सोमवार, 10 नवंबर 2014

06 November 2014(Thursday)

06 November 2014(Thursday)
1.जलवायु परिवर्तन परिषद से सुनीता नारायण और रतन टाटा बाहर:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन परिषद का पुनर्गठन किया है। सीएसई (सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट) की महानिदेशक व पर्यावरणविद् सुनीता नारायण और टाटा ग्रुप के पूर्व प्रमुख रतन टाटा को उच्च स्तरीय सलाहकार समूह से बाहर कर दिया गया है। पिछले तीन वर्षो में समूह की एक भी बैठक नहीं हुई है। परिषद की अध्यक्षता प्रधानमंत्री खुद करते हैं। ग्लोबल वार्मिग पर संयुक्त राष्ट्र की पेरू में होने वाली बैठक से पहले यह अहम बदलाव किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को टेरी (द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टिट्यूट) के प्रमुख आरके पचौरी, नितिन देसाई और पूर्व राजनयिक चंद्रशेखर दासगुप्ता को 18 सदस्यीय परिषद में गैर सरकारी सदस्य के तौर पर शामिल किया। संप्रग के शासनकाल में वर्ष 2007 में गठित प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली जलवायु परिवर्तन परिषद में सुनीता नारायण और रतन टाटा को शामिल किया गया था। सीएसई ने सुनीता नारायण के परिषद से बाहर होने पर कोई भी टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। हालांकि, संस्था ने परिषद के साथ पूरा सहयोग करने की बात कही है। सुनीता नारायण को जलवायु परिवर्तन परिषद से बाहर करने के सवाल पर पर्यावरण मंत्रलय के अधिकारियों ने बताया कि परिषद के अध्यक्ष को किसी भी मंत्री या अधिकारी या विशेषा को बैठक में आमंत्रित करने का अधिकार है। पुनर्गठित परिषद में शहरी विकास मंत्री और कोयला मंत्री को भी सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। परिषद में दोनों मंत्रलयों की भागीदारी नहीं थी। इसके अलावा ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के अध्यक्ष अजय माथुर, पूर्व नौकरशाह जेएम मौसकर, कैबिनेट सचिव और विदेश व पर्यावरण मंत्रलय के सचिवों को भी परिषद में शामिल किया गया है। माथुर पहले भी परिषद के सदस्य थे। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र परिषद के सदस्य संयोजक होंगे। पर्यावरण मंत्रलय के मुताबिक समिति जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर कार्ययोजना तैयार करने के अलावा नीतियों के क्रियान्वयन की निगरानी भी करेगी।
2. कारोबार बढ़ाने को छह समझौते करेंगे भारत-रूस:- भारत और रूस ने कारोबारी सहयोग को बूस्टर डोज देते हुए छह नए समझौतों पर रजामंदी जताई है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रूसी उप-प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोजिन के बीच व्यापार संबंधी अंतर-सरकारी आयोग की बैठक के बाद दोनों देशों ने मध्य एशिया व्यापार समझौते की संभावनाएं तलाशने और रूसी कंपनी की मदद से भारत में स्मार्ट सिटी बनाने समेत सहयोग की नई परियोजनाओं को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच दिसंबर में होने वाली पहली वार्षिक शिखर वार्ता से पहले नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच अंतर सरकारी आयोग की बैठक हुई। विदेश मंत्रलय के मुताबिक आयोग की 20वीं बैठक में आर्थिक, विान-प्रौद्योगिकी व सांस्कृतिक सहयोग संबंधी मामलों की समीक्षा हुई। साथ ही दोनों पक्षों ने प्राथमिकता के आधार पर कई सहयोग परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने का भी फैसला किया। विदेश मंत्रलय के अनुसार बेलारूस, कजाखिस्तान, रूस के साथ सेवा और उत्पाद क्षेत्र में समझौते की संभावना तलाशने के लिए संयुक्त अध्ययन समूह बनाएंगे। उत्तर-दक्षिण व्यापार गलियारे को बढ़ावा देने और कृषि व खाद्य पदार्थो के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयासों पर भी सहमति बनी है। रूस के पर्म इलाके की टिल्टस्काई में पोटैशियम व मैग्नीशियम खदानों के विकास में भारतीय कंपनी राष्ट्रीय खनिज विकास निगम की साङोदारी पर सहमति बनी है। इस दौरान भारत और रूस के बीच रूसी कंपनी एएफके सिस्टेमा की मदद से स्मार्ट सिटी विकसित करने पर भी सहमति बनी है। इसके अलावा अंतरिक्ष और उपग्रह क्षेत्र में भी दोनों देश साङोदारी बढ़ाएंगे। रूस अपने नेविगेशन सेटेलाइट ग्लोनास की सुविधाएं भारत से साझा करने का प्रस्ताव दे चुका है। भारत और रूस के नेविगेशन प्रणाली ग्लोनास के मॉड्यूलों का संयुक्त उत्पादन शुरू करने की योजना पर भी बात हो रही है।
3. न्याय मित्र के सुझावों पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट:- सुप्रीम कोर्ट पुलिस हिरासत में होने वाली मौत और प्रताड़ना की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए न्याय मित्र (एमाइकस क्यूरी) द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करेगा। न्याय मित्र एएम सिंघवी ने पुलिस थानों और जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने समेत कई सुझाव दिए हैं। वर्ष 1986 में दाखिल एक जनहित याचिका पर बुधवार को जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि देशभर के थानों व जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाकर, मानवाधिकार आयोग गठित कर और गैर आधिकारिक लोगों द्वारा जेलों व हवालात के औचक निरीक्षण