16 November 2014(Sunday)
1.मोदी ने ब्रिक्स देशों के नेताओं से ब्लैक मनी पर मांगा सहयोग:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में रखे कालेधन को वापस लाने के लिए दुनिया के देशों से सहयोग की मजबूत वकालत की है। कालेधन की समस्या से निपटने के उपाय तलाशने के भारी आंतरिक दबाव के बीच शनिवार को यहां जी- 20 देशों का शिखर सम्मेलन शुरू हो गया। मोदी पहली बार शिखर सम्मेलन में जी-20 के नेताओं से मिले। इस दौरान उन्होंने कहा कि विदेशों में रखे कालेधन को वापस लाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह संदेश भी दिया कि आर्थिक सुधारों को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। शिखर बैठक के मेजबान देश आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट ने वादा किया है कि सम्मेलन नियंतण्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2,000 अरब डॉलर जोड़ने की पहल करने में सफल रहेगा। इससे नियंतण्र आर्थिक वृद्धि में दो फीसद विस्तार होगा और लाखों रोजगार के अवसर बढें़गे। पांच देशों के ब्रिक्स समूह के नेताओं के बीच एक अनौपचारिक बैठक में कालेधन के मुद्दे को उठाते हुए मोदी ने कालेधन को वापस लाने के उद्देश्य को हासिल करने के लिए नजदीकी नियंतण्र समन्वय की जोरदार वकालत की। मोदी ने इस तरह से जी-20 शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही कालेधन के मुद्दे को गरमा दिया है। मोदी विदेशों में रखे कालेधन की एक-एक पाई लाने की पहले ही प्रतिबद्धता जता चुके हैं। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स नेताओं -चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा और ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ से कहा, ‘विदेशों में रखा काला धन वापस देश में लाना हमारी मुख्य प्राथमिकता है।’ मोदी ने कालेधन के मुद्दे पर दुनिया के देशों के बीच नजदीकी समन्वय स्थापित किए जाने पर जोर देते हुए विदेशों में रखे इस अवैध धन को सुरक्षा के लिए भी चुनौती बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने संवाददाताओं को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है जब कालेधन को लेकर सुरक्षा क्षेत्र पर गौर किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता संभालने के साथ ही लगातार यह कहते रहे हैं कि कालाधन वापस लाना उनकी प्राथमिकता है और उनकी सरकार ने सत्ता संभालते ही पहले ही दिन कालेधन का पता लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन को मंजूरी दी। मोदी ने बाद में जी-20 के अपने साथी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सुधार प्रक्रि या के समक्ष गतिरोध पैदा होना लाजिमी है। उन्होंने सुधारों को राजनीतिक दखलंदाजी से अलग रखने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि सुधारों से प्रक्रि याओं को सरल होना चाहिए और प्रशासन संचालन के तौर तरीकों में भी सुधार आना चाहिए। जी-20 देशों के नेताओं के सम्मान में आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट ने क्वींसलैंड संसद भवन में भोज का आयोजन किया था। इस मौके पर सभी नेता बिना सहायकों के मिले। भोज का आयोजन दोपहर में ब्रिस्बेन सम्मेलन केंद्र में दुनिया के विकसित और विकासशील देशों के समूह जी-20 का शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सुधारों को लोगों द्वारा ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए, इसे चालाकी के साथ गुपचुप तरीके से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सुधारों को जनकेंद्रित और जन-चालित होना चाहिए। दुनिया भर में यह धारणा है कि सुधार सरकार का कार्यक्र म है और यह जनता पर बोझ के समान है, इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुधार एक बहुस्तरीय प्रक्रि या है और इसे संस्थागत रूप दिया जाना चाहिये। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे प्रौद्योगिकी के साथ बढ़ाया जाना चाहिए और इससे समस्याओं को जड़ से दूर करने में सक्षम होना चाहिए। जी-20 शिखर सम्मेलन के मेजबान देश आस्ट्रेलिया ने कर चोरों के खिलाफ कारवाई के बारे में काफी आक्र मक रख अपनाया। भारत भी दुनिया में कर चोरों की पनाहगाह बने क्षेत्रों के खिलाफ जी-20 द्वारा कड़ी कारवाई चाहता है। कालेधन के खिलाफ भारत ने आवाज ऐसे समय उठाई है जब भ्रष्टाचार का विरोध करने वाले चाहते हैं कि जी-20 देशों को सार्वजनिक रजिस्टर बनाकर सीमापार अवैध धन के प्रवाह को रोकना चाहिए। रजिस्टर में उन लोगों का खुलासा होना चाहिए, जो कंपनियों अथवा व्यावसाय के मालिक हैं, अथवा उस पर नियंतण्ररखते हैं, कारोबार से फायदा उठाते हैं, लेकिन अपनी पहचान छुपाने के लिए मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल करते हैं और कर देने से बचते हैं। दुनिया के प्रत्येक महाद्वीप का प्रतिनिधित्व करने वाले नागरिक समाज के 24 नेताओं के संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने जी-20 नेताओं को एक खुला पत्र भेजा है जिसमें उनसे भ्रष्टाचार रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने और नियंतण्र पण्राली को अधिक पारदर्शी बनाने का आग्रह किया गया है। पारदर्शिता और स्पष्टता के सिद्धांत स्थापित करना जी- 20 के भ्रष्टाचार रोधी कार्य समूह का केंद्र बिंदु रहा है और यह लंबे समय से उसके एजेंडा में है। एबोट ने अपने शुरुआती टिप्पणी में कहा, ‘हां, हम मुक्त व्यापार चाहते हैं और हम ऐसा करेंगे। हां, हमें अधिक बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है और हम इसका निर्माण करेंगे।’ एबोट ने कहा, ‘इस कमरे के आसपास एकत्रित लोग..दुनिया के बहुत शक्तिशाली और प्रभावशीली लोग हैं।’
1.मोदी ने ब्रिक्स देशों के नेताओं से ब्लैक मनी पर मांगा सहयोग:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों में रखे कालेधन को वापस लाने के लिए दुनिया के देशों से सहयोग की मजबूत वकालत की है। कालेधन की समस्या से निपटने के उपाय तलाशने के भारी आंतरिक दबाव के बीच शनिवार को यहां जी- 20 देशों का शिखर सम्मेलन शुरू हो गया। मोदी पहली बार शिखर सम्मेलन में जी-20 के नेताओं से मिले। इस दौरान उन्होंने कहा कि विदेशों में रखे कालेधन को वापस लाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह संदेश भी दिया कि आर्थिक सुधारों को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। शिखर बैठक के मेजबान देश आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट ने वादा किया है कि सम्मेलन नियंतण्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2,000 अरब डॉलर जोड़ने की पहल करने में सफल रहेगा। इससे नियंतण्र आर्थिक वृद्धि में दो फीसद विस्तार होगा और लाखों रोजगार के अवसर बढें़गे। पांच देशों के ब्रिक्स समूह के नेताओं के बीच एक अनौपचारिक बैठक में कालेधन के मुद्दे को उठाते हुए मोदी ने कालेधन को वापस लाने के उद्देश्य को हासिल करने के लिए नजदीकी नियंतण्र समन्वय की जोरदार वकालत की। मोदी ने इस तरह से जी-20 शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही कालेधन के मुद्दे को गरमा दिया है। मोदी विदेशों में रखे कालेधन की एक-एक पाई लाने की पहले ही प्रतिबद्धता जता चुके हैं। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स नेताओं -चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा और ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ से कहा, ‘विदेशों में रखा काला धन वापस देश में लाना हमारी मुख्य प्राथमिकता है।’ मोदी ने कालेधन के मुद्दे पर दुनिया के देशों के बीच नजदीकी समन्वय स्थापित किए जाने पर जोर देते हुए विदेशों में रखे इस अवैध धन को सुरक्षा के लिए भी चुनौती बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने संवाददाताओं को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है जब कालेधन को लेकर सुरक्षा क्षेत्र पर गौर किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता संभालने के साथ ही लगातार यह कहते रहे हैं कि कालाधन वापस लाना उनकी प्राथमिकता है और उनकी सरकार ने सत्ता संभालते ही पहले ही दिन कालेधन का पता लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन को मंजूरी दी। मोदी ने बाद में जी-20 के अपने साथी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सुधार प्रक्रि या के समक्ष गतिरोध पैदा होना लाजिमी है। उन्होंने सुधारों को राजनीतिक दखलंदाजी से अलग रखने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि सुधारों से प्रक्रि याओं को सरल होना चाहिए और प्रशासन संचालन के तौर तरीकों में भी सुधार आना चाहिए। जी-20 देशों के नेताओं के सम्मान में आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट ने क्वींसलैंड संसद भवन में भोज का आयोजन किया था। इस मौके पर सभी नेता बिना सहायकों के मिले। भोज का आयोजन दोपहर में ब्रिस्बेन सम्मेलन केंद्र में दुनिया के विकसित और विकासशील देशों के समूह जी-20 का शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सुधारों को लोगों द्वारा ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए, इसे चालाकी के साथ गुपचुप तरीके से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सुधारों को जनकेंद्रित और जन-चालित होना चाहिए। दुनिया भर में यह धारणा है कि सुधार सरकार का कार्यक्र म है और यह जनता पर बोझ के समान है, इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुधार एक बहुस्तरीय प्रक्रि या है और इसे संस्थागत रूप दिया जाना चाहिये। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे प्रौद्योगिकी के साथ बढ़ाया जाना चाहिए और इससे समस्याओं को जड़ से दूर करने में सक्षम होना चाहिए। जी-20 शिखर सम्मेलन के मेजबान देश आस्ट्रेलिया ने कर चोरों के खिलाफ कारवाई के बारे में काफी आक्र मक रख अपनाया। भारत भी दुनिया में कर चोरों की पनाहगाह बने क्षेत्रों के खिलाफ जी-20 द्वारा कड़ी कारवाई चाहता है। कालेधन के खिलाफ भारत ने आवाज ऐसे समय उठाई है जब भ्रष्टाचार का विरोध करने वाले चाहते हैं कि जी-20 देशों को सार्वजनिक रजिस्टर बनाकर सीमापार अवैध धन के प्रवाह को रोकना चाहिए। रजिस्टर में उन लोगों का खुलासा होना चाहिए, जो कंपनियों अथवा व्यावसाय के मालिक हैं, अथवा उस पर नियंतण्ररखते हैं, कारोबार से फायदा उठाते हैं, लेकिन अपनी पहचान छुपाने के लिए मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल करते हैं और कर देने से बचते हैं। दुनिया के प्रत्येक महाद्वीप का प्रतिनिधित्व करने वाले नागरिक समाज के 24 नेताओं के संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने जी-20 नेताओं को एक खुला पत्र भेजा है जिसमें उनसे भ्रष्टाचार रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने और नियंतण्र पण्राली को अधिक पारदर्शी बनाने का आग्रह किया गया है। पारदर्शिता और स्पष्टता के सिद्धांत स्थापित करना जी- 20 के भ्रष्टाचार रोधी कार्य समूह का केंद्र बिंदु रहा है और यह लंबे समय से उसके एजेंडा में है। एबोट ने अपने शुरुआती टिप्पणी में कहा, ‘हां, हम मुक्त व्यापार चाहते हैं और हम ऐसा करेंगे। हां, हमें अधिक बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है और हम इसका निर्माण करेंगे।’ एबोट ने कहा, ‘इस कमरे के आसपास एकत्रित लोग..दुनिया के बहुत शक्तिशाली और प्रभावशीली लोग हैं।’
2. यूक्रेन पर निंदा के बाद जी 20 सम्मेलन से हटेंगे पुतिन:- दुनिया की अर्थव्यवस्था के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा जमाने वाले दुनिया के 20 देशों के संगठन जी-20 समिट के औपचारिक उद्घाटन से पहले यह सम्मेलन विवादों में आ गया है। यूक्रेन मामले में पश्चिमी नेताओं द्वारा निंदा झेलने वाले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आस्ट्रेलिया में जी 20 सम्मेलन से हटने का निश्चय किया है। सूत्रों के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन रविवार को होने वाले सत्र में हिस्सा नहीं लेंगे और अपने देश रवाना हो जाएंगे। इसकी वजह यूक्रेन में रूस की दखल को बताया जा रहा है। यूरोप के देशों और अमेरिका ने पुतिन पर यूक्रेन को लेकर दबाव बनाया है। पुतिन से कहा गया है कि अगर उनके देश ने यूक्रेन से सेनाएं नहीं हटाईं तो रूस पर और प्रतिबंध लग सकता है। ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों ने रूस पर दबाव बनाया है। लेकिन रूस ने यूक्रेन में दखल देने के आरोपों को नकारा है। रूस का कहना है कि उसके पास ब्रिक्स देशों का समर्थन है।
3. विनिवेश योजना पकड़ेगी रफ्तार:- कुछ बड़े आर्थिक सुधारों को परवान चढ़ाने के बाद राजग सरकार की विनिवेश नीति अब जल्द ही परवान चढ़ेगी। वित्त मंत्रलय के आला अधिकारी सरकार का पूरा विनिवेश एजेंडा बनाने में जुटे हुए हैं। इसके तहत आगे चलकर घाटा वहन करने वाले लगभग तीन दर्जन सरकारी उपक्रमों (पीएसयू) को फिर से निजी हाथों में बेचने की तैयारी है, लेकिन उसके पहले कुछ बड़े सरकारी उपक्रमों में शेयर बाजार के जरिये विनिवेश को सफल बनाने का काम होगा। सरकार की पहली प्राथमिकता चालू वित्त वर्ष के लिए तय 58,425 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य हासिल करना है। वित्त मंत्रलय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक देश में जिस तरह से निवेश का माहौल सुधरा है, उसे देखते हुए सरकारी उपक्रमों के विनिवेश व निजीकरण की एक स्पष्ट नीति जल्द सामने आएगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुआई में विनिवेश का पूरा रोडमैप बनाया जा रहा है। यह राजग के पूरे कार्यकाल के लिए होगा। यह एक तरह से राजग की विनिवेश नीति होगी। इस बार की यह नीति पूर्व की राजग के समय से अलग होगी। पिछली राजग सरकार ने घाटा उठाने वाले पीएसयू और तेल व विमानन कंपनियों को भी निजी हाथों में बेचने का फैसला किया था। हालांकि उसे इस काम में सफलता नहीं मिली थी। सरकार की नई विनिवेश नीति में निजीकरण को लेकर जोर तो होगा, लेकिन पिछली बार की तरह ज्यादा तेजी नहीं दिखाई जाएगी। लगातार घाटा वहन करने वाले उपक्रमों के निजी हाथों में बेचने से सरकार को कोई गुरेज नहीं होगा, लेकिन रणनीति व आर्थिक दृष्टिकोण से उपयोगी पीएसयू का निजीकरण नहीं होगा। अभी वित्त मंत्रलय का ध्यान ओएनजीसी, कोल इंडिया और एनएचपीसी में विनिवेश कार्यक्रम को सफल बनाने पर है। ओएनजीसी में पांच फीसद सरकार की हिस्सेदारी को शेयर बाजार के जरिये बेचने का काम इस महीने ही होगा। इसके बाद कोल इंडिया में 10 फीसद इक्विटी बेची जाएगी। इन तीनों उपक्रमों में विनिवेश से सरकार को 43,000 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होने की उम्मीद है।
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