मंगलवार, 18 नवंबर 2014

18November 2014(Tuesday)

18November 2014(Tuesday)
1.सरकार के भरो से देश नहीं चल सकता : मोदी:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि सरकार के भरोसे देश नहीं चल सकता और चलना भी नहीं चाहिए । उन्होंने कहा, देश चलाने के लिए लोगों को पहल करने देना चाहिए और शासन को उसमें रुकावट नहीं बनना चाहिए। प्रधानमंत्री ने सिडनी में ऑलफोंस एरीना में बड़ी संख्या में एकत्र हुए भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए कहा, मैं नहीं मानता कि सरकारें देश बनाती हैं। पहले लगता था कि सरकार देश बनाती है लेकिन मैं मानता हूं कि सरकार देश नहीं बनाती और उसे बनाना भी नहीं चाहिए क्योंकि देश लोग बनाते हैं। उन्होंने कहा, हमें देश बनाने के लिए लोगों को मौका देना चाहिए, सरकार उसमें बाधा नहीं बने और रास्ते से हट जाए। प्रधानमंत्री ने कहा, सरकार के भरोसे देश नहीं चल सकता और न चलना चाहिए। यह मेरा मानना है..लोगों को पहल करने दें। थोड़ी खिड़की खोलें.और ताजा हवा आने दें। लोगों के जीवन में सरकार के हस्तक्षेप को कम करने की दिशा में अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदमों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, उन्होंने विधायक, सांसद या राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणपत्र सत्यापित कराने की व्यवस्था खत्म कर दी है। उन्होंने कहा, पिछली सरकारों को कानून बनाने में मजा आता था, मुझे अनावश्यक कानून खत्म करने में आनंद आता है। छोटों को बड़ा बनाना है : देश में स्वच्छता अभियान चलाने, शौचालय बनाने और सभी गरीबों के बैंक खाते खोलने के कायरे को वरीयता के आधार पर आगे बढ़ाने के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा, कई लोगों के बड़े बड़े काम करने के सपने होते हैं। वह सपने उन्हें मुबारक। मुझे तो छोटे छोटे काम करने हैं । छोटे लोगों के लिए करने हैं और छोटों को बड़ा बनाने के लिए करने हैं। उन्होंने विास दिलाया कि भारत फिर से उठ खड़ा होगा, सामथ्र्यवान बनेगा और विश्व को संकट से मुक्ति दिलाने की ताकत बनेगा। मोदी ने कहा, युवाशक्ति और नौजवानों की ताकत के बल पर भारत मजबूत शक्ति बनेगा। हाल के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारतीय राजनीति में परिवर्तन के लिए विश्वभर में रह रहे भारतीयो की उमंग को दर्शाते हैं। इन नतीजों के प्रति लोगों की जिज्ञासा,भारत के उज्ज्वल भविष्य को लेकर थी, न कि किसी पार्टी की हार या जीत को लेकर। सात करोड़ के अधिक खाते खुले : जन धन योजना की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, पिछले 67 साल में एक साल में औसतन एक करोड़ बैंक खाते खुलते थे लेकिन इस योजना के शुरू होने के 10 हफ्ते में सात करोड़ से अधिक खाते खुल चुके हैं। चुनाव के बाद देश में बदलाव के माहौल का दावा करते हुए उन्होंने कहा, सरकार वही, मुलाजिम वही, दफ्तर वही, फाइल वही, आदत वही, लोग भी वही.. लेकिन काम हुआ कि नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा, देश के लोगों और व्यवस्थाओं को कम करके नहीं आंके। अगर सही दिशा दी जाए तब लोग उससे भी आगे दौड़ने को तैयार हैं। ‘स्वच्छ भारत’ में सहयोग : मोदी ने आस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों का भी आह्वान किया कि स्वच्छ भारत के अभियान को आगे बढ़ाने में वह भी पहल करें और भारत के अपने मूल गांव एवं स्थानों पर शौचालय बनाने में योगदान करें। इस पर उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियां बजाकर अपना समर्थन जताया।
2. दो महीने में होगा पीआईओ और ओसीआई का विलय:- आस्ट्रेलिया से भारत आने वाले पर्यटकों को ‘आगमन पर वीजा’ सुविधा देने के आश्वासन के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारतीय समुदाय के लोगों की सहूलियत के लिए ओसीआई और पीआईओ दज्रे का विलय करने की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करने के लिए दो महीने की समयसीमा तय की। सिडनी के ऑलफोंस एरीना में करीब 20 हजार की संख्या में भारतीय और भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान में उनका सहयोग मांगा। मोदी ने कहा, उनकी सरकार आस्ट्रेलियाई पर्यटकों के लिए आगमन पर वीजा (वीजा ऑन एराइवल) सुविधा प्रदान करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, पीआईओ (परसन ऑफ इंडियन ओरिजिन) और ओसीआई )ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया) के दर्जे का विलय कर दिया जायेगा और अगले साल सात जनवरी से अहमदाबाद में आयोजित होने जा रहे प्रवासी भारतीय दिवस तक ऐसा हो जाएगा। मोदी ने कहा, यह बात मैं तारीख बता कर कह रहा हूं। प्रधानमंत्री ने कहा, उन्होंने पीआईओ और ओसीआई के विलय की घोषणा सितम्बर में अमेरिका में की थी लेकिन तब कोई समयसीमा तय नहीं की थी। प्रधानमंत्री ने कहा, पहले प्रवासी भारतीयों को देश में आने पर पुलिस थाने जाना पड़ता था और पुलिस उनका सत्यापन करती थी। हमने अब तय कर दिया है कि किसी को थाने नहीं जाना पड़ेगा। मोदी ने कहा, अगले साल फरवरी तक सिडनी में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र स्थापित हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने आस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के लोगों से ‘माईगॉव’ पर सुझाव और विचार भेजने को कहा। भारतीय मूल के लोगों को लुभाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, अब आपकी बात भी हो जाए। आप दूतावास जाते हैं तो कोई पूछता नहीं है। फोन नहीं उठाता। ई मेल का जवाब नहीं देता। मोदी ने कहा, लेकिन मैंने एक-एक बात, एक-एक करके लागू की। पीआईओ और ओसीआई को विलय करने से अब लोगों की यह शिकायतें दूर हो जायेगी कि कोई पूछता नहीं, फोन नहीं उठाता, ई मेल का जवाब नहीं देता।
3. आस्ट्रेलिया के साथ कई करार पर होंगे हस्ताक्षर:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को यहां आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट से मुलाकात करेंगे और दोनों देश सजायाफ्ता कैदियों के हस्तांतरण, नशीली दवाओं के कारोबार पर अंकुश लगाने और सामाजिक सुरक्षा समेत चार-पांच समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। तीन देशों की 10 दिन की यात्रा के दूसरे चरण में यहां पहुंचे मोदी का उद्देश्य आस्ट्रेलिया के साथ रणनीतिक भागीदारी करना है ताकि भारत के आर्थिक लक्ष्य और सामुद्रिक सुरक्षा समेत समग्र सुरक्षा हितों को मजबूत किया जा सके। मोदी ने अपनी यात्रा के लिए रवाना होने से पहले कहा था ‘आस्ट्रेलिया और हमारे बीच बहुत सी समानताएं हैं लेकिन हमारे राजनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक संबंध में जितनी संभावनाएं हैं उससे कम हैं।’ आस्ट्रेलिया के साथ गहरी रणनीतिक भागीदारी का पक्ष लेते हुए उन्होंने कहा था कि इससे भारत के आर्थिक लक्ष्य को समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा था ‘इससे सामुद्रिक सुरक्षा समेत हमारे सुरक्षा हितों को बढ़ावा मिलेगा और हमारी महाद्वीपीय एवं समुद्री क्षेत्र में दूर दूर तक शांति एवं स्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश मजबूत होगी।’ मोदी के साथ एबोट की वार्ता के बाद दोनों देश चार से पांच समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह समझौते सजायाफ्ता कैदियों के हस्तांतरण, नशीली दवाओं के व्यापार पर लगाम लगाने में सहयोग, सामाजिक सुरक्षा, पर्यटन और संस्कृति से जुड़े होंगे। मोदी की एबोट के साथ बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच पांच समझौते और सहमति ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। मोदी और एबोट ने पिछले महीने दिल्ली में शिखर बैठक की थी और इस दौरान भारत एवं आस्ट्रेलिया ने असैन्य परमाणु सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों नेताओं ने अपने संबंधित वार्ताकारों को निर्देश दिया है कि वह असैन्य परमाणु समझौते से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रि याएं जल्दी पूरी करें। इससे यूरेनियम व्यापार की शुरुआत जल्द करने में सुविधा होगी। आस्ट्रेलिया में विश्व का 40 प्रतिशत यूरेनियम भंडार है और वह सालाना करीब 7,000 टन येलो केक (यूरेनिया-यूरेनियम का संघनित रूप) का निर्यात करता है। भारत और आस्ट्रेलिया ने यूरेनियम बिक्री संबंधी वार्ता 2012 में शुरू की थी। मोदी पिछले 28 साल में आस्ट्रेलिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले राजीव गांधी ने 1986 में आस्ट्रेलिया की यात्रा की थी।
4. भारत-चीन का संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू:- भारत और चीन की सेनाओं के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास ‘हाथ में हाथ’ का शानदार शुभारम्भ सोमवार को पुणो स्थित औंध मिलिट्री कैन्टोनमेंट में हुआ। दोनों देशों की सेनाओं के बीच श्रृंखला का यह चौथा अभ्यास है। चीनी सेना अपने सैन्य साजोसामान के साथ रविवार को दो आईएल-76 परिवहन विमानों से सीधे पुणो के लोहेगांव एयरबेस पर पहुंची थी। आतंकवाद विरोधी अभियानों पर आधारित यह संयुक्त युद्धाभ्यास 12 दिनों तक चलेगा। सोमवार को इस युद्धाभ्यास का उद्घाटन समारोह औंध मिलिट्री कैम्प के परेड ग्राउंड पर किया गया, जिसमें भारतीय सेना के कार्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बाबी मैथ्यू और चीन की सेना की तरफ से चेंगदू मिलिट्री कमांड के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सी जियांग युआन ने शिरकत की।
5. नई विज्ञान नीति की तैयारियों में जुटी सरकार:- देश में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार नई विज्ञान नीति 2020 की तैयारियों में जुटी है। इसके लिए शीघ्र ही समिति का गठन किया जाएगा जो नई नीति के लिए प्रारूप तैयार करेगी। इस नीति के लिए देशव्यापी परामर्श प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहते हैं कि घरेलू वैज्ञानिक प्रतिभा का उपयोग कर देश को शोध के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाए। उनकी इच्छा है कि 21वीं सदी में वैज्ञानिक एवं तकनीकी मामलों में देश आत्मनिर्भर हो। केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री हर्षवर्धन के अनुसार इस नीति को विजन सांइस और तकनीक 2020 नाम दिया गया है। हर्षवर्धन के अनुसार ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री ने रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए पहले से प्रस्तावित ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। यह इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री को अपने वैज्ञानिकों की योग्यताओं पर कितना भरोसा है। लिहाजा अब देश के वैज्ञानिकों को चाहिए कि वे अपने प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं पर खरे उतरें। सूत्रों के अनुसार नई विज्ञान नीति के तहत देशभर के शोध संस्थानों को न केवल अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा बल्कि इसके लिए धन की कमी भी आड़े नहीं आने दी जाएगी। सरकार की मंशा है कि रक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में जिन उपकरणों के लिए देश दूसरे देशों पर निर्भर है, उन्हें स्वदेशी तकनीक से बनाया जाए। मेक इन इंडिया कार्यक्रम से स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने का काम शुरू हो चुका है। रक्षा क्षेत्र में भारत बहुत बड़ा आयातक है। इसके चलते हमारे धन से दुनिया के अन्य कई देश धनवान हो रहे हैं और संबंधित देशों के युवकों को रोजगार मिल रहा है। लिहाजा केंद्र सरकार की कोशिश है कि भविष्य में भारत शोध व तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर विदेशी मुद्रा की बचत करे और देश में रोजगार के अवसर बढ़ाए।
6. चीन से आयात पर कसेगा शिकंजा:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को चीन से आयातित उत्पादों से बचाने के लिए सरकार भारतीय मोबाइल बाजार में धूम मचा रही चीनी कंपनी शियोमी के मोबाइल और वहां से आयात होने वाले अन्य उत्पादों को नियंत्रित करने की तैयारी कर रही है। अा िध्ा क ा िर क सूत्रों के मुताबिक सरकार चीन से आयात होने वाले बिजली और दूरसंचार उपकरणों पर लगाम लगाने के लिए इनके विकल्प तलाश रही है। भारतीय बाजार में चीन के उत्पादों की बाढ़ को रोकने के लिए आयात प्रबंधन रणनीति पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। साथ ही चालू खाता घाटा के बढ़ने की आशंका को देखते हुए भी सरकार वहां के उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। चीन की मोबाइल बनाने वाली कंपनी शियोमी, जियोनी, लेनेवो के स्मार्टफोन ने घरेलू कंपनियों की बिक्री को प्रभावित किया है बल्कि इस मामले में नियंतण्र स्तर पर बादशाहत रखने वाली कोरियाई कंपनी सैमसंग को भी पछाड़ दिया है। इसी तरह से इलेक्ट्रानिकस एवं अन्य उत्पाद बनाने वाली चीनी कंपनियां यहां की कंपनियों को कड़ी चुनौती दे रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चीन के साथ व्यापार घाटे के बड़े अंतर को देखते हुए सरकार वहां के आयातित उत्पादों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कुछ आवश्यक उपाय जैसे कि एंटी डंपिंग शुल्क और प्रतिकारी शुल्क लगाने की तैयारी में है। उनके मुताबिक पिछले कुछ वर्षो में चीन से मोबाइल फोन, लैपटाप, सीडी, सीडी कवर, सिरेमिक, आटो सीट कवर जैसे 1500 उत्पादों का आयात किया गया है। पिछले दो वर्षो में इलेक्ट्रानिक और कंज्यूमर गुड्स का आयात चीन से किए गए कुल आयात एक तिहाई है। सरकार का मानना है कि इन आयातित उत्पादों को स्थानीय स्तर पर भी बनाया जा सकता है। गत दो वर्षो में चीन से 12.5 अरब डालर के उपभोक्ता वस्तुओं का आयात किया गया जिनमें मोबाइल फोन का आयात पांच अरब डालर अर्थात 31 हजार करोड़ रपए का रहा है। पिछले तीन-चार वर्षो में मोबाइल फोन के आयात में काफी तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कवायद चीनी उत्पादों की भरमार से सैमसंग जैसी कंपनियों की बाजार में बादशाहत पर मंडरा रहा खतरा मौजूदा समय में चीन से कुल 1500 चीजों का हो रहा है
7. भारत ने ग्रीनहाउस गैस पर र्चचा का विरोध नहीं किया:- भारत ने अपने रुख में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए आज संयुक्त राष्ट्र के मांट्रीयल प्रोटोकॉल के तहत नुकसानदेह ग्रीनहाउस गैस हाइड्रोफ्लोरोकार्बन्स (एचएफसी) के मुद्दे पर र्चचा का विरोध नहीं किया। भारत के रख में यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा इस साल 30 सितम्बर को एचएफसी पर जारी संयुक्त वक्तव्य के मद्देनजर आया है जिसके तहत दोनों देशों ने मांट्रीयल प्रोटेाकॉल के तहत हानिकारक ग्रीनहाउस गैस पर र्चचा करने पर सहमति जताई थी। एचएफसी को ओजोन की परत को नुकसान पहुंचाने वाले हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन्स (एचसीएफसी) की जगह रखा गया है। भारत पिछले दिनों तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तर्क देता रहा है कि मांट्रीयल प्रोटोकॉल ओजोन की परत का क्षरण करने वाले तत्वों के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए विशेष संधि है। भारत में पर्यावरण और वन मंत्रालय के अधिकारियों ने उन एचएफसी पर र्चचा करने के लिए प्रस्तावित संशोधनों का विरोध किया था जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले नहीं हैं। यहां मांट्रीयल प्रोटोकॉल पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन के शुरुआती दिन ए दुरईसामी की अध्यक्षता में भारतीय प्रतिनिधि उस समय कुछ नहीं बोला जब एजेंडा पेश किया गया और उसे पारित करने के लिए कहा गया।
8. सबसे ज्यादा गुलाम अब भी भारत में:- आधुनिक दौर की दासता के मामले में भारत की स्थिति काफी खराब है क्योंकि वहां करीब 1.43 करोड़ लोग इस तरह की दासता में ‘फंसे’हुए हैं। नियंतण्र दासता सूचकांक-2014 के अनुसार पूरे विश्व में आधुनिक दौर की दासता का सामना कर रहे लोगों की संख्या करीब 3.58 करोड़ है और इनमें से 45 फीसदी भारत एवं पाकिस्तान में हैं। आस्ट्रेलिया के पर्थ स्थित ‘वाक फ्री फाउंडेशन’ की ओर से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में 2.35 करोड़ लोग आधुनिक दौर की दासता की चंगुल से घिरे हैं। यह आंकड़ा नियंतण्र संख्या का करीब दो तिहाई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है, इनमें से 1.42 करोड़ भारत और 20.5 लाख लोग पाकिस्तान में हैं। इन दोनों देशों में नियंतण्र संख्या का 45 फीसदी आंकड़ा है। नेपाल में 228,700 बांग्लादेश में 6,80,900, अफगानिस्तान में 132,800 तथा श्रीलंका में 73,600 लोग आधुनिक दौर की दासता का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोग मानव तस्करी, जबरन मजदूरी, कर्ज की मजबूरी, जबरन शादी अथवा व्यावसायिक यौन उत्पीड़न के रूप में दासता का सामना कर रहे हैं।

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