के जरिये हिरासत में होने वाली प्रताड़ना व मौत की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। सिंघवी ने सुझाव दिया कि मानवाधिकार संरक्षण कानून के प्रावधानों के तहत हर राज्य को छह महीने के अंदर राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) का गठन करना चाहिए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि दिल्ली, अरुणाचल, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा और नगालैंड में इस तरह के आयोग नहीं हैं। सिंघवी ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि एसएचआरसी अध्यक्ष और सदस्यों के पद हरहाल में तीन माह के अंदर भरने का आदेश दिया जाए। उन्होंने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मशवरा कर प्रत्येक जिलों में मानवाधिकार अदालत गठित करने का भी सुझाव दिया। सिंघवी ने हिरासत में मौत के मामलों की प्रारंभिक जांच में पुलिसकर्मियों के दोषी पाए जाने की आशंका पर उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने का सुझाव दिया है।
4. वाहनों में बायो डीजल को बढ़ावा देने को बदलेगी नीति:- सरकार रेल और सड़क परिवहन दोनों ही क्षेत्रों में बायो डीजल के उपयोग को बढ़ावा देगी। इसके संकेत यहां बायो डीजल पर आयोजित सम्मेलन में दिए गए। सम्मेलन में ग्रामीण विकास, जहाजरानी तथा सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वाहनों में बायो डीजल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नीति में बदलाव लाने की बात कही। गडकरी के मुताबिक बायो डीजल संयंत्र लगाने के लिए बंजर जमीन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। रेलमंत्री सदानंद गौड़ा का कहना था कि रेलवे अपने 4,000 डीजल इंजनों में पांच फीसद बायो डीजल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल करेगी। गडकरी ने कहा बायो डीजल के उपयोग को बढ़ावा देकर न केवल पेट्रोलियम बिल में कमी की जा सकती है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। बंजर जमीन पर खाद्य व अखाद्य तेलों की खेती करने तथा इनसे बायो डीजल बनाने के प्लांट लगाने के लिए सरकार एक नीति बना रही है। इस संबंध में एक नोट तैयार किया गया है। इसे जल्द ही कैबिनेट के विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। गडकरी के मुताबिक, मोटर वाहनों में बायो डीजल के इस्तेमाल के लिए भी नीति में संशोधन किया जाएगा। मौजूदा नीति के तहत वाहनों में बायो डीजल के उपयोग की इजाजत नहीं है। फलस्वरूप देश में बनने वाले बायो डीजल का निर्यात हो रहा है। बायो डीजल को बढ़ावा देने के लिए बिजली, रेलवे, पेट्रोलियम मंत्रलयों के साथ भी चर्चा की जाएगी। कारों में भी बायो डीजल के इस्तेमाल के लिए नियमों में आवश्यक बदलाव किया जा रहा है। बायो डीजल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार 2013 तक विश्व में करीब दो करोड़ बीस लाख टन बायो डीजल की खपत हो रही थी। भारत में यह खपत सिर्फ 11 लाख टन थी। फिलहाल देश में 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से सालाना 12 लाख टन बायो डीजल उत्पादन की क्षमता तैयार हो चुकी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप चतुर्वेदी ने कहा कि देश में दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों की सीधे बिक्री की अनुमति है, मगर बड़े ग्राहकों को स्वच्छ ईंधन बेचने पर कई तरह की पाबंदियां लगी हुई हैं। इससे पहले सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए रेलमंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि रेलवे अपने 4,000 इंजनों में बायो डीजल का उपयोग करेगी। इसके लिए डीजल में पांच फीसद बायो डीजल का मिश्रण किया जाएगा। रेलवे सालाना कम से कम 15 हजार करोड़ रुपये के डीजल का उपयोग करता है। इसमें जरा सी कमी से भी सैकड़ों करोड़ बचेंगे। पर्यावरण भी स्वच्छ होगा। बायो डीजल में डीजल की अपेक्षा कम कार्बन उत्सर्जन होता है। इसके लिए लोकोमोटिव के डिजाइन में भी बदलाव नहीं करना पड़ता।
5. सुधर सकती है भारत की रैंकिंग : विश्व बैंक:- कारोबार करने में सहूलियत के मामले में हाल ही में भारत को142वें पायदान पर रखने वाले विश्व बैंक ने कहा है कि राज्यों में अपनाई गई अच्छी गतिविधियों को भी शामिल किया जाए तो इस रैंकिंग में कम से कम 50 पायदान का सुधार होगा। विश्व बैंक के वरिष्ठ क्षेत्रीय अर्थशास्त्री डेनिस मेदवेदेव ने बुधवार को कहा, ‘कुछ साल पहले विश्व बैंक ने राज्यों के स्तर पर कारोबार करने में सहूलियत पर काम किया था। हमने पाया कि अगर देश में जारी सभी अच्छी गतिविधियों को एक साथ ले आया जाए तो रैंकिंग में 50 से अधिक स्थान का सुधार हो सकता है।’ सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर एक संवाद में उन्होंने कहा, ‘अत: कई समाधान भारत में पाये जा सकते हैं।’ कारोबार करने में सहूलियत के मामले में 189 देशों में भारत के 142वें स्थान पर आने के साथ यह बात कही गई है। हालांकि ताजा रैंकिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा देश को व्यापार अनुकूल गंतव्य बनाने के लिए उठाए गए कदमों पर गौर नहीं किया गया है। करीब एक घंटे के संवाद के दौरान मेदवेदेव ने देश के विकास को लेकर उम्मीद जताई।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें