19 November 2014(Wednesday)
1.भारत-आस्ट्रेलिया: मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनी:- रक्षा संबंधों को मजबूती प्रदान करने की इच्छा के साथ भारत और आस्ट्रेलिया ने मंगलवार को एक सुरक्षा सहयोग तंत्र स्थापित किया। साथ ही अगले साल के अंत तक बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते को संपन्न करने का फैसला किया। इसके साथ ही दोनों देशों ने असैन्य परमाणु करार जल्द ही संपन्न करने का फैसला किया। इससे यूरेनियम कारोबार को मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उनके आस्ट्रेलियाई समकक्ष टोनी एबोट ने बातचीत की और सुरक्षा सहयोग संबंधी तंत्र की स्थापना का फैसला किया जो क्षेत्रीय शांति बढ़ाने और आतंकवाद से निपटने समेत अन्य चुनौतियां से निपटने की दिशा में आगे बढ़ने एवं सुरक्षा और रक्षा सहयोग के गहरा और विस्तारित होने का परिचायक है। एबोट की पहली भारत यात्रा के बस दो महीने बाद ही यहां प्रधानमंत्री कार्यालय में शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए जो सामाजिक सुरक्षा, सजायाफ्ता कैदियों को भेजने, मादक पदार्थो की तस्करी से निपटने, पर्यटन, कला तथा संस्कृति से संबंधित हैं। मोदी ने एबोट के साथ एक साझा संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह स्वाभाविक साझेदारी है जो हमारे साझा मूल्यों और हितों और हमारी रणनीतिक नौवहन स्थितियों से उपजी है। दोनों नेताओं के बीच वार्ता से कई घंटे पहले सुरक्षा तंत्र को अंतिम रूप दिया जा चुका था। इसके तहत व्यापक कार्य योजना में प्रधानमंत्री स्तर की वार्षिक शिखर वार्ता और नौवहन सैन्य अभ्यास को प्रमुखता से शामिल किए जाने के साथ ही आतंकवाद रोधी सहयोग, सीमा नियंतण्रतथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों पर करीबी विचार विमर्श को भी जगह दी गयी है। आस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कैनबरा से तस्मानिया के लिए रवाना हो जाने के बाद ही इस तंत्र की स्थापना की पुष्टि की गई। मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच असैन्य परमाणु समझौते को जल्द संपन्न कराने पर भी सहमति बनी जिससे आस्ट्रेलिया को विश्व के सर्वाधिक सुरक्षित परमाणु ऊर्जा कार्यक्र मों में से एक में भागीदारी करने का मौका मिलेगा। मोदी और एबट के बीच दिल्ली में शिखर वार्ता हुई थी जिसके दौरान भारत और आस्ट्रेलिया ने असैन्य परमाणु करार को मंजूरी दी थी। मोदी ने सांसदों से कहा, लेकिन हम इसे हल्के में नहीं ले सकते। इसे संरक्षित रखना क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण काम होगा। अपने सुरक्षा सहयोग को बढ़ाकर तथा क्षेत्र में अपनी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को गहरा कर भारत और आस्ट्रेलिया इसमें अपनी भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में आर्थिक माहौल बदल चुका है। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि अवसरों को ठोस परिणामों में बदलना काफी आसान होगा। उन्होंने यह भी एलान किया कि भारत वर्ष 2015 में आस्ट्रेलिया में ‘मेक इन इंडिया’ जबकि आस्ट्रेलिया अगले साल जनवरी में भारत में बिजनेस वीक का आयोजन करेगा। आस्ट्रेलिया का भारत के साथ दोतरफा कारोबार सालाना 15 अरब डॉलर का है जबकि चीन के साथ आस्ट्रेलिया का कारोबार 150 अरब डॉलर का है। मोदी ने कहा, देशों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि बाहरी अंतरिक्ष तथा साइबर स्पेस संघर्ष के नए मोर्चे बनने के बजाय संपर्क और समृद्धि का जरिया बने रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि दोनों देश पाइरेसी तथा सुरक्षा से संबंधित अन्य व्यापक मुद्दों से निपटने के लिए एक साथ काम कर सकते हैं। दोनों देशों में पांच करार सामाजिक सुरक्षा, सजायाफ्ता कैदियों की अदला बदली, नशीली दवाओं के व्यापार पर रोक, पर्यटन और कला एवं संस्कृति से जुड़े कुल पांच समझौते हुए
1.भारत-आस्ट्रेलिया: मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनी:- रक्षा संबंधों को मजबूती प्रदान करने की इच्छा के साथ भारत और आस्ट्रेलिया ने मंगलवार को एक सुरक्षा सहयोग तंत्र स्थापित किया। साथ ही अगले साल के अंत तक बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते को संपन्न करने का फैसला किया। इसके साथ ही दोनों देशों ने असैन्य परमाणु करार जल्द ही संपन्न करने का फैसला किया। इससे यूरेनियम कारोबार को मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उनके आस्ट्रेलियाई समकक्ष टोनी एबोट ने बातचीत की और सुरक्षा सहयोग संबंधी तंत्र की स्थापना का फैसला किया जो क्षेत्रीय शांति बढ़ाने और आतंकवाद से निपटने समेत अन्य चुनौतियां से निपटने की दिशा में आगे बढ़ने एवं सुरक्षा और रक्षा सहयोग के गहरा और विस्तारित होने का परिचायक है। एबोट की पहली भारत यात्रा के बस दो महीने बाद ही यहां प्रधानमंत्री कार्यालय में शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए जो सामाजिक सुरक्षा, सजायाफ्ता कैदियों को भेजने, मादक पदार्थो की तस्करी से निपटने, पर्यटन, कला तथा संस्कृति से संबंधित हैं। मोदी ने एबोट के साथ एक साझा संवाददाता सम्मेलन में कहा, यह स्वाभाविक साझेदारी है जो हमारे साझा मूल्यों और हितों और हमारी रणनीतिक नौवहन स्थितियों से उपजी है। दोनों नेताओं के बीच वार्ता से कई घंटे पहले सुरक्षा तंत्र को अंतिम रूप दिया जा चुका था। इसके तहत व्यापक कार्य योजना में प्रधानमंत्री स्तर की वार्षिक शिखर वार्ता और नौवहन सैन्य अभ्यास को प्रमुखता से शामिल किए जाने के साथ ही आतंकवाद रोधी सहयोग, सीमा नियंतण्रतथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों पर करीबी विचार विमर्श को भी जगह दी गयी है। आस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कैनबरा से तस्मानिया के लिए रवाना हो जाने के बाद ही इस तंत्र की स्थापना की पुष्टि की गई। मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच असैन्य परमाणु समझौते को जल्द संपन्न कराने पर भी सहमति बनी जिससे आस्ट्रेलिया को विश्व के सर्वाधिक सुरक्षित परमाणु ऊर्जा कार्यक्र मों में से एक में भागीदारी करने का मौका मिलेगा। मोदी और एबट के बीच दिल्ली में शिखर वार्ता हुई थी जिसके दौरान भारत और आस्ट्रेलिया ने असैन्य परमाणु करार को मंजूरी दी थी। मोदी ने सांसदों से कहा, लेकिन हम इसे हल्के में नहीं ले सकते। इसे संरक्षित रखना क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण काम होगा। अपने सुरक्षा सहयोग को बढ़ाकर तथा क्षेत्र में अपनी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को गहरा कर भारत और आस्ट्रेलिया इसमें अपनी भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में आर्थिक माहौल बदल चुका है। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि अवसरों को ठोस परिणामों में बदलना काफी आसान होगा। उन्होंने यह भी एलान किया कि भारत वर्ष 2015 में आस्ट्रेलिया में ‘मेक इन इंडिया’ जबकि आस्ट्रेलिया अगले साल जनवरी में भारत में बिजनेस वीक का आयोजन करेगा। आस्ट्रेलिया का भारत के साथ दोतरफा कारोबार सालाना 15 अरब डॉलर का है जबकि चीन के साथ आस्ट्रेलिया का कारोबार 150 अरब डॉलर का है। मोदी ने कहा, देशों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि बाहरी अंतरिक्ष तथा साइबर स्पेस संघर्ष के नए मोर्चे बनने के बजाय संपर्क और समृद्धि का जरिया बने रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि दोनों देश पाइरेसी तथा सुरक्षा से संबंधित अन्य व्यापक मुद्दों से निपटने के लिए एक साथ काम कर सकते हैं। दोनों देशों में पांच करार सामाजिक सुरक्षा, सजायाफ्ता कैदियों की अदला बदली, नशीली दवाओं के व्यापार पर रोक, पर्यटन और कला एवं संस्कृति से जुड़े कुल पांच समझौते हुए
2. भारत को यूरेनियम आपूर्ति शीघ्र : एबोट:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत से यूरेनियम आपूत्तर्ि संबंधी समझौता शीघ्र करने के आग्रह पर आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट ने मंगलवार को घोषणा की कि वह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को यूरेनियम की आपूत्तर्ि का इच्छुक है। मोदी ने कहा, दोनों देश असैन्य परमाणु करार को जल्द से जल्द पूरा करें जिससे आस्ट्रेलिया इस क्षेत्र में भारत का भागीदार बन सके। दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद विभिन्न क्षेत्रों में पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए जो सामाजिक सुरक्षा, कैदियों की अदला-बदली, मादक पदार्थो के व्यापार पर लगाम लगाने तथा पर्यटन, कला एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आस्ट्रेलिया और भारत के संबंध रणनीतिक भागीदारी और साझा मूल्यों पर आधारित स्वाभाविक साझेदारी है। उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच कृषि, कृषि प्रसंस्करण, ऊर्जा, वित्त, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग के अपार अवसर हैं। एबोट ने कहा कि आस्ट्रेलिया, भारत के साथ ऊर्जा, सुरक्षा के अलावा इंटेलिजेंस, सैन्य सहयोग, आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग और द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास में सहयोग करने को इच्छुक है। आस्ट्रेलिया के पास विश्व के यूरेनियम भंडार का 40 फीसद है। वह सालाना करीब सात हजार टन येलो केक या यूरेनियम का निर्यात करता है। भारत और आस्ट्रेलिया ने वर्ष 2012 के शुरुआत में यूरेनियम की बिक्री को लेकर बातचीत का सिलसिला शु रू किया था।
3. काले धन पर जी-20 वास्तविक प्रगति में विफल:- आस्ट्रेलिया में जी- 20 शिखर सम्मेलन में वित्तीय पारदर्शिता और धन के अवैध प्रवाह पर वास्तवकि प्रगति नहीं हो पाई। यह दावा काले धन के मुद्दे पर अग्रणी रूप से काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक ‘ग्लोबल फाइनेंशियल इंटीग्रिटी’ (जीएफआई) ने किया है। थिंक टैंक के अध्यक्ष रेमंड बेकर ने कहा कि जी-20 ने गुमनाम कंपनियों पर रोक लगाने और बहुराष्ट्रीय सहयोग के लिए देश से देश को सूचना के जरिए इस नियंतण्र अभिशाप से निपटने का एक स्वर्णिम अवसर गवां दिया। बेकर ने हाल में शिखर सम्मेलन से पहले काले धन के मुद्दे पर जी-20 नेताओं को एक खुले पत्र का सह लेखन किया थ। बेकर ने कहा, गुमनाम कंपनियों द्वारा अवैध वित्तीय प्रवाह, कर पनाहगाहों की गोपनीयता, नकारात्मक आर्थिक वृद्धि से, एक अनुमान के मुताबिक विकासशील और उभरते देशों को हर साल एक खबर डॉलर का नुकसान होता है तथा इससे बड़े पैमाने पर अपराध और भ्रष्टाचार पैदा हो रहा है। एक बयान में कहा गया कि जी-20 शिखर सम्मेलन में अवैध वित्तीय प्रवाह पर रोकथाम के लिए कार्रवाई की रूपरेखा की स्पष्ट कमी रही, जो विश्व में विकास पर सबसे बड़े अवरोधों में से एक है। जीएफआई धन के अवैध प्रवाह की सामान्य विधियों को बाधित करने के लिए लंबे समय से आधारभूत वित्तीय पारदर्शिता कदमों की वकालत करता रहा है। वह खासकर कंपनी स्वामित्व सूचना की सार्वजनिक रजिस्ट्री, देश से देश को सूचना और वित्तीय सूचना के नियंतण्र स्वचालित आदान-प्रदान का समर्थक है। बयान में कहा गया कि हाल के वर्षों में विश्वभर में इन मुद्दों को लेकर आवाज उठी है, लेकिन सप्ताहांत में आए जी-20 के बयानों में इस आंदोलन का लाभ उठाने की इच्छा की कमी रही। जीएफआई के अनुसार कर सूचना के स्वचालित आदान-प्रदान के प्रति जी-20 की कटिबद्धता स्वागतयोग्य, लेकिन अपूर्ण है।
4. भारत में है सबसे बड़ी युवा आबादी:- भारत विश्व में सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। संयुक्तराष्ट्र की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल जनसंख्या के मामले में हालांकि, भारत चीन से पीछे हैं, लेकिन 10 से 24 साल की उम्र के 35.6 करोड़ लोगों के साथ भारत सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश है। चीन 26.9 करोड़ की युवा आबादी के साथ दूसरे स्थान पर है। इस मामले में भारत व चीन के बाद इंडोनेशिया (6.7 करोड़), अमेरिका (6.5 करोड़), पाकिस्तान (5.9 करोड़), नाइजीरिया (5.7 करोड़), ब्राजील (5.1 करोड़) व बांग्लादेश (4.8 करोड़) का स्थान आता है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की दुनिया की आबादी की स्थिति के बारे में रिपोर्ट में यह ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अपनी बड़ी युवा आबादी के साथ विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं नई ऊंचाई पर जा सकती हैं, बशत्रे वह युवा लोगों की शिक्षा व स्वास्थ्य में भारी निवेश करें और उनके अधिकारों का संरक्षण करें। युवा आबादी में 60 करोड़ किशोरियां हैं जिनकी अपनी विशेष जरूरतें, चुनौतियां व भविष्य के लिए आकांशाएं हैं। ‘द पावर ऑफ 1.8 बिलियन’ (1.8 अरब की शक्ति) शीर्षक की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की 28 फीसद आबादी की उम्र 10 से 24 साल है। इसमें कहा गया है कि सबसे निर्धन देशों में युवा जनसंख्या सबसे तेजी से बढ़ रही है। इस समय नियंतण्र स्तर पर युवाओं की जनसंख्या अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर है। संयुक्तराष्ट्र की इस रपट के अनुसार दुनिया में 1.8 अरब आबादी 10 से 24 साल के बीच की है। प्रत्येक 10 में से नौ युवा अल्पविकसित देशों में रहते हैं। संयुक्तराष्ट्र जनसंख्या कोष के कार्यकारी निदेशक बाबातुंडे ओसोटाइमहिम ने कहा, आज 1.8 अरब युवा आबादी का आंकड़ा भविष्य में बदलाव के लिए बड़ा अवसर पेश करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि युवा आबादी से अधिकतम लाभ लेने के लिए देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें रोजगार व आमदनी के अवसर मिलें। रिपोर्ट कहती है कि उचित नीतियों व मानव श्रम में निवेश से ये देश अपनी युवा आबादी को आर्थिक और सामाजिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए सशक्त कर सकते हैं और प्रति व्यक्ति आय बढ़ा सकते हैं।
5. सरकार ने फिर शुरू किया किसान विकास पत्र:- देश में बचत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने मंगलवार को किसान विकास पत्र (केवीपी) को फिर से पेश किया। सरकार ने कहा है कि यह गरीबों को निवेश का विश्वसनीय विकल्प प्रदान करेगा और उन्हें पोंजी योजनाओं से बचाने में मदद करेगा। इस मौके पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘अर्थव्यवस्था में नरमी के कारण पिछले दो-तीन साल में देश की बचत दर 36.8 फीसद के रिकार्ड स्तर से घटकर 30 फीसद से नीचे आ गई है। इसलिए लोगों को और बचत के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है।’ उन्होंने कहा कि किसान विकास पत्र से दो उद्देश्य पूरे होंगे। एक तो इससे भोले-भाले गरीब निवेशकों को अपनी बचतों को पोंजी योजनाओं के बजाय विश्वसनीय सरकारी योजना में लगाने में मदद मिलेगी। दूसरे, बचत को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि पहले चरण में यह एक साधारण प्रकार का ‘धारक बचत प्रमाण पत्र’ होगा जिस पर धारक का नाम नहीं लिखा जाएगा। किसान विकास पत्र 1000, 5,000, 10,000 और 50,000 रपए के मूल्य वर्ग में उपलब्ध होगा जो 100 माह में दोगुना हो जाएगा। किसान विकास पत्र में निवेश की कोई उच्चतम सीमा नहीं है और इसे 30 माह की तय समय सीमा के बाद भुनाया जा सकता है। जेटली ने कहा कि शुरुआत में यह प्रमाणपत्र डाक घरों के जरिए बेचे जाएंगे लेकिन इसे जल्दी ही निवेशकों के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों की नामित शाखाओं के जरिए निवेश के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि बचतकर्ताओं को अपने निवेश पर कोई कर रियायत नहीं मिलेगी।
6. पी नोट्स के जरिए निवेश बढ़ा:- घरेलू पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिए विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का निवेश बढ़कर 2.65 लाख करोड़ रपए यानी 43 अरब डालर पर पहुंच गया है। यह इसका पिछले साढ़े छह साल का उच्च स्तर है। सेबी के आंकड़ों के अनुसरा अक्टूबर में भारतीय बाजारों में पी-नोट्स के जरिए निवेश (शेयर, ऋण पत्र व डेरिवेटिव अनुबंधों) में किया गया निवेश बढ़कर 2,65,675 करोड़ रपए पर पहुंच गया, जो सितम्बर में 2,22,394 करोड़ रपए था। यह फरवरी के बाद पी-नोट्स के जरिए निवेश का सबसे ऊंचा स्तर है। उस समय यह आंकड़ा 3,22,743 करोड़ रपए था। पी-नोट् भारत में पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से विदेशों में जारी किए जाने वाली डेरिवेटिव प्रतिभूति होती है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से उच्च आय वाले व्यक्तियों (एचएनआई) हेज फंड व अन्य विदेशी संस्थानों द्वारा भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश के माध्यम के रूप में किया जाता है।
7. लोकपाल कानून में संशोधन की तैयारी:- केंद्र सरकार लोकपाल व लोकायुक्त कानून और दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन अधिनियम (डीएसपीई) में संशोधन करने की तैयारी में है। इसके जरिये लोकपाल (अध्यक्ष व सदस्य) और सीबीआइ प्रमुख की नियुक्ति के लिए गठित चयन समितियों में कोरम की जरूरत को खत्म किया जाएगा। कार्मिक विभाग द्वारा तैयार संशोधन प्रस्ताव को कानून मंत्रलय ने अंतिम रूप दे दिया है। सूत्रों ने बताया कि दोनों कानूनों में नए प्रावधान जोड़कर यह स्पष्ट कर दिया जाएगा कि कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में संबंधित चयन समितियों की प्रक्रिया अमान्य नहीं होगी। वर्तमान लोकसभा में किसी भी दल को विपक्ष का औपचारिक दर्जा नहीं दिया गया है। गौरतलब है कि सीबीआइ अध्यक्ष रंजीत सिन्हा 2 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
8. खत्म होगी राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना:- संप्रग राज में गांधी परिवार के नाम पर शुरू की गई सरकारी योजनाओं पर अब पर्दा गिरना शुरू हो गया है। सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर शुरू की गई राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) को खत्म किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली कनेक्शन से जोड़ने की संप्रग की इस योजना के स्थान पर मोदी सरकार दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) शुरू करने जा रही है। बिजली मंत्रलय के सूत्रों के मुताबिक डीडीयूजीजेवाई देश के ग्रामीण इलाकों तक न सिर्फ बिजली पहुंचