10 November 2014(Monday)
1.टीम मोदी में 21 नए चेहरे:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मंत्रिपरिषद का पहला विस्तार करते हुए मनोहर पार्रिकर और सुरेश प्रभु सहित 21 लोगों को शामिल किया, लेकिन शिवसेना ने ऐन मौके पर मंत्रिपरिषद में अपने एक वरिष्ठ नेता को शामिल नहीं करने का फैसला किया। शिवसेना ने मंत्रिपरिषद विस्तार में उसे केवल एक राज्य मंत्री पद देने की पेशकश को मानने से इनकार कर दिया और पार्टी शपथग्रहण समारोह में नहीं आई। शिवसेना के साथ भाजपा के तनावपूर्ण रिश्तों में उस समय और कड़वाहट आ गई जब वाजपेयी सरकार में बिजली मंत्री रह चुके सुरेश प्रभु को सुबह शपथग्रहण से पहले भाजपा में शामिल कर लिया गया। प्रभु ने रविवार को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह में प्रभु के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा और हरियाणा के जाट नेता बीरेंद्र सिंह ने कैबिनेट मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। बीरेंद्र सिंह हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए। मई में भाजपानीत सरकार के सत्ता में आने के बाद पहले मंत्रिपरिषद विस्तार में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर को शामिल किया गया। मंत्रिपरिषद के विस्तार में बंडारू दत्तात्रेय और राजीव प्रताप रूडी को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शामिल किया गया है, जो वाजपेयी सरकार में भी मंत्री थे। दिल्ली से लगे गौतमबुद्ध नगर (नोयडा) से सांसद महेश शर्मा को भी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शामिल किया गया है। शिवसेना के राज्यसभा सदस्य अनिल देसाई के मंत्री बनने को लेकर र्चचा थी, लेकिन उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे से ही मुंबई लौटने का निर्देश दिया गया। शिवसेना की दो कैबिनेट पद की मांग के विपरीत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें बताया कि देसाई के लिए केवल राज्य मंत्री का पद संभव है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इसके बाद इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया। ऐसा कहा जा रहा है कि शिवसेना केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने प्रतिनिधि भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते को वापस लेने और महाराष्ट्र में विपक्ष में बैठने की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद के इस पहले विस्तार में 14 राज्य मंत्रियों को शामिल किया। इनमें मुख्तार अब्बास नकवी, रामकृपाल यादव, हरिभाई पारथीभाई चौधरी, सांवर लाल जाट, मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंडारिया, गिरिराज सिंह, हंसराज गंगाराम अहीर, प्रो. रामशंकर कठेरिया, जयंत सिन्हा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, बाबुल सुप्रियो, साध्वी निरंजन ज्योति, विजय सांपला (सभी भाजपा से) और वाईएस चौधरी (तेदेपा) शामिल हैं। भाजपा उपाध्यक्ष और वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे मुख्तार अब्बास नकवी को राज्य मंत्री और रूडी को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। आश्र्चयजनक रूप से पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित महेश शर्मा को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। हंसराज गंगाराम अहीर को कोयला ब्लाक आवंटन घोटाले को उजागर करने के प्रयासों का पुरस्कार मिला। मोदी को पसंद नहीं करने वाले मुसलमानों का स्थान पाकिस्तान में होने संबन्धी विवादास्पद बयान देने वाले बिहार के गिरिराज सिंह को मंत्रिपरिषद में स्थान दिया गया, जबकि राजद छोड़कर भाजपा में आए और लालू प्रसाद की पुत्री मीसा भारती को पराजित करने वाले रामकृपाल यादव को भी स्थान दिया गया। वहीं लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी को पराजित करने वाले रूडी को भी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। मई में सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार मंत्रिपरिषद का विस्तार किया है और इसमें गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर को रक्षा मंत्री बनाया जाना तय माना जा रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है। इस विस्तार के साथ मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या 45 से बढ़कर 66 हो गई है, जिसमें प्रधानमंत्री समेत 27 कैबिनेट स्तर के मंत्री, 13 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 26 राज्य स्तर के मंत्री शामिल हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मंत्रिपरिषद के सहयोगी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों में वसुंधरा राजे, रमण सिंह, मनोहर लाल खट्टर के अलावा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी से समारोह में कोई शामिल नहीं हुआ। शपथग्रहण समारोह में जाने से पहले नये मंत्रियोें ने चायपान पर प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की। आईआईटी स्नातक 58 वर्षीय पार्रिकर का मोदी के साथ अच्छा तालमेल है और वह अपनी ईमानदारी और प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। सुरेश प्रभु की ख्याति एक कुशल प्रशासक के रूप में है और वाजपेयी सरकार में बिजली मंत्री के रूप में वह सुधारों के लिए जाने गए। लेकिन तब शिवसेना ने उन्हें अचानक मंत्रिपरिषद से वापस ले लिया। इसके बाद से ही वह शिवसेना में सक्रि य नहीं रहे। मंत्रिपरिषद में दत्तात्रेय को शामिल कर नवगठित तेलंगाना राज्य को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। राजीव प्रताप रूडी के लिए यह सरकार में वापसी है। इससे पहले वह वाजपेयी सरकार में मंत्री थे। पहली बार सांसद बने महेश शर्मा के चयन को आश्र्चय के रूप में देखा जा रहा है जिन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।
1.टीम मोदी में 21 नए चेहरे:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मंत्रिपरिषद का पहला विस्तार करते हुए मनोहर पार्रिकर और सुरेश प्रभु सहित 21 लोगों को शामिल किया, लेकिन शिवसेना ने ऐन मौके पर मंत्रिपरिषद में अपने एक वरिष्ठ नेता को शामिल नहीं करने का फैसला किया। शिवसेना ने मंत्रिपरिषद विस्तार में उसे केवल एक राज्य मंत्री पद देने की पेशकश को मानने से इनकार कर दिया और पार्टी शपथग्रहण समारोह में नहीं आई। शिवसेना के साथ भाजपा के तनावपूर्ण रिश्तों में उस समय और कड़वाहट आ गई जब वाजपेयी सरकार में बिजली मंत्री रह चुके सुरेश प्रभु को सुबह शपथग्रहण से पहले भाजपा में शामिल कर लिया गया। प्रभु ने रविवार को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह में प्रभु के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा और हरियाणा के जाट नेता बीरेंद्र सिंह ने कैबिनेट मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। बीरेंद्र सिंह हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए। मई में भाजपानीत सरकार के सत्ता में आने के बाद पहले मंत्रिपरिषद विस्तार में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर को शामिल किया गया। मंत्रिपरिषद के विस्तार में बंडारू दत्तात्रेय और राजीव प्रताप रूडी को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शामिल किया गया है, जो वाजपेयी सरकार में भी मंत्री थे। दिल्ली से लगे गौतमबुद्ध नगर (नोयडा) से सांसद महेश शर्मा को भी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शामिल किया गया है। शिवसेना के राज्यसभा सदस्य अनिल देसाई के मंत्री बनने को लेकर र्चचा थी, लेकिन उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे से ही मुंबई लौटने का निर्देश दिया गया। शिवसेना की दो कैबिनेट पद की मांग के विपरीत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें बताया कि देसाई के लिए केवल राज्य मंत्री का पद संभव है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इसके बाद इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया। ऐसा कहा जा रहा है कि शिवसेना केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने प्रतिनिधि भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते को वापस लेने और महाराष्ट्र में विपक्ष में बैठने की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिपरिषद के इस पहले विस्तार में 14 राज्य मंत्रियों को शामिल किया। इनमें मुख्तार अब्बास नकवी, रामकृपाल यादव, हरिभाई पारथीभाई चौधरी, सांवर लाल जाट, मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंडारिया, गिरिराज सिंह, हंसराज गंगाराम अहीर, प्रो. रामशंकर कठेरिया, जयंत सिन्हा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, बाबुल सुप्रियो, साध्वी निरंजन ज्योति, विजय सांपला (सभी भाजपा से) और वाईएस चौधरी (तेदेपा) शामिल हैं। भाजपा उपाध्यक्ष और वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे मुख्तार अब्बास नकवी को राज्य मंत्री और रूडी को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। आश्र्चयजनक रूप से पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित महेश शर्मा को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। हंसराज गंगाराम अहीर को कोयला ब्लाक आवंटन घोटाले को उजागर करने के प्रयासों का पुरस्कार मिला। मोदी को पसंद नहीं करने वाले मुसलमानों का स्थान पाकिस्तान में होने संबन्धी विवादास्पद बयान देने वाले बिहार के गिरिराज सिंह को मंत्रिपरिषद में स्थान दिया गया, जबकि राजद छोड़कर भाजपा में आए और लालू प्रसाद की पुत्री मीसा भारती को पराजित करने वाले रामकृपाल यादव को भी स्थान दिया गया। वहीं लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी को पराजित करने वाले रूडी को भी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। मई में सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार मंत्रिपरिषद का विस्तार किया है और इसमें गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर को रक्षा मंत्री बनाया जाना तय माना जा रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है। इस विस्तार के साथ मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या 45 से बढ़कर 66 हो गई है, जिसमें प्रधानमंत्री समेत 27 कैबिनेट स्तर के मंत्री, 13 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 26 राज्य स्तर के मंत्री शामिल हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मंत्रिपरिषद के सहयोगी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों में वसुंधरा राजे, रमण सिंह, मनोहर लाल खट्टर के अलावा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी से समारोह में कोई शामिल नहीं हुआ। शपथग्रहण समारोह में जाने से पहले नये मंत्रियोें ने चायपान पर प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की। आईआईटी स्नातक 58 वर्षीय पार्रिकर का मोदी के साथ अच्छा तालमेल है और वह अपनी ईमानदारी और प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। सुरेश प्रभु की ख्याति एक कुशल प्रशासक के रूप में है और वाजपेयी सरकार में बिजली मंत्री के रूप में वह सुधारों के लिए जाने गए। लेकिन तब शिवसेना ने उन्हें अचानक मंत्रिपरिषद से वापस ले लिया। इसके बाद से ही वह शिवसेना में सक्रि य नहीं रहे। मंत्रिपरिषद में दत्तात्रेय को शामिल कर नवगठित तेलंगाना राज्य को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। राजीव प्रताप रूडी के लिए यह सरकार में वापसी है। इससे पहले वह वाजपेयी सरकार में मंत्री थे। पहली बार सांसद बने महेश शर्मा के चयन को आश्र्चय के रूप में देखा जा रहा है जिन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।
2. एफआइआइ पर घटे शेयर बाजारों की अधिक निर्भरता:- एचडीएफसी समूह के चेयरमैन दीपक पारेख ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआइआइ) पर भारतीय शेयर बाजारों की जरूरत से अधिक निर्भरता पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक इस पद्धति में बदलाव के लिए कुछ किए जाने की जरूरत है। आइएसबी की ओर से यहां सप्ताहांत में आयोजित एक सम्मेलन में पारेख ने कहा कि एफआइआइ पर जरूरत से अधिक निर्भरता है। लगता है कि हमने अपने पूंजी बाजार का निर्यात कर दिया है। यह सही नहीं है। पारेख ने इस दौरान बड़ा सवाल उठाया कि आखिर हमारे बेहतर ढंग से विनियमित शेयर बाजारों से वास्तव में कौन फायदा उठा रहा है? वे भारतीय नहीं हैं न ही हमारे संस्थान हैं। ये देश के श्रमिक भी नहीं है, बल्कि एफआइआइ हैं। बोफा-एमएल के ज्योतिवर्धन जयपुरिया के मुताबिक, इस साल जून में सेंसेक्स की कंपनियों में एफआइआइ की हिस्सेदारी 27 फीसद से ऊपर चली गई, जबकि बीएसई-200 सूचकांक की कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी 24.5 फीसद रही। खास बात यह है कि एचडीएफसी बैंक भी उनमें शामिल है जहां एफआइआइ की हिस्सेदारी बहुत अधिक है। जिन कंपनियों में एफआइआइ की हिस्सेदारी अनुमत सीमा के स्तर पर पहुंच गई है, उनमें एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आइडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, ल्यूपिन, मारुति और टाइटन शामिल हैं। पारेख ने चेताया कि सभी जानते हैं कि एफआइआइ का निवेश कितना अस्थिर होता है। वे बाजार में कभी भी आते-जाते रहते हैं और यह आवाजाही भेड़ चाल जैसी होती है। मुक्त बाजार के मुखर समर्थक पारेख ने राजकोषीय घाटा पाटने के लिए विनिवेश का इस्तेमाल एक औजार के तौर पर करने की सरकार की नीति की आलोचना की।
3. विरोध दरकिनार कर होगा भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन:- संप्रग के कार्यकाल में बने बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का स्पष्ट कहना है कि सरकार इस कानून में प्रस्तावित बदलावों पर आम राय बनाने की कोशिश करेगी। आम सहमति न बनने की सूरत में भी सरकार इसे संशोधित करने को कदम उठाएगी। सरकार टैक्स नीति को भी वाजिब और तर्कसंगत बनाएगी ताकि देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाया जा सके। इंडिया ग्लोबल फोरम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने यहां कहा, ‘कुछ बदलाव जरूरी होंगे (भूमि कानून में)। पहले तो आम सहमति बनाने की कोशिश होगी और अगर यह संभव नहीं हुआ तो आगे कदम बढ़ाकर फैसला करेंगे।’ राज्यों से आईं शिकायतें बता दें कि कई राज्यों ने भूमि अधिग्रहण कानून को लेकर खुलकर शिकायतें की हैं। राज्यों का कहना है कि इससे ढांचागत परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करने में दिक्कत आ रही है। जेटली ने कहा कि भारत में स्मार्ट शहरों की संकल्पना को लागू करने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून संबंधी बाधाओं को दूर किया जाएगा। जेटली ने बजट में स्मार्ट शहरों की खातिर चालू वित्त वर्ष के लिए 7,060 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। कई बदलावों का सुझाव ग्रामीण विकास मंत्रलय ने भूमि अधिग्रहण कानून में कई बदलावों का सुझाव दिया है। इससे कानून के कई प्रावधानों का असर कम होगा। जो बदलाव होने हैं, उनमें पीपीपी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण होने पर 70 प्रतिशत स्थानीय लोगों की मंजूरी और निजी परियोजनाओं के लिए 80 प्रतिशत मंजूरी लेने संबंधी प्रावधान में संशोधन करना है। इन बदलावों में सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन भी शामिल है। इस प्रावधान को लेकर राज्यों का कहना है कि उनको औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करने में विलंब होता है। माना जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक में प्रस्तावित बदलावों से सिर्फ अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान होगी जबकि मुआवजे संबंधी प्रावधानों को यथावत रखा जाएगा। कर नीति होगी आसान सरकार देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के लिए कर नीति भी सरल और सुगम रखेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है। लिहाजा वाजिब और तर्कसंगत नीति की जरूरत है। कर नीति करदाताओं पर अति आक्रामक नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारत एक उच्च कर वाला देश नहीं है। फिलहाल आयकर विभाग का सिद्धांत यह है कि जो कर दे सकते हैं वे कर दें और जो नहीं दे सकते हैं उन्हें इसके लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए। सरकार की सबसे बड़ी चुनौती मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में है। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए भारत को मैन्यूफैक्चरिंग का हब बनाने की जरूरत है। बीमा बिल होगा पारित जेटली ने उम्मीद जताई कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में बीमा विधेयक पारित हो जाएगा। इसके बाद बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 26 फीसद से बढ़कर 49 फीसद हो जाएगी।
4. चिनफिंग ने खारिज की हांगकांग के प्रदर्शनकारियों की मांग:- चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पहली बार हांगकांग के संकटग्रस्त चीफ एग्जीक्यूटिव ल्यूंग चुन यिंग का समर्थन किया। साथ ही उन्हें हटाने की लोकतंत्र समर्थकों की मांग को नामंजूर कर दिया। पिछले एक महीने से प्रदर्शनकारियों से जूझ रहे ल्यूंग ने रविवार को यहां एशिया प्रशांत सहयोग सम्मेलन सेइतर शी से मुलाकात की। शी सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं। उन्होंने हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शनों में प्रत्यक्ष दखल दिए बिना कानून और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ल्यूंग व उनकी सरकार का समर्थन किया। यह पहली बार है कि जब चीनी नेतृत्व ने शीर्ष स्तर पर ल्यूंग का समर्थन किया है। एक माह से हांगकांग में प्रदर्शनकारी ल्यूंग के इस्तीफे और 2017 में होने वाले चुनाव में सार्वभौमिक मताधिकार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शहर के 72 लाख लोगों के बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए चुनाव प्रक्रिया में सुधार होना चाहिए। ल्यूंग के साथ बैठक में शी ने बताया कि बेहतर शासन के लिए चीन ने एक अहम खाका स्वीकार किया है, जिसमें ‘एक देश, दो प्रणाली’ का क्रियान्वयन शामिल है।
