07 ovember 2014(Friday)
1.एशिया-प्रशांत में रिश्तों के नए पुल बनाएंगे मोदी:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अगले सप्ताह से शुरू हो रहा अब तक का सबसे लंबा विदेश दौरा एशिया और प्रशांत क्षेत्र में रिश्तों के नए पुल बनाने का प्रयास होगा। मोदी 11 से 19 नवंबर के बीच तीन मुल्कों म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया व फिजी की इस यात्र में विकास और आपसी सहयोग की रफ्तार बढ़ाने पर जोर देंगे। इस दौरान वह आसियान, भारत-पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के साथ ही दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-20 की बैठक में भी शिरकत करेंगे। भारत में नई सरकार को लेकर उत्सुकता का आलम यह है कि जी-20 में मोदी से मुलाकात के लिए 15 से अधिक मुल्कों ने आग्रह किया है। मोदी ने गुरुवार को ट्वीट किया, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों का संघ (आसियान) अगली शताब्दी के एशियाई देशों के होने के हमारे सपने का मुख्य केंद्र है, जिसमें भारत को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। प्रधानमंत्री सबसे पहले म्यांमार जाएंगे जहां वह आसियान और पूर्वी एशियाई सम्मेलन में शिरकत करेंगे। इस यात्र से पहले पीएम ने कहा कि भारत का दक्षिण-पूर्वी एशिया के साथ संबंध बेहद गहरा है। आसियान देशों के साथ संबंधों को मजबूती देना भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का मुख्य हिस्सा है। इस क्षेत्र में चीन के विस्तारवादी रवैये को लेकर कई मुल्कों में खासी चिंताएं हैं। ऐसे में भारत की कोशिश आसियान और पूर्वी एशियाई मुल्कों के साथ अपने सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों की जमीन पर सहयोग की इमारत मजबूत करने की होगी। प्रधानमंत्री 14 नवंबर को देर शाम ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे और 18 नवंबर तक वहां रहेंगे। करीब तीन दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस ऑस्ट्रेलिया यात्र में बहुपक्षीय और द्विपक्षीय वार्ताओं का कार्यक्रम है। वहां जी-20 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के साथ वह ऑस्ट्रेलियाई पीएम के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। जी-20 पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत सुरेश प्रभु ने बताया कि भारत के लिहाज से यह अहम अंतरराष्ट्रीय बैठक होगी। दुनिया की अर्थव्यवस्था को दो फीसद की विकास दर देने की कोशिशों में भारत का महत्वपूर्ण योगदान होगा। प्रभु के मुताबिक दुनिया की अहम अर्थव्यवस्थाओं की इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रबंधन पर बात होनी है। जी-20 में भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने के आग्रह की फेहरिस्त इस बार लंबी है। इस बारे में विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता का कहना था कि पीएम उन विश्व नेताओं से मिलने का प्रयास करेंगे जिन से अभी तक उनकी मुलाकात नहीं हो सकी है। ऑस्ट्रेलिया से लौटने से पहले पीएम फिजी भी जाएंगे। प्रशांत महासागर में स्थित इस मुल्क के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक रिश्ते हैं। भारतवंशियों की बड़ी आबादी वाले इस मुल्क में बीते करीब चार दशकों में किसी भारतीय पीएम का यह पहला दौरा होगा।
1.एशिया-प्रशांत में रिश्तों के नए पुल बनाएंगे मोदी:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अगले सप्ताह से शुरू हो रहा अब तक का सबसे लंबा विदेश दौरा एशिया और प्रशांत क्षेत्र में रिश्तों के नए पुल बनाने का प्रयास होगा। मोदी 11 से 19 नवंबर के बीच तीन मुल्कों म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया व फिजी की इस यात्र में विकास और आपसी सहयोग की रफ्तार बढ़ाने पर जोर देंगे। इस दौरान वह आसियान, भारत-पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के साथ ही दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मंच जी-20 की बैठक में भी शिरकत करेंगे। भारत में नई सरकार को लेकर उत्सुकता का आलम यह है कि जी-20 में मोदी से मुलाकात के लिए 15 से अधिक मुल्कों ने आग्रह किया है। मोदी ने गुरुवार को ट्वीट किया, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों का संघ (आसियान) अगली शताब्दी के एशियाई देशों के होने के हमारे सपने का मुख्य केंद्र है, जिसमें भारत को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। प्रधानमंत्री सबसे पहले म्यांमार जाएंगे जहां वह आसियान और पूर्वी एशियाई सम्मेलन में शिरकत करेंगे। इस यात्र से पहले पीएम ने कहा कि भारत का दक्षिण-पूर्वी एशिया के साथ संबंध बेहद गहरा है। आसियान देशों के साथ संबंधों को मजबूती देना भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का मुख्य हिस्सा है। इस क्षेत्र में चीन के विस्तारवादी रवैये को लेकर कई मुल्कों में खासी चिंताएं हैं। ऐसे में भारत की कोशिश आसियान और पूर्वी एशियाई मुल्कों के साथ अपने सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों की जमीन पर सहयोग की इमारत मजबूत करने की होगी। प्रधानमंत्री 14 नवंबर को देर शाम ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे और 18 नवंबर तक वहां रहेंगे। करीब तीन दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस ऑस्ट्रेलिया यात्र में बहुपक्षीय और द्विपक्षीय वार्ताओं का कार्यक्रम है। वहां जी-20 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के साथ वह ऑस्ट्रेलियाई पीएम के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। जी-20 पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत सुरेश प्रभु ने बताया कि भारत के लिहाज से यह अहम अंतरराष्ट्रीय बैठक होगी। दुनिया की अर्थव्यवस्था को दो फीसद की विकास दर देने की कोशिशों में भारत का महत्वपूर्ण योगदान होगा। प्रभु के मुताबिक दुनिया की अहम अर्थव्यवस्थाओं की इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रबंधन पर बात होनी है। जी-20 में भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने के आग्रह की फेहरिस्त इस बार लंबी है। इस बारे में विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता का कहना था कि पीएम उन विश्व नेताओं से मिलने का प्रयास करेंगे जिन से अभी तक उनकी मुलाकात नहीं हो सकी है। ऑस्ट्रेलिया से लौटने से पहले पीएम फिजी भी जाएंगे। प्रशांत महासागर में स्थित इस मुल्क के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक रिश्ते हैं। भारतवंशियों की बड़ी आबादी वाले इस मुल्क में बीते करीब चार दशकों में किसी भारतीय पीएम का यह पहला दौरा होगा।
