भारत ने सतह से हवा में मार करने वाली स्वदेशी 'आकाश' मिसाइल का सफल परीक्षण किया-
भारतीय वायु सेना ने प्रायोगिक परीक्षण के तहत सतह से हवा में मार करने वाले स्वदेशी 'आकाश' मिसाइल का ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण क्षेत्र (आईटीआर) के प्रक्षेपण परिसर-3 से दोपहर 15 बजकर 18 मिनट पर 17 नवंबर 2014 को सफल परीक्षण किया.
‘आकाश’ सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल है. यह 25 किलोमीटर के दायरे में लक्ष्य को निशाना बना सकती है तथा अपने साथ 60 किलोग्राम तक के वजन का हथियार ले जाने में सक्षम है. यह मिसाइल 30 किलोमीटर की दूरी तक किसी विमान को निशाना बना सकती है तथा यह एक ऐसी बैटरी से युक्त है जो एक साथ कई निशाने साधकर उन पर हमला कर सकती है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इस मिसाइल को विकसित किया है तथा यह इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा है.
मिसाइल ‘आकाश’ से संबधित मुख्य तथ्य-
‘आकाश’ का विकास भारत में हुआ है और यह सभी मौसम में सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की (एसएएम) मिसाइल है. यह बहु दिशा और बहु लक्ष्य क्षेत्र रक्षा प्रदान करती है. मिसाइल को एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) के तहत विकसित किया गया है.
एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) के तहत वर्ष 1983 से 2007 के मध्य नाग, अग्नि, त्रिशूल मिसाइल और पृथ्वी बैलिस्टिक मिसाइल सहित मिसाइलों की एक श्रृंखला विकसित की गई.
• इसकी मारक क्षमता 30 किलोमीटर तक है और इस रेंज में एक विमान को निशाना बनाने की क्षमता है.
• यह अपने साथ 50 किलोग्राम परमाणु सामग्री ले जाने में सक्षम है.
• इसमें एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और हमला करने के लिए एक बैटरी भी है. प्रत्येक आकाश बैटरी में चार 3डी निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैन्ड एरे (पेसा) रडार है.
• इसमें 12 मिसाइलों के साथ चार स्वचालित लांचर शामिल हैं जो आपस में जुड़े है.
• इसमें बैटरी स्तर रडार, राजेंद्र रडार भी है और एक बैटरी नियंत्रण केंद्र है. इसी के साथ वह रास्ते में आने वाले कई लक्ष्यों का पता लगाकर उन्हें भी भेद सकती है.
• मिसाइल में आत्म विनाशकारी उपकरण भी लगा है.
• इसमें लड़ाकू जेट, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह में मार करने वाली मिसाइलों को निष्प्रभावी बनाने की क्षमता है.
• इस मिसाइल की तुलना रक्षा विशेषज्ञों ने सतह से हवा में मार करने वाली अमेरिकी एमआईएम-104 पैट्रिएट मिसाइल से की है.
मध्य दूरी की सतह से हवा में मिसाइल प्रणाली की विशेषताएं-
इस प्रणाली में एक लांचर, एक मिसाइल, एक नियंत्रण केंद्र, एक अभिन्न मिशन मार्गदर्शन प्रणाली, एक बहु कार्यात्मक अग्नि नियंत्रण रडार, एक हथियार और विस्फोट तंत्र प्रणाली, एक डिजिटल ऑटो पायलट, सी4आई (कमांड, कंट्रोल संचार और खुफिया) केन्द्र और जमीनी समर्थित उपकरण की सुविधाएं है.
समूह नियंत्रण केंद्र (जीसीसी) एसएएम (सैम) प्रणाली के कमान और नियंत्रण मुख्यालय के रूप में कार्य करता है.
भारतीय वायु सेना ने प्रायोगिक परीक्षण के तहत सतह से हवा में मार करने वाले स्वदेशी 'आकाश' मिसाइल का ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण क्षेत्र (आईटीआर) के प्रक्षेपण परिसर-3 से दोपहर 15 बजकर 18 मिनट पर 17 नवंबर 2014 को सफल परीक्षण किया.
‘आकाश’ सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल है. यह 25 किलोमीटर के दायरे में लक्ष्य को निशाना बना सकती है तथा अपने साथ 60 किलोग्राम तक के वजन का हथियार ले जाने में सक्षम है. यह मिसाइल 30 किलोमीटर की दूरी तक किसी विमान को निशाना बना सकती है तथा यह एक ऐसी बैटरी से युक्त है जो एक साथ कई निशाने साधकर उन पर हमला कर सकती है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इस मिसाइल को विकसित किया है तथा यह इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा है.
मिसाइल ‘आकाश’ से संबधित मुख्य तथ्य-
‘आकाश’ का विकास भारत में हुआ है और यह सभी मौसम में सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की (एसएएम) मिसाइल है. यह बहु दिशा और बहु लक्ष्य क्षेत्र रक्षा प्रदान करती है. मिसाइल को एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) के तहत विकसित किया गया है.
एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) के तहत वर्ष 1983 से 2007 के मध्य नाग, अग्नि, त्रिशूल मिसाइल और पृथ्वी बैलिस्टिक मिसाइल सहित मिसाइलों की एक श्रृंखला विकसित की गई.
• इसकी मारक क्षमता 30 किलोमीटर तक है और इस रेंज में एक विमान को निशाना बनाने की क्षमता है.
• यह अपने साथ 50 किलोग्राम परमाणु सामग्री ले जाने में सक्षम है.
• इसमें एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और हमला करने के लिए एक बैटरी भी है. प्रत्येक आकाश बैटरी में चार 3डी निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैन्ड एरे (पेसा) रडार है.
• इसमें 12 मिसाइलों के साथ चार स्वचालित लांचर शामिल हैं जो आपस में जुड़े है.
• इसमें बैटरी स्तर रडार, राजेंद्र रडार भी है और एक बैटरी नियंत्रण केंद्र है. इसी के साथ वह रास्ते में आने वाले कई लक्ष्यों का पता लगाकर उन्हें भी भेद सकती है.
• मिसाइल में आत्म विनाशकारी उपकरण भी लगा है.
• इसमें लड़ाकू जेट, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह में मार करने वाली मिसाइलों को निष्प्रभावी बनाने की क्षमता है.
• इस मिसाइल की तुलना रक्षा विशेषज्ञों ने सतह से हवा में मार करने वाली अमेरिकी एमआईएम-104 पैट्रिएट मिसाइल से की है.
मध्य दूरी की सतह से हवा में मिसाइल प्रणाली की विशेषताएं-
इस प्रणाली में एक लांचर, एक मिसाइल, एक नियंत्रण केंद्र, एक अभिन्न मिशन मार्गदर्शन प्रणाली, एक बहु कार्यात्मक अग्नि नियंत्रण रडार, एक हथियार और विस्फोट तंत्र प्रणाली, एक डिजिटल ऑटो पायलट, सी4आई (कमांड, कंट्रोल संचार और खुफिया) केन्द्र और जमीनी समर्थित उपकरण की सुविधाएं है.
समूह नियंत्रण केंद्र (जीसीसी) एसएएम (सैम) प्रणाली के कमान और नियंत्रण मुख्यालय के रूप में कार्य करता है.
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