5. गॉड पार्टिकल की खोज पर सवाल:- गॉड पार्टिकल की खोज पर सवालिया निशान लग गया है। एक नए शोध के अनुसार पिछले साल नाभिकीय अनुसंधान के यूरोपीय संगठन (सर्न) ने जिस प्रसिद्ध गॉड पार्टिकल की खोज की थी दरअसल यह वो कण है ही नहीं। हालांकि कई गणितीय गणनाओं के जरिए पिछले साल स्विटजरलैंड में हुए सर्न के प्रयोग में मिला कण ¨हग्स बोसोन ही माना गया है। फिर भी सर्न प्रयोग पर नए विश्लेषण में अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि सर्न के प्रयोग से इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं कि पिछले साल खोजा गया कण दरअसल हिग्स बोसोन (गॉड पार्टिकल) ही है। इस प्रयोग में इस बात के सबूत जरूर मिले कि खोज में मिला कण ‘टेक्नी हिग्स’ कण है लेकिन ये गॉड पार्टिकल नहीं है। बोसोन कण (गॉड पार्टिकल) स्टैंडर्ड मॉडल सिद्धांत का अब तक नहीं पहचाना गया हिस्सा है। ये सिद्धांत प्रकृति की चार शक्तियों (गुरुत्व, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स, क्षीण परमाणु शक्ति और शक्तिशाली परमाणु शक्ति) में से तीन शक्तियों की व्याख्या करता है। लेकिन इस सिद्धांत से डार्क मैटर का पता नहीं चलता। जबकि समूचे ब्रrांड का अधिकांश भाग इस डार्क मैटर से ही बना है। सदर्न डेनमार्क यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर मैड्स टाउडल फ्रैंडसन के अनुसार सर्न के प्रयोग से मिले आंकड़ों को आमतौर पर बोसोन कण माना गया था। ये भी सच है कि इस प्रयोग में मिले तथ्य बोसोन कण के तथ्यों का विश्लेषण करते हैं। लेकिन सर्न से मिले ये आंकड़े तो अन्य कणों के विश्लेषण में भी पाए जा सकते हैं। लिहाजा, ये अब तक पुख्ता नहीं हो सका है कि ये बोसोन कण को खोजने वाले आंकड़े ही हैं। हालांकि सर्न प्रयोग के ताजा विश्लेषण में तथ्यों को बोसोन कण होने की संभावना से पूरी तरह नकारा भी नहीं गया है। फ्रैंडसन ने बताया कि मौजूदा आंकड़े ये तय करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि ये कौन सा कण है। ये कई अन्य कणों में से एक हो सकता है। सर्न प्रयोग के नए विश्लेषण में ये भी कहा गया है कि ये हिग्स कण न होकर टेक्नी हिग्स कण हो सकता है। टेक्नी हिग्स कण की खूबियां बहुत हद तक हिग्स जैसी ही हैं। सर्न जैसे किसी प्रयोग के दौरान हिग्स और टेक्नी हिग्स के बीच में संशय संभव है। ये दोनों ही कण ब्रrांड के निर्माण के दो अलग-अलग सिद्धांतों को समझने के लिए बताए गए दो अलग-अलग कण हैं। टेक्नी हिग्स कण ब्रrांड की संरचना का प्रारंभिक कण नहीं है। लेकिन इसमें कई ऐसी खूबियां है जो कि प्रारंभिक कणों में पाई जाती हैं। ये शोध जरनल फिजिक्स रीव्यू में प्रकाशित हुआ है।
6. नेपाल में जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू:- जलवायु परिवर्तन पर रविवार को यहां एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें भारत सहित अन्य देशों के 200 से ज्यादा वैज्ञानिक नीति निर्माता, सरकारी अधिकारी और सांसद शिरकत कर रहे हैं। हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र के लिए समग्र समाधान तलाशने के मकसद के साथ ‘माउंटेन पीपुल एडेप्टिंग टू चेंज’ पर चार दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। एकीकृत अंतरराष्ट्रीय माउंटेन विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) के महानिदेशक डेविड मोल्डन ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा, जलवायु परिवर्तन की अत्यंत तीव दर की वजह से पर्वतीय क्षेत्र के लोग बदलावों का सामना कर रहे हैं। ग्लेशियर, पारिस्थितिकी तंत्र और जीविका पर इससे असर पड़ा है। उन्होंने कहा, स्पष्ट तौर पर पर्वत नियंतण्र संसाधन है और हिंदुकुश हिमालय में करीब 6000 क्यूबिक किलोमीटर पानी है। इस रेंज को तीसरा धुव या एशिया का वाटर टावर भी कहा जाता है। दो साल तक समूची धरती को यह पानी दे सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह काठमांडो में आयोजित होने वाले आगामी दक्षेस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन एजेंडा तथा भविष्य में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। भारत सहित अन्य देशों के 200 से ज्यादा वैज्ञानिक नीति निर्माता, सरकारी अधिकारी और सां सद शिरकत कर रहे हैं
7. अग्नि-2 मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण:- भारत ने परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मध्यम दूरी की मिसाइल अग्नि-2 का रविवार को सफलतापूर्वक प्रायोगिक परीक्षण किया। 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक की मारक क्षमता रखने वाली इस मिसाइल का यह परीक्षण ओडिशा के तट से परे स्थित व्हीलर द्वीप से सेना के प्रायोगिक परीक्षण के तहत किया गया। रक्षा अधिकारियों ने कहा-‘‘सतह से सतह पर मार सकने वाली मिसाइल का प्रायोगिक परीक्षण सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज के लांच कॉम्पलेक्स-4 से गतिमान प्रक्षेपक के जरिए किया गया।’’ इस प्रायोगिक परीक्षण को पूरी तरह सफल बताते हुए आईटीआर के निदेशक एमवीकेवी प्रसाद ने कहा-‘‘यह सेना द्वारा किया गया एक प्रायोगिक परीक्षण था।’’ अधिकारियों ने कहा कि अग्नि-2 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (आईआरबीएम) को सेवाओं में पहले ही शामिल किया जा चुका है और रविवार का परीक्षण सेना के विशेष तौर पर गठित रणनीतिक बल कमान द्वारा किया गया है। यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा उपलब्ध करवाए गए साजोसामान के साथ किए जाने वाले प्रशिक्षण अभ्यास का हिस्सा है। डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक ने कहा-‘‘पूरे परीक्षण के परिपथ पर परिष्कृत रडारों, टेलीमीट्री ऑब्जव्रेशन स्टेशनों, विद्युत-प्रकाशीय यंत्रों एवं प्रभाव बिंदु के पास समुद्र में तैनात किए गए नौवहन पोतों के जरिए नजर रखी गई।’’द्विचरणीय अग्नि-2 मिसाइल 20 मीटर लंबी है और ठोस प्रणोदकों से संचालित होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसका वजन 17 टन है और 2000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक यह 1000 किलोग्राम की सामग्री ले जा सकती है। अग्नि-2 मिसाइल का विकास एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेट्री (एएसएल) ने किया और इसे समाकलित करने का काम हैदराबाद की भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने किया। अग्नि-2 डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों का हिस्सा है, जिसमें अग्नि-1 (700 किमी), अग्नि-3 (3000 किमी), अग्नि-4 (4000 किमी) और अग्नि-5 (5000 किमी से अधिक) शामिल हैं। 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक की मिसाइल की मारक क्षमता
8. वाई फाई से लैस देश का पहला कस्बा होगा केरल का त्रिकारीपुर:- देश में जारी संचार क्रांति से कदमताल करते हुए केरल का त्रिकारीपुर नया इतिहास रचने जा रहा है। त्रिकारीपुर वाई-फाई से लैस देश का पहला कस्बा होगा। कस्बे की कुल 42 हजार आबादी में से 20 फीसद लोग सोमवार से मुफ्त इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेंगे। बाकी लोगों को भी अगले तीन महीने में यह सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। त्रिकारीपुर ग्राम पंचायत के अध्यक्ष एजीसी बशीर ने रविवार को बताया कि कस्बे में वाई फाई सुविधा सोमवार से शुरू की जा रही है। शुरुआत में दो किमी के इलाके में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा होगी, अगले तीन महीने में इसे पूरे कस्बे में फैलाया जाएगा। मेरे ख्याल से त्रिकारीपुर देश की पहली ग्राम परिषद है, जहां मुफ्त में इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। केरल के इतिहास में त्रिकारीपुर का खास महत्व है। 1940 में यहीं कम्युनिस्ट नेतृत्व में पहला किसान विद्रोह हुआ था, जिसके बाद ब्रिटिश शासन ने चार युवकों को फांसी पर चढ़ा दिया था। तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ माकपा नेता ईके नयनार ने दो बार त्रिकारीपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया था।कन्नूर, आइएएनएस : देश में जारी संचार क्रांति से कदमताल करते हुए केरल का त्रिकारीपुर नया इतिहास रचने जा रहा है। त्रिकारीपुर वाई-फाई से लैस देश का पहला कस्बा होगा। कस्बे की कुल 42 हजार आबादी में से 20 फीसद लोग सोमवार से मुफ्त इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेंगे। बाकी लोगों को भी अगले तीन महीने में यह सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी।
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