14 November 2014(Friday)
1.डब्ल्यूटीओ में भारत को बड़ी सफलता : खाद्य सुरक्षा पर गतिरोध खत्म:- खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर भारत को बड़ी सफलता मिली है। खाद्यान्न के सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे पर भारत व अमेरिका के बीच सहमति बन गई है। इसके साथ ही विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार सुगमता करार (टीएफए) के कार्यान्वयन को लेकर बना गतिरोध दूर हो गया है। समझौते से भारतीय किसानों के हित प्रभावित नहीं होंगे। दोनों देशों के बीच ‘शांति उपबंध’ को कायम रखने पर सहमति बनी है। भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को बिना किसी अड़चन के जारी रखने की दृष्टि से यह उपबंध अति महत्वपूर्ण है। भारत व अमेरिका में यह सहमति बन गई है कि खाद्य सुरक्षा भंडारण के मुद्दे का स्थायी समाधान होने तक ‘शांति उपबंध’ अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। ‘शांति उपबंध’ के तहत भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को उचित समाधान निकलने तक डब्ल्यूटीओ में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इससे पहले बाली समझौते में सदस्य देशों को दूसरे डब्ल्यूटीओ समझौतों के तहत चुनौती दिए जाने से बचने के लिए सुरक्षा 2017 तक दी गई थी। इस सहमति के बाद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने यहां संवाददताओं से कहा कि भारत व अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण के मुद्दों पर मतभेदों को हल करने में सफलता हासिल की है। उन्होेंने कहा, ‘इससे डब्ल्यूटीओ में गतिरोध दूर होगा और व्यापार सुगमता करार के कार्यान्वयन का रास्ता खुल सकेगा।’ सफल द्विपक्षीय वार्ता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सितम्बर की अमेरिका यात्रा को देते हुए सीतारमण ने कहा, ‘मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद भारत के रुख को लेकर समझ बेहतर हुई है।’उधर वाशिंगटन में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि माइकल फ्रोमैन ने कहा कि अब बाली पैकेज आगे बढ़ सकेगा। भारत द्वारा खाद्य सुरक्षा का मुद्दा उठाए जाने के बाद यह जुलाई में ठहर गया था। डब्ल्यूटीओ के दो महत्वपूर्ण सदस्यों के बीच सहमति बनने के बाद डब्ल्यूटीओ का निर्णय लेने वाला शीर्ष निकाय साधारण परिषद दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में दोनों देशों के प्रस्ताव की समीक्षा करेगी। सीतारमण ने उम्मीद जताई कि परिषद भारत द्वारा व्यापार संधि के कार्यान्वयन के लिए प्रोटोकॉल पर दस्तखत का रास्ता साफ करेगी। सीतारमण ने कहा, ‘भारत ने कभी भी व्यापार सुगमता में बाधा नहीं डाली। हम सिर्फ अपने किसानों के हितों का संरक्षण चाहते हैं।’ वाणिज्य मंत्री ने कहा कि डब्ल्यूटीओ की आम परिषद को भारत का प्रस्ताव मिलेगा और अमेरिका हमारा समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद भारत के रुख को लेकर समझ बेहतर हो पाई। सीतारमण ने कई बार ट्विट कर कहा, ‘भारत बहुपक्षीय व्यापारिक पण्राली का मजबूत समर्थक है और हम इसे और मजबूत करने को प्रतिबद्ध हैं। बाली करार परिपूर्ण नहीं था। हमने यह मुद्दा उठाया था। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मतभेदों को दूर कर लिया गया है। सीतारमण ने एक बयान में कहा, ‘भारत बहुपक्षीय व्यापार पण्राली का बड़ा समर्थक है और वह इसे मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिका ने जताई खु शी वाशिंगटन (भाषा)। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में खाद्य सुरक्षा से जुड़े विवादित मुद्दे पर भारत के साथ सहमति बनने पर खुशी जाहिर करते हुए अमेरिका ने कहा कि अब उसे नियंतण्र व्यापार को बढ़ाने के लिए बाली पैकेज पर पूरी तरह अमल की उम्मीद है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि माइकल फ्रोमैन ने कहा कि हमें खुशी है कि अमेरिका व भारत ने बृहस्पतिवार को जिस सहमति की घोषणा की है उससे डब्ल्यूटीओ के व्यापार सुगमता करार के पूर्ण कार्यान्वयन का रास्ता खुल गया है।
2. पूर्वी एशियाई शिखर बैठक में बोले मोदी : धर्म और आतंकवाद के संबंध को खारिज करे विश्व समुदाय:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व समुदाय से धर्म और आतंकवाद के बीच कोई संबंध जोड़े जाने को खारिज करने और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ संघर्ष में ‘वास्तविक अंतरराष्ट्रीय’ साझेदारी बनाए जाने की बृहस्पतिवार को जोरदार वकालत की। पूर्वी एशिया शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुनिश्चित किए जाने पर भी बल दिया कि साइबर और अंतरिक्ष संपर्क तथा समृद्धि का स्रेत बने रहें और यह संघर्ष के नए युद्ध क्षेत्र नहीं बनने पाएं। यहां म्यांमार की राजधानी में एक दिवसीय पूर्वी एशियाई शिखर बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग समेत 18 देशों के नेता भाग ले रहे हैं। मोदी ने कहा, हम इस्लामिक स्टेट के संबंध में पूर्वी एशिया शिखर घोषणापत्र का समर्थन करते हैं। उसी के साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के लिए सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की जरूरत है। जो कोई भी मानवता में विास रखता है, उसे साथ आना चाहिए। हमें धर्म और आतंकवाद के बीच कोई संबंध जोड़े जाने को भी खारिज करना चाहिए। उन्होंने इसके साथ ही कहा, आतंकवाद और चरमपंथ की चुनौतियों में इजाफा हुआ है। मादक पदार्थो की तस्करी, हथियार तस्करी तथा काले धन को सफेद में बदलने के बीच घनिष्ठ संबंध है। मोदी ने वर्ष 2015 में आसियान समुदाय सृजित करने के लक्ष्य के लिए भारत की ओर से शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने इसके साथ ही कहा, आसियान की सफलता एशिया प्रशांत क्षेत्र में व्यापक एकीकरण के लिए प्रेरणादायी है। मोदी ने कहा, छह महीने पहले कार्यभार संभालने के बाद से मेरी सरकार ‘पूर्व की ओर देखो नीति’ को ‘एक्ट ईस्ट पालिसी’ में बदलने की दिशा में प्राथमिकता के आधार पर तेजी से आगे बढ़ी है। द ईस्ट एशिया समिट इस नीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है। मोदी ने कहा, पिछले आठ शिखर सम्मेलनों के बाद हमने कई क्षेत्रों में प्रगति की है। आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ संघर्ष में ‘वास्तविक अंतरराष्ट्रीय’ साझेदारी की वकालत की ‘द. चीन सागर में नियंतण्र नियमों का पालन जरूरी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े कई जटिल एवं अनसुलझे सवालों की मौजूदगी पर खेद जताते हुए दक्षिणी चीन सागर में नियंतण्र नियमों और कानूनों का पालन करने की जरूरत पर जोर दिया है। चीन सागर में चीन का कई दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के साथ विवाद है। मोदी ने कहा- क्षेत्र के सभी पक्षों के बीच समझ एवं विास का माहौल समृद्ध करने के लिए अनवरत वार्ता जरूरी है। उन्होंने कहा, आपसी निर्भरता एवं वैश्वीकरण की इस दुनिया में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों के पालन के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह समुद्री सुरक्षा पर भी लागू होता है। भारतीय प्रधानमंत्री ने किसी देश का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनकी टिप्पणियों को चीन पर साधे गए निशाने के रूप में देखा जा सकता है। चीन का जापान, वियतनाम और फिलिपींस समेत कई पड़ोसी मुल्कों से समुद्री सीमा विवाद है। मोदी ने कहा, इसमें वर्ष 1982 का ‘यूएन कन्वेंशन ऑन लॉ ऑफ द सी’ भी शामिल है, जो कि विवादों को शांतिपूर्वक हल करने का आधार होना चाहिए।
1.डब्ल्यूटीओ में भारत को बड़ी सफलता : खाद्य सुरक्षा पर गतिरोध खत्म:- खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर भारत को बड़ी सफलता मिली है। खाद्यान्न के सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे पर भारत व अमेरिका के बीच सहमति बन गई है। इसके साथ ही विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार सुगमता करार (टीएफए) के कार्यान्वयन को लेकर बना गतिरोध दूर हो गया है। समझौते से भारतीय किसानों के हित प्रभावित नहीं होंगे। दोनों देशों के बीच ‘शांति उपबंध’ को कायम रखने पर सहमति बनी है। भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को बिना किसी अड़चन के जारी रखने की दृष्टि से यह उपबंध अति महत्वपूर्ण है। भारत व अमेरिका में यह सहमति बन गई है कि खाद्य सुरक्षा भंडारण के मुद्दे का स्थायी समाधान होने तक ‘शांति उपबंध’ अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। ‘शांति उपबंध’ के तहत भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को उचित समाधान निकलने तक डब्ल्यूटीओ में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इससे पहले बाली समझौते में सदस्य देशों को दूसरे डब्ल्यूटीओ समझौतों के तहत चुनौती दिए जाने से बचने के लिए सुरक्षा 2017 तक दी गई थी। इस सहमति के बाद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने यहां संवाददताओं से कहा कि भारत व अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण के मुद्दों पर मतभेदों को हल करने में सफलता हासिल की है। उन्होेंने कहा, ‘इससे डब्ल्यूटीओ में गतिरोध दूर होगा और व्यापार सुगमता करार के कार्यान्वयन का रास्ता खुल सकेगा।’ सफल द्विपक्षीय वार्ता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सितम्बर की अमेरिका यात्रा को देते हुए सीतारमण ने कहा, ‘मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद भारत के रुख को लेकर समझ बेहतर हुई है।’उधर वाशिंगटन में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि माइकल फ्रोमैन ने कहा कि अब बाली पैकेज आगे बढ़ सकेगा। भारत द्वारा खाद्य सुरक्षा का मुद्दा उठाए जाने के बाद यह जुलाई में ठहर गया था। डब्ल्यूटीओ के दो महत्वपूर्ण सदस्यों के बीच सहमति बनने के बाद डब्ल्यूटीओ का निर्णय लेने वाला शीर्ष निकाय साधारण परिषद दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में दोनों देशों के प्रस्ताव की समीक्षा करेगी। सीतारमण ने उम्मीद जताई कि परिषद भारत द्वारा व्यापार संधि के कार्यान्वयन के लिए प्रोटोकॉल पर दस्तखत का रास्ता साफ करेगी। सीतारमण ने कहा, ‘भारत ने कभी भी व्यापार सुगमता में बाधा नहीं डाली। हम सिर्फ अपने किसानों के हितों का संरक्षण चाहते हैं।’ वाणिज्य मंत्री ने कहा कि डब्ल्यूटीओ की आम परिषद को भारत का प्रस्ताव मिलेगा और अमेरिका हमारा समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद भारत के रुख को लेकर समझ बेहतर हो पाई। सीतारमण ने कई बार ट्विट कर कहा, ‘भारत बहुपक्षीय व्यापारिक पण्राली का मजबूत समर्थक है और हम इसे और मजबूत करने को प्रतिबद्ध हैं। बाली करार परिपूर्ण नहीं था। हमने यह मुद्दा उठाया था। हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मतभेदों को दूर कर लिया गया है। सीतारमण ने एक बयान में कहा, ‘भारत बहुपक्षीय व्यापार पण्राली का बड़ा समर्थक है और वह इसे मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिका ने जताई खु शी वाशिंगटन (भाषा)। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में खाद्य सुरक्षा से जुड़े विवादित मुद्दे पर भारत के साथ सहमति बनने पर खुशी जाहिर करते हुए अमेरिका ने कहा कि अब उसे नियंतण्र व्यापार को बढ़ाने के लिए बाली पैकेज पर पूरी तरह अमल की उम्मीद है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि माइकल फ्रोमैन ने कहा कि हमें खुशी है कि अमेरिका व भारत ने बृहस्पतिवार को जिस सहमति की घोषणा की है उससे डब्ल्यूटीओ के व्यापार सुगमता करार के पूर्ण कार्यान्वयन का रास्ता खुल गया है।
2. पूर्वी एशियाई शिखर बैठक में बोले मोदी : धर्म और आतंकवाद के संबंध को खारिज करे विश्व समुदाय:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व समुदाय से धर्म और आतंकवाद के बीच कोई संबंध जोड़े जाने को खारिज करने और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ संघर्ष में ‘वास्तविक अंतरराष्ट्रीय’ साझेदारी बनाए जाने की बृहस्पतिवार को जोरदार वकालत की। पूर्वी एशिया शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुनिश्चित किए जाने पर भी बल दिया कि साइबर और अंतरिक्ष संपर्क तथा समृद्धि का स्रेत बने रहें और यह संघर्ष के नए युद्ध क्षेत्र नहीं बनने पाएं। यहां म्यांमार की राजधानी में एक दिवसीय पूर्वी एशियाई शिखर बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग समेत 18 देशों के नेता भाग ले रहे हैं। मोदी ने कहा, हम इस्लामिक स्टेट के संबंध में पूर्वी एशिया शिखर घोषणापत्र का समर्थन करते हैं। उसी के साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के लिए सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की जरूरत है। जो कोई भी मानवता में विास रखता है, उसे साथ आना चाहिए। हमें धर्म और आतंकवाद के बीच कोई संबंध जोड़े जाने को भी खारिज करना चाहिए। उन्होंने इसके साथ ही कहा, आतंकवाद और चरमपंथ की चुनौतियों में इजाफा हुआ है। मादक पदार्थो की तस्करी, हथियार तस्करी तथा काले धन को सफेद में बदलने के बीच घनिष्ठ संबंध है। मोदी ने वर्ष 2015 में आसियान समुदाय सृजित करने के लक्ष्य के लिए भारत की ओर से शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने इसके साथ ही कहा, आसियान की सफलता एशिया प्रशांत क्षेत्र में व्यापक एकीकरण के लिए प्रेरणादायी है। मोदी ने कहा, छह महीने पहले कार्यभार संभालने के बाद से मेरी सरकार ‘पूर्व की ओर देखो नीति’ को ‘एक्ट ईस्ट पालिसी’ में बदलने की दिशा में प्राथमिकता के आधार पर तेजी से आगे बढ़ी है। द ईस्ट एशिया समिट इस नीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है। मोदी ने कहा, पिछले आठ शिखर सम्मेलनों के बाद हमने कई क्षेत्रों में प्रगति की है। आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ संघर्ष में ‘वास्तविक अंतरराष्ट्रीय’ साझेदारी की वकालत की ‘द. चीन सागर में नियंतण्र नियमों का पालन जरूरी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े कई जटिल एवं अनसुलझे सवालों की मौजूदगी पर खेद जताते हुए दक्षिणी चीन सागर में नियंतण्र नियमों और कानूनों का पालन करने की जरूरत पर जोर दिया है। चीन सागर में चीन का कई दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के साथ विवाद है। मोदी ने कहा- क्षेत्र के सभी पक्षों के बीच समझ एवं विास का माहौल समृद्ध करने के लिए अनवरत वार्ता जरूरी है। उन्होंने कहा, आपसी निर्भरता एवं वैश्वीकरण की इस दुनिया में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों के पालन के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह समुद्री सुरक्षा पर भी लागू होता है। भारतीय प्रधानमंत्री ने किसी देश का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनकी टिप्पणियों को चीन पर साधे गए निशाने के रूप में देखा जा सकता है। चीन का जापान, वियतनाम और फिलिपींस समेत कई पड़ोसी मुल्कों से समुद्री सीमा विवाद है। मोदी ने कहा, इसमें वर्ष 1982 का ‘यूएन कन्वेंशन ऑन लॉ ऑफ द सी’ भी शामिल है, जो कि विवादों को शांतिपूर्वक हल करने का आधार होना चाहिए।
3.भुगतान बैंक के लिए आवेदन इसी माह:- रिजर्व बैंक छोटे और भुगतान बैंकों की स्थापना के लिए मानदंड तय करने के बाद इस महीने के आखिर तक आवेदन आमंत्रित करेगा। ये बैंक छोटे कारोबारियों और निम्न आयवर्ग के परिवारों की जरूरतें पूरी करेंगे। रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इसके साथ ही केन्द्रीय बैंक अपनी नकदी प्रबंधन पण्राली को भी बेहतर बनाने की योजना बना रहा है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के समारोह में सूक्ष्म वित्तीय इकाइयों को संबोधित करते हुए राजन ने यह भी कहा कि अपनी जरूरतों के लिए छोटा मोटा ऋण लेने वालों की मनमानी ब्याज दरों से सुरक्षा की जानी चाहिए। रिजर्व बैंक गवर्नर ने विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा बार-बार कर्जमाफी योजनाएं लाए जाने पर अपने ऐतराज को दोहराया। उन्होंने कहा कि इससे कर्ज के उचित मूल्य निर्धारण पर असर पड़ता है और परिणामस्वरूप ऋण बाजार में गड़बड़ी पैदा होती है। राजन ने कहा, ‘ग्राहकों की सुरक्षा के लिए सूक्ष्म वित्त ऋणदाताओं द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दरों की उचित अधिकतम सीमा तय की जानी चाहिए।’ तत्कालीन अविभाजित आंध्र प्रदेश में अक्तूबर 2010 में उपजे संकट के कारण सूक्ष्म वित्त क्षेत्र की स्थिति काफी बिगड़ गई थी। इसके बाद आरबीआई द्वारा गठित मालेगाम समिति ने इस क्षेत्र के लिए 26 प्रतिशत ब्याज दर सीमा तय करने का सुझाव दिया था। केंद्रीय बैंक ने अप्रैल 2012 में इस सीमा को अधिसूचित किया था। आंध्र प्रदेश सरकार ने उस समय कर्ज लेने वालों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं होने के बाद सूक्ष्म वित्त संस्थाओं द्वारा बलपूर्वक ऋण वसूली पर प्रतिबंध लगा दिया था। विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों ही राज्य सरकारों ने पिछले साल आए चक्र वात फेलिन से प्रभावित किसानों का कर्ज माफ किए जाने की घोषणा की। तेलंगाना सरकार ने बट्टे-खाते में डाले गए ऋण की तय 25 प्रतिशत राशि बैंकों को दे दी है जबकि आंध्र प्रदेश सरकार ने अब तक ऐसा नहीं किया। इन दो राज्यों के कृषि क्षेत्र में बैंकों का 1,300 अरब रपए दांव पर लगा है। निम्न आयवर्ग की जरूरतें पूरी करेंगे यह बैंक : राजन बार-बार कर्ज माफी योजनाएं न लाएं राज्य नकदी प्रबंधन पण्राली को बेहतर बनाएगा केंद्रीय बैंक सूक्ष्म वित्त ऋणदाताओं से मिलने वाले कर्ज पर ब्याज की अधिकतम सीमा तय हो
4.बच्चों में कुपोषण से जीडीपी को तीन फीसद का नुकसान:- विश्व बैंक की एक रपट के अनुसार दो साल तक के बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक भोजन नहीं मिलने के कारण भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को हर साल 2-3 प्रतिशत का नुकसान होता है। विश्व बैंक की रपट ‘भारत में पोषण’ में यह निष्कर्ष निकाला है। इसके अनुसार कुपोषण का प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान काफी अधिक है। प्रत्यक्ष उत्पादकता नुकसान आजीवन व्यक्तिगत आय के 10 प्रतिशत से अधिक आंका गया है जबकि इससे जीडीपी को होने वाला नुकसान 2 से 3 प्रतिशत है। इसके अनुसार, ‘शुरुआती जीवन में पर्याप्त विकास नहीं होने से मानव पूंजी को दीर्घकालिक व स्थायी नुकसान होता है।’ केवल विटामिन व खनिजों से जुड़ी कमियों के कारण ही भारतीय जीडीपी को 12 अरब डालर से अधिक का नुकसान होता है। इसके अलावा शुरुआती जीवन में पर्याप्त विकास नहीं होने का बच्चों की शिक्षा दिशा व स्वास्थ्य देखभाल पर अधिक खर्च के रूप में अप्रत्यक्ष नुकसान होता है। बच्चे समय पर स्कूल शुरू नहीं कर पाते, उनका कद नहीं बढ पाता तथा वे पढाई में अच्छा प्रदर्शन भी नहीं कर पाते।
5. हिन्दू -सिख शरणार्थियों के लिए नागरिकता मिलना अब आसान:- भारत सरकार ने बृहस्पतिवार को पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिन्दू और सिख शरणार्थियों के लिए कई रियायतों की घोषणा की। इनमें उन्हें भारत की नागरिकता देने में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया गत छूट भी शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2009 के 31 दिसंबर के पहले भारत आए पाकिस्तान व अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता के लिए हाथों हाथ आवेदन स्वीकार करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। नागरिकता पाने के पात्र इन आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन करने में परेशानी हो रही थी। वे अब अपने पासपोर्ट के साथ खुद जिलाधिकारी या उपायुक्त कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं। शर्त यह है कि आवेदन करते समय इन आवेदकों का दीर्घकालिक वीजा वैध हो।
6. भारत का कैरेबियाई देश से टैक्स सूचना साङोदारी समझौता:- विदेशों में जमा काले धन के खिलाफ मुहिम को आगे बढ़ाते हुए भारत ने कैरेबियाई देश सेंट किट्स एंड नेविस से टैक्स सूचना साङोदारी समझौता (टीआइईए) किया है। दो द्वीपों वाले इस देश को विदेशी धन की सुरक्षित पनाहगार के रूप में देखा जाता है। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में स्थाई प्रतिनिधि अशोक कुमार मुखर्जी और भारतीय मिशन में सेंट किट्स एंड नेविस के राजदूत डेलानो फ्रैंक बार्ट ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते का प्रारूप भारत की ओर से अन्य देशों के साथ किए गए टैक्स साङोदारी समझौतों के समान है। इसमें दोनों देशों द्वारा लगाए जाने वाले करों से संबंधित सूचनाएं साझा करने का प्रावधान है। समझौते के तहत दोनों देश घरेलू टैक्स कानूनों के तहत आकलन, टैक्स दावे और मुकदमे संबंधी प्रशासकीय सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे। इसमें बैंकिंग संबंधी जानकारी और कंपनियों के स्वामित्व संबंधी सूचनाएं भी शामिल हैं। कैरेबियाई क्षेत्र के कई द्वीपीय देश टैक्स हैवन देशों में शामिल हैं। हालांकि अब इनमें कई देशों के साथ भारत का टैक्स सूचना साङोदारी समझौता हो चुका है। इन देशों ने अपनी छवि सुधारने के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार की ओर से गठित एक विशेष जांच दल (एसआइटी) काला धन से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है। इनमें भारतीयों की ओर से विदेशों में जमा किए जाने वाले काले धन के मामले शामिल हैं।
7. सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता को ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन:- ब्रिटेन, फ्रांस और नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता दिए जाने का समर्थन किया है। इसके साथ ही सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के इस शक्तिशाली घटक में लंबे समय से अटके सुधार प्रस्तावों की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई है। बुधवार को महासभा सत्र में उपस्थित देशों ने परिषद में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलाव पर जोर दिया। ‘उचित प्रतिनिधित्व और सुरक्षा परिषद की सदस्यता का विस्तार’ विषय पर चर्चा शुरू करते हुए महासभा के अध्यक्ष सैम कुटेसा ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार उनकी प्राथमिकता में है। भारत ने सुरक्षा परिषद के मौजूदा स्वरूप को ‘गंभीर रूप से अक्षम अंग’ बताते हुए अगले साल तक सुधार की जरूरत पर बल दिया है। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने सुरक्षा परिषद के मौजूदा स्वरूप की खामियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपनी गैर प्रतिनिधित्व प्रकृति के कारण अपने सामथ्र्य के क्षेत्रों में भी यह शक्तिशाली ईकाई विश्वसनीयता हासिल नहीं कर सकी है। संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत मार्क लायल ग्रांट ने कहा कि उनकी सरकार जर्मनी, ब्राजील, भारत और जापान की स्थायी सदस्यता और स्थायी अफ्रीकी प्रतिनिधित्व का समर्थन करती है। साथ ही हम परिषद के अस्थायी सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी चाहते हैं। फ्रांस और नेपाल के प्रतिनिधियों ने भी ब्रिटेन के रुख से समर्थन जताया।
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