलकी स्मृति में शांति,साहित्य, भौतिकी, रसायन,चिकित्सा विज्ञान औरअर्थशास्त्र के क्षेत्र मेंदिया जाने वाला विश्वका सर्वोच्च पुरस्कार है।2. पुरस्कार वितरण 1901 सेप्रारंभ किया गया था। 1969से यह पुरस्कार अर्थशास्त्रक्षेत्र में भी दिया जानेलगा।3. अब तक कुल नौ भारतीय नोबेलपुरस्कार से सम्मानित हुए
!*. 2014 के नोबेल पुरस्कार विजेता:-

# शांति का नोबेल पुरस्कार -कैलाश सत्यार्थी व मलाला युसफजाई
# साहित्य का नोबेल पुरस्कार-फ्रांसीसी लेखक पैट्रिक मोदियानो
# अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार-फ्रांस के अर्थशास्त्री जीन टिरोल
े# : चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार- एडवर्ड आई.मोज़र,उनकी पत्नी मे-ब्रिट मोज़र तथा जॉन ओ'कीफ़ को संयुक्त रूप से
# रसायन का नोबेल पुरस्कार -अमेरिकी एरिक बिट्जिग और विलियम मोर्नर तथा जर्मन वैज्ञानिक स्टीफन
हेल
# भौतिकी का नोबेल पुरस्कार-जापान के इशामू आकाशाकी,हिरोशीअमानो और अमेरिका केशूजी नाकामूरा