2. संबंधों को मजबूती देने नेतन्याहू से मिले राजनाथ:- केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को इस्रइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की और इस्रइल के साथ भारत के ‘गर्मजोशी भरे’ संबंधों को और मजबूती प्रदान के लिए र्चचा की। सिंह का स्वागत करते हुए नेतन्याहू ने कहा, भारतीय और इस्रइली कौशल एवं निरंतरता के बंधन को साझा करते हैं। गृहमंत्री के तौर पर इस्रइल के पहले आधिकारिक दौरे पर पहुंचे सिंह ने इससे पहले ट्वीट किया, भारत और इस्रइल गर्मजोशी भरे और सौहार्दपूर्ण संबंध साझा करते हैं। हम इसे और मजबूत बनाने की उम्मीद करते हैं।’ सिंह को यहां बुधवार सुबह ही पहुंचना था लेकिन मोनाको में खराब मौसम की वजह से वहां से उनकी उड़ान रद्द कर दी गई थी जिसके चलते उन्हें अपने कार्यक्र म में बदलाव करना पड़ा था और वह रात को पहुंचे। गृह मंत्री इंटरपोल की आमसभा में शामिल होने के लिए मोनाको गए थे। सिंह की योजना में अनपेक्षित परिवर्तन के बावजूद इस्रइली सरकार ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके साथ ही नेतन्याहू, रक्षामंत्री मोशे यालोन और जन सुरक्षा मंत्री यित्झिक अहारानोविच ने उनसे मुलाकात करने के लिए अपने व्यस्त कार्यक्र म में फेरबदल किया। सिंह ने अपनी इस्रइल यात्रा पुराने यरूशलम शहर में पवित्र स्थलों का दौरा करने के साथ शुरू की। पवित्र स्थलों का दौरा करने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार योस्सी कोहेन के साथ हेलीकाप्टर से जार्डन घाटी तथा इस्रइल के उत्तरी और दक्षिण क्षेत्र का दौरा करने के लिए रवाना हो गए ताकि देश की सुरक्षा स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। कोहेन ने हाल ही में राजधानी दिल्ली में सिंह के साथ मुलाकात की थी और ‘समान चुनौतियों’ और उनके हल को लेकर र्चचा की थी जिसका दोनों देश सामना कर रहे हैं। कोहेन ने उस दौरान सभी क्षेत्रों में किसी भी स्तर तक सहयोग बढ़ाने की अपने देश की ‘सहमति’ भी व्यक्त की थी। एक वरिष्ठ इस्रइली अधिकारी ने कहा, भारत हमारा एक बहुत महत्वपूर्ण सहयोगी है और हम गृहमंत्री की यात्रा को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। हम उपयोगी विचार विमर्श की आशा करते हैं जो दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूती प्रदान करेगी। जून 2000 के बाद यह भारतीय गृह मंत्री की होने वाली पहली यात्रा है जब लालकृष्ण आडवाणी ने यरूशलम की यात्रा की थी जो कि द्विपक्षीय सहयोग में मजबूती का प्रतीक थी। सिंह की यात्रा गत सितम्बर में न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतन्याहू से बैठक के बाद हो रही है। येरूशल में बृहस्पतिवार को इस्रइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह। भारत और इस्रइल गर्मजोशी भरे और सौहार्दपूर्ण संबंध साझा करते हैं। हम इसे और मजबूत बनाने की उम्मीद करते हैं
3. 70 फीसदी आबादी के लिए महज 13 फीसद बैंक कर्ज:- कृषि क्षेत्र में काम करने वाली देश की 70 फीसद आबादी की बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण में हिस्सेदारी 13 फीसद भी नहीं है। रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 19 सितम्बर, 2014 तक देश के 47 अधिसूचित व्यावसायिक बैंकों द्वारा दिया गया कुल कर्ज 57569 अरब रपए था जिसमें कृषि तथा इससे संबंधित क्षेत्रों के लिए दिया गया ऋण मात्र 7248 अरब रपए था। यह कुल ऋण का 12.59 फीसद है। हालांकि पिछले एक साल के दौरान कृषि ऋण के फीसद में थोड़ा सुधार हुआ है। पिछले साल इन बैंकों द्वारा दिए गए कुल 52969 अरब रपए के ऋण में कृषि ऋण 6100 अरब रपए यानी 12 फीसद था। इस प्रकार सितम्बर 2013 से सितम्बर 2014 के बीच कृषि ऋण में 18.8 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय बैंक ने बताया कि सितम्बर 2014 में सबसे ज्यादा 56515 अरब रपए का ऋण उद्योगों को दिया गया जो कुल ऋण का 43.67 प्रतिशत है। इसके अलावा कुल ऋण में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 13218 अरब यानी 22.96 प्रतिशत और निजी ऋण की हिस्सेदारी 10907 अरब रपए यानी 18.95 प्रतिशत रही है।
4. एचएसबीसी की सूची के आधे खातों में कोई धन नहीं:- काले धन पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने पाया है कि उसको दी गई एचएसबीसी बैंक के खाताधारकों की सूची के लगभग आधे खातों में कोई धन नहीं है जबकि सूची में सौ से अधिक नाम दोहराए गए हैं। इससे इनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई की संभावना में बाधा हो सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आयकर विभाग अब इस सूची में शामिल 300 इकाइयों के खिलाफ अभियोजन पर विचार कर रहा है। उच्चतम न्यायालय को सरकार द्वारा हाल ही में सौंपी गई इस (एचएसबीसी जिनेवा) सूची में कुल मिलाकर 628 नाम हैं। एसआईटी ने पाया है और रिपोर्ट दी है कि एचएसबीसी जिनेवा की सूची में लगभग 289 नामों के साथ कोई राशि नहीं है। जबकि सूची में 122 नाम दो बार आए हैं। सूत्रों ने कहा है,‘एसआईटी ने पाया है कि इन विशेष नामों के खिलाफ कार्रवाई करने में सबसे बड़ी बाधा यह है कि इन खातों के परिचालन का कोई ब्योरा नहीं है। सूची में यह जिक्र नहीं है कि ये खाते कब खोले गए तथा इनमें लेन देन का कोई विवरण भी नहीं है।’ एसआईटी की रपट के अनुसार आयरक विभाग ने इस सूची में शामिल खाताधारकों के खिलाफ 150 तलाशी या सर्वे कार्रवाई की है लेकिन उनके खिलाफ अभियोजन कार्रवाई के बारे में अभी फैसला नहीं किया गया है। एसआईटी के चेयरमैन उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एमबी शाह तथा वायस चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरिजित पसायत हैं। सूत्रों ने कहा,‘ यह सूची उच्चतम न्यायालय को सौंप दी गई है और इन मामलों में कार्रवाई का अंतिम समय इस वित्त वर्ष के आखिर तक समाप्त होने वाला है तो विभाग लगभग 300 मामलों में अभियोजन शुरू करने पर विचार कर रहा है।’ एसआईटी चाहता है भारत विभिन्न देशों के साथ कर संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान की संधियों की ‘समीक्षा’ करे ताकि कालाधन विदेशों में जमा कराने की समस्या से निपटा जा सके। इनमें कुछ देश कालेधन की पनाहगाह माने जाते हैं। सरकार को सौंपी अपनी पहली रपट में एसआईटी ने जांच व प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चिंता के विषयों का उल्लेख किया है जिन्हें इस ‘काले’ धन व अवैध आर्थिक गतिविधियों पर काबू पाने की जिम्मेदारी है। एसआईटी ने सरकार से कुछ देशों के साथ दोहरे कराधान से बचाव के मौजूदा समझौतों (डीटीएए) तथा कर सूचनाओं के आदान प्रदान की संधियों (टीआईईए) पर फिर से बातचीत करने को कहा है। आधिकारिक सूत्रों ने एसआईटी की रपट के हवाले से कहा है कि इस तरह के काम में समय लगता है लेकिन यह काम जल्द शुरू करने से भारतीयों द्वारा विदेश में अवैध रूप से जमा कराए गए धन का पता लगाने में मदद मिलेगी।
5. राजनीति से दूर होंगे सरकारी बैंक:- संप्रग से विरासत में मिली बेहद खस्ताहाल सरकारी बैंकों के कामकाज में बड़े पैमाने पर बदलाव का खाका लगभग तैयार है। सब कुछ ठीक रहा तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से न सिर्फ सरकारी बैंको का कामकाज पेशेवर बनाने के लिए कुछ अहम घोषणाएं होंगी, बल्कि इनके शीर्ष पदों पर नियुक्तियों का मौजूदा तौर-तरीका भी बदल जाएगा। मोदी सरकार इसकी ठोस व्यवस्था करने जा रही है कि सरकारी बैंकों के प्रमुखों समेत सभी शीर्ष पदों (स्वतंत्र निदेशकों सहित) में कोई राजनीति नहीं होगी। पिछले दिनों दैनिक जागरण को दिए गए साक्षात्कार में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसके संकेत दिए थे कि जैसा वर्षो से सरकारी बैंकों में चलता रहा है वैसा अब नहीं चलेगा। इन बैंकों के कामकाज से लेकर इनकी माली हालात को सुधारने के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआइ) और वित्त मंत्रलय दोनों अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। मंत्रलय बैंकों के शीर्ष पदों पर होने वाली नियुक्तियों को पारदर्शी बनाने के साथ ही यह नियम तय करने जा रहा है कि शीर्ष पदों पर सिर्फ पेशेवर लोग बैठें। साथ ही सरकारी बैंकों को राजनीतिक हस्तक्षेप से कैसे दूर रखा जाए, इसका कायदा कानून भी वित्त मंत्रलय बना रहा है। इसके तहत लगभग तय है कि सरकारी बैंकों में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) का पद अलग-अलग होगा। साथ ही इस बात की पुख्ता व्यवस्था होगी सरकारी बैंकों के स्वतंत्र निदेशकों के पद पर कोई भी राजनीतिक पहुंच वाले व्यक्ति की नियुक्ति न हो। आरबीआइ को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे पीएसयू बैंकों के वित्तीय हालात को सुधारने के लिए कदम उठाए। इसके तहत बैंकों की बढ़ती पूंजी आवश्यकता को किस तरह से पूरी की जाए, इसका रोडमैप आरबीआइ को तैयार करना है। वैसे इस काम में केंद्र सरकार की भी भूमिका होगी। यही वजह है कि वित्त मंत्रलय ने सरकारी बैंकों में अपनी न्यूनतम हिस्सेदारी की सीमा घटाकर 52 फीसद करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा आरबीआइ इन बैंकों में फंसे कर्जे (एनपीए) की बढ़ती समस्याओं पर लगाम लगाने के लिए भी कुछ नए नियम तय करने के अंतिम दौर में है। खास तौर पर फंसे कर्ज को पुनर्गठित करने (कर्जदारों को कर्ज लौटाने की और मोहलत देने) संबंधी मौजूदा नियमों को बदलने का खाका तैयार है। इस संबंध में आरबीआइ और सरकार को इस बात की सूचना हासिल हुई है कि कई बैंक मौजूदा नियमों की आड़ में काफी गड़बड़ी कर रहे हैं। पिछले दिनों मे ऐसे ही मामले में सिंडिकेट बैंक के सीएमडी एसके जैन को निलंबित किया गया था। सूत्रों के मुताबिक बैंकों में होने वाले बड़े बदलाव में सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए भी आरबीआइ की तरफ से कई कदम उठाने की तैयारी है।
6. भारत सेशल्स को आज सौंपेगा आइएनएस तरासा:- सेशल्स को समुद्री डाकुओं से निपटने में मदद के लिए भारत त्वरित हमला करने में सक्षम दूसरा युद्धपोत आइएनएस तरासा (फास्ट अटैक क्राफ्ट-एफएसी) मुहैया कराएगा। चार दिवसीय यात्र पर गुरुवार को सेशल्स पहुंचे भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल आरके धवन कार निकोबार श्रेणी के इस युद्धपोत को शुक्रवार को सेशल्स के तटरक्षक बल को सौंपेंगे। दरअसल, पूर्वी अफ्रीकी देश हंिदू महासागर में स्थित है, जहां समुद्री डाकू सर्वाधिक सक्रिय हैं। लिहाजा, भारत समुद्री सुरक्षा से जुड़े साजो-सामान के अलावा सेशल्स के जवानों को प्रशिक्षण देने में भी सहयोग देता है। वर्ष 2005 में भारत ने सेशल्स को एससीजी टोपाज (आइएनएस तारमुगली) दिया था। नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि दूसरा युद्धपोत देने से न केवल सेशल्स अपने तटों की सुरक्षा मजबूत करने में सक्षम होगा, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में भी मजबूती आएगी। तरासा अत्याधुनिक हथियारों और रडार प्रणाली से भी लैस है। नौसेना प्रमुख सेशल्स के राष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगे।
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