सोमवार, 10 नवंबर 2014

11 November 2014(Tuesday)

11 November 2014(Tuesday)
1.गुजरात अनिवार्य मतदान वाला पहला राज्य बना:- निकाय चुनाव में अनिवार्य मतदान का प्रावधान करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य बन गया है। राज्यपाल ओपी कोहली द्वारा गुजरात स्थानीय प्रशासन कानून (संशोधन) विधेयक, 2011 को गत सप्ताह मंजूरी देने के साथ ही अब निकाय चुनाव नए कानून के तहत होंगे। दरअसल, गुजरात सरकार ने वर्ष 2009 में गुजरात स्थानीय प्रशासन कानून सुधार विधेयक पारित कर तत्का लीन राज्यपाल डॉ कमला बेनीवाल के पास मंजूरी के लिए भेजा था। अप्रैल, 2010 में कमला बेनीवाल ने कुछ सुझावों के साथ विधेयक को लौटा दिया था। उन्होंने महिला आरक्षण पर तो सहमति जताई, लेकिन नागरिकों पर अनिवार्य मतदान थोपने को संविधान विरोधी करार दिया था। केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद गुजरात के राज्यपाल बने ओम प्रकाश कोहली ने करीब चार साल से लंबित अनिवार्य मतदान और महिला आरक्षण के प्रावधान वाले विधेयक को मंजूरी दे दी। विधानसभा सचिव डी एम पटेल ने इसकी पुष्टि की है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से फिलहाल इसकी विधिवत घोषणा नहीं की गई है। मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अनिवार्य मतदान कानून को लेकर जनता में जागरुकता पैदा करने का आह्वान किया, ताकि जनविरोध का सामना न करना पड़े। नेता नहीं एक राय भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक विजय रुपाणी ने विधेयक की मंजूरी को लोकतांत्रिक प्रणाली में सुधार का अहम पड़ाव बताया और कहा कि इससे प्रजातंत्र मजबूत होगा। उनके मुताबिक इससे लोगों की चुनाव में भागीदारी बढ़ेगी और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा। कांग्रेस विधायक शक्ति सिंह गोहिल ने अनिवार्य मतदान के प्रावधान को मूल अधिकारों का हनन बताया है।
2. चीन-जापान में क्षेत्रीय विवाद समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम: पहली बार मिले शी और अबे:- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने अपना अपना पदभार संभालने के बाद से पहली बार एक-दूसरे से मुलाकात की, जो क्षेत्रीय विवादों और वर्षो के तनावपूर्ण संबंधों के बाद एक बड़ी राजनयिक सफलता है। टेलीविजन पर प्रसारित तस्वीरों में शी यहां बातचीत से पहले ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल में अबे से हाथ मिलाते दिखाई दिए। शी ने कहा, अबे के साथ बैठक से चीन को उम्मीद है कि जापान शांतिपूर्ण विकास के मार्ग का पालन करना जारी रखेगा और दूरदर्शी सैन्य तथा सुरक्षा नीतियां अपनाएगा। उन्होंने कहा, स्थिर एवं स्वस्थ द्विपक्षीय संबंधों के निर्माण के लिए चीन और जापान को समय के प्रगतिशील रूझान का पालन करना चाहिए। चीनी राष्ट्रपति ने जापान से आग्रह किया कि वह और अधिक चीजें करें जो जापान और इसके पड़ोसी देशों के बीच पारस्परिक विास को मजबूत करने में मदद करें और क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता की रक्षा करने में सकारात्मक भूमिका निभाए। उन्होंने कहा, चीन सरकार ने जापान के साथ अपने संबंधों को हमेशा महत्व दिया है और चीन-जपान संबंधों को चीन और जापान के बीच चार राजनीतिक दस्तावेजों के आधार पर आगे ले जाने का समर्थन किया है। अबे ने कहा, जापान शांतिपूर्ण विकास का मार्ग जारी रखने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्तमान जापानी प्रशासन इतिहास के मुद्दे पर पूर्व की सरकारों की भांति ही समान रुख रखेगा। जापानी प्रधानमंत्री ने कहा, उनका देश चीन और जापान के बीच हुए चार सूत्री समझौते को उचित तरह से क्रि यान्वित करने की इच्छा रखता है और जापान तथा चीन के बीच रणनीतिक एवं पारस्परिक लाभ के संबंधों के सुधार तथा विकास को बढ़ावा देने के लिए इसे एक नया आरंभिक बिन्दु बनाना चाहता है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार अबे ने शी से कहा, चीन का शांतिपूर्ण विकास जापान और दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। अबे सोमवार से शुरू हुए दो दिवसीय एशिया प्रशांत सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में भाग लेने रविवार को पेइचिंग पहुंचे थे। दोनों देशों के बीच दो साल से अधिक समय से कोई उच्चस्तरीय बैठक नहीं हुई थी। सोमवार को दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात से दो दिन पहले यहां दोनों देशों के विदेशमंत्रियों के बीच एक चार सूत्री समझौते पर पहुंचने के लिए बैठक हुई थी। स्थिर द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के हित में है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी संबंधों को मजबूती प्रदान करना चाहता है शी जिनपिंग (चीनी राष्ट्रपति) चीन का शांतिपूर्ण विकास जापान के लिए एक अवसर है शिंजो अबे (जापानी प्रधानमंत्री) क्षेत्रीय स्थिरता को मिलेगी मजबूती पेइचिंग में सोमवार को एपेक बैठक से इतर मुलाकात करते जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे (बाएं) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। क्या है विवाद : पूर्वी चीन सागर में स्थित एक वीरान द्वीप को लेकर विवाद तब खड़ा हुआ जब जापान ने इसे एक निजी पक्ष से खरीद लिया। जापान द्वीप पर अपना दावा करते हुए इसे ’सेंकाकूज’ कहता है, वहीं चीन इस पर अपना दावा करते हुए इसे ‘दिआओयुस’ कहता है। द्वीप पर तेल एवं प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है।
3. परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान में कई मतभेद, समझौते के आसार कम:- ईरान और अमेरिका ने परमाणु कार्यक्र म के मुद्दे पर सोमवार को ओमान में लगातार दूसरे दिन बातचीत की। दोनों देशों के बीच कई मतभेद हैं जिससे अंतिम समझौता होने के आसार कम नजर आ रहे हैं। दोनों देशों पर 24 नवम्बर की समयसीमा की तलवार लटक रही है और इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी एवं ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ अपने देशों की प्रतिस्पर्धी मांगें सामने रख रहे हैं पर इनमें कामयाबी के कोई संकेत नहीं मिल रहे। मस्कट में दोनों नेताओं की मुलाकात के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, इस मुद्दे पर अब भी बड़े मतभेद हैं कि पश्चिमी देशों को किस तरह ऐसे सटीक आश्वासन मिले जिससे ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। इस बीच, ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर दबाव है कि वह अंतिम समझौते के तहत अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटवाने में कामयाबी हासिल करे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल जल्द से जल्द इस पर फैसला चाहता है। लेकिन, इस बाबत ओबामा का कहना है कि यदि तेहरान अपनी जिम्मेदारियां पूरी करता है तो प्रतिबंध धीरे-धीरे कम किए जा सकते हैं। ओबामा ने सीबीएस न्यूज को बताया, हो सकता है कि हम वहां पहुंचने में कामयाब न हों। केरी और जरीफ की बातचीत सुबह 11:30 बजे से पहले बहाल हुई। पहले सिर्फ एक दिन की बातचीत का कार्यक्र म निर्धारित किया गया था। माना जा रहा है कि वार्ता का मुख्य बिंदु यह है कि प्रतिबंधों में राहत दिए जाने और परमाणु संयंत्रों के कड़े निरीक्षण के बदले ईरान को कितने और किस प्रकार के यूरेनियम संवर्धन सेंट्रीफ्यूज के परिचालन की अनुमति दी जाए।
4. ऑस्ट्रेलिया से परमाणु करार पर प्रगति सही दिशा में : भारत:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा से पहले भारत ने सोमवार को कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक परमाणु करार के वास्तविक क्रि यान्वयन से जुड़े ‘प्रशासनिक बंदोबस्तों’ पर बातचीत में अच्छी प्रगति हो रही है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट की भारत यात्रा के दौरान छह सितम्बर को दोनों देशों के बीच हुआ समझौता भारत के परमाणु संयंत्रों के लिए यूरेनियम की आपूत्तर्ि की मंजूरी देगा। मोदी 16 नवम्बर को ब्रिस्बेन में जी-20 देशों की शिखर वार्ता के समापन के बाद ऑस्ट्रेलिया का तीन दिनी द्विपक्षीय दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) अनिल वाधवा ने बताया कहा कि कैनबरा में एबट से मोदी की मुलाकात के बाद दोनों देश चार से पांच समझौतों और सहमति पत्रों पर दस्तखत कर सकते हैं। यह समझौते सजायाफ्ता कैदियों के स्थानांतरण, नारकोटिक्स कारोबार से लड़ने में सहयोग, सामाजिक सुरक्षा, पर्यटन और संस्कृति से जुड़े हो सकते हैं। भारत-ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु करार को लागू करने पर प्रगति के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में वाधवा ने कहा, प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर काम सही तरीके से चल रहा है। इसमें अच्छी प्रगति हुई है। ऑस्ट्रेलिया में दुनिया के यूरेनियम भंडार का करीब 40 प्रतिशत है और वह हर साल करीब 7,000 टन यूरेनियम का निर्यात करता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2012 में यूरेनियम की बिक्री के लिए बातचीत शुरू की थी। मोदी कल म्यांमा के लिए रवाना होंगे जहां वह आसियान-भारत शिखरवार्ता और पूर्व एशिया शिखरवार्ता में भाग लेंगे। अपने तीन देशों के 10 दिवसीय दौरे के दूसरे चरण में वह ऑस्ट्रेलिया जाएंगे। वह फिजी यात्रा पर भी जाएंगे। मोदी ऑस्ट्रेलिया की यात्रा के दौरान वहां के कारोबारियों को संबोधित कर सकते हैं। उस देश में भारतीय मूल के करीब 4,50,000 लोग रहते हैं।
5. चेन्नई के पास बनेगी सर्न जैसी प्रयोगशाला:- ब्रrांड के मौलिक कणों के गुणों के अध्ययन की भारत की महत्वपूर्ण परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी का इंतजार है। 15 सौ करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत तमिलनाडु के मदुरै में जमीन से करीब सवा किलोमीटर अंदर प्रयोगशाला बनाकर अध्ययन किया जाएगा। यह हिग्स बोसोन (गॉड पार्टिकल्स) की खोज के लिए स्विट्जरलैंड में बनी सर्न जैसी होगी। परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन इस परियोजना में थेनी जिले में मदुरै के निकट पोट्टिपुरम में जमीन में 1300 मीटर (सवा किमी) अंदर भूमिगत प्रयोगशाला में ब्रrांडीय कणों के गुणों का अध्ययन किया जाएगा। न्यूटिनो के आकार-प्रकार का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाएगा। मोंडल ने बताया कि परियोजना पहले स्थल चयन व पर्यावरणीय मंजूरी के लिए अटकी रही। कुल मिलाकर इसमें सात-आठ साल की देरी हो चुकी है। आइएनओ परियोजना में देश के 30 से ज्यादा शोध संस्थान सहभागी हैं। इनमें इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज चेन्नई, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च मुंबई, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई, साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स कोलकाता, इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च कलपक्कम, हरिशचंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट इलाहाबाद तथा कुछ आइआइटी भी इसमें समन्वय कर रहे है। भारत में स्थित न्यूटिनो वेधशाला (आइएनओ) कण भौतिकी में शोध के लिए निर्मित विान परियोजना है। इसका उद्देश्य ब्रrांडीय न्यूटिनो का अध्ययन करना है। सर्न के बाद बड़ा प्रयोग : पिछले साल स्विट्जरलैंड में नाभिकीय अनुसंधान के यूरोपीय संगठन (सर्न) द्वारा हिग्स बोसोन (गॉड पार्टिकल) की खोज के लिए किए गए प्रयोग के बाद यह दूसरा ब़़डा प्रोजेक्ट है। हालांकि सर्न के प्रयोग में खोजे गए हिग्स बोसोन को गॉड पार्टिकल मानने पर मतभेद उभर रहे हैं।
6. अब कड़े कायदे कानून में काम करेंगी एनबीएफसी:- बार-बार सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के आदेशों को ताक पर रख कर काम करने वाली देश के सैकड़ों गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए हालात बदल गए हैं। आम जनता से जमा राशि स्वीकार करने वाली एनबीएफसी (एनबीएफसी-डी) हों या गैर जमा वाली एनबीएफसी, इन्हें अपने कामकाज में पूरी तरह से पारदर्शिता लानी होगी। साथ ही फंसे कर्जे (एनपीए) और निदेशकों की नियुक्ति के मामले में भी बेहद कठोर नियमों का पालन करना होगा। आरबीआइ ने सोमवार को सभी तरह की एनबीएफसी के नियमन को लेकर नए दिशानिर्देश लागू कर दिए हैं। एनबीएफसी की प्रमोटर कंपनियों के लिए भी यह दिशानिर्देश एक चेतावनी है। इसके तहत पहली बार यह व्यवस्था की जा रही है कि एनबीएफसी समूह की सभी कंपनियों को एक साथ देखा जाएगा। इससे एनबीएफसी चलाने वाली कंपनी की अन्य सभी सहयोगी फर्मो की निगरानी भी ज्यादा सतर्कता से की जाएगी। एनबीएफसी-डी के लिए सबसे ज्यादा कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं। इन्हें हर वर्ष अपने कारोबार से संबंधित कई तरह की जानकारियां आरबीआइ को देनी होंगी। उन्हें दूसरी नियामक एजेंसियों से ली गई स्वीकृतियां, कामकाज में कोताही पर लगे आर्थिक या अन्य दंड, सहयोगी कंपनियों के बारे में जानकारी, एनपीए में हो रहे बदलाव की सूचना भी हर साल विस्तार से देनी होगी। इसके साथ ही किसी को भी डायरेक्टर बनाने की परंपरा भी एनबीएफसी को छोड़नी होगी। किस तरह के निदेशक नियुक्त किए जा सकते हैं, इसको लेकर नए दिशानिर्देश लागू किए गए हैं। नियुक्त होने वाले हर निदेशक को भी अपनी तरफ से यह घोषणा पत्र आरबीआइ को देना होगी। इससे दो फायदे होंगे। एक तो अपनी मर्जी से लोगों को बोर्ड में शामिल कर गलत काम करने की संभावना घटेगी। दूसरे, जो निदेशक बनेंगे उन पर गलत काम नहीं करने का दबाव बनेगा। उक्त सारे नियम अप्रैल, 2015 से लागू होंगे। जबकि फंसे कर्जे संबंधी नियम लागू करने के लिए मार्च, 2018 तक का समय दिया गया है।
7. भारत के मंगलयान की होड़ में चीन लाया अपना मार्स रोवर:- भारत के मंगल अभियान की बराबरी की होड़ में चीन ने लाल ग्रह पर अपना मार्स रोवर भेजने की घोषणा कर दी है। यह रोवर मंगल की सतह पर पानी और जीवन की तलाश करेगा। चीन इसका परीक्षण तिब्बत के मैदान में करने की योजना बना रहा है। चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कारपोरेशन (सीएएससी) ने एक प्रदर्शनी के दौरान एक मशीन और इसके तकनीकी सेट-अप को पेश किया। जुआई की वार्षिक अंतरिक्ष प्रदर्शनी के दौरान रोवर के प्रोटोटाइप की तस्वीरों को पेश किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में भारत सहित सभी देश हिस्सा लेंगे। मार्स रोवर का डिजाइन चीन द्वारा चांद पर भेजे गए रोवर युतु और जेड रेबिट के जैसा ही होगा। लेकिन मंगल के वायुमंडल का समाना करने के लिए इसमें कुछ हल्के बदलाव किए गए हैं। ‘साउथ चाइना मार्निग पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्स रोवर के ऊपर काले रंग का बड़ा एंटीना लगाया गया है ताकि सूचनाओं व जानकारियों को लंबी दूरी के बावजूद आसानी से भेजा जा सके। रोवर के पहियों को भी ज्यादा मजबूत बनाया गया है ताकि वह मंगल की सतह पर मौजूद छोटी पहाड़ियों को आसानी से पार कर सके। सीएएससी के बयान के मुताबिक, मंगल ग्रह अन्वेषण प्रणाली में एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल होंगे। यह मिशन चंद्र अभियान से कहीं अधिक मंहगा होगा जिसके लिए सरकार को धन और संसाधन जुटाने होंगे। चांद वर्ष 2020 तक चांद पर मनुष्य भेजने और तीन क्षुद्रग्रहों पर अंतरिक्षयान भेजने की योजना बना रहा है। आशंका है कि ये तीनों क्षुद्रग्रह धरती से टकरा सकते हैं।
8. केदारनाथ सिंह ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित:- राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मशहूर हिंदी कवि केदारनाथ सिंह को भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए सोमवार को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने कहा, ‘केदारनाथ सिंह ने अपनी कविताओं के माध्यम से हमें अनुप्रास एवं काव्यात्मक गीत की दुर्लभ संगति दी है और उन्होंने वास्तविकता एवं गल्प को समानता के साथ समाहित किया है। उनकी कविताओं से अर्थ, रंग एवं स्वीकार्यता झलकती है।’ मुखर्जी ने कहा, ‘अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी कवि न केवल आधुनिक कला सौंदर्य के प्रति संवेदनशील हैं, बल्कि पारंपरिक ग्रामीण समुदायों के प्रति भी उनकी संवेदना झलकती है।’ केदारनाथ सिंह एक सम्मानित शिक्षक भी हैं, जिन्होंने जवाहर लाल नेहरू विविद्यालय में अध्यापन कार्य किया है। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी इच्छा है कि नई पीढ़ी भारतीय क्लासिक में गहराई तक उतरे। सिंह को संसद के पुस्तकालय भवन स्थित बालयोगी प्रेक्षागृह में 49वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘इससे न केवल नैतिक मानदंडों को ठीक करने में मदद मिलेगी बल्कि राष्ट्र निर्माण में हमारे प्रयासों में शानदार योगदान रहेगा।’ ज्ञानपीठ पुरस्कार की स्थापना समाजसेवी दंपति साहू शांति प्रसाद जैन और दिवंगत रमा जैन ने की थी। भारतीय साहित्य में भारतीय लेखकों के योगदान के महत्व को देखते हुए यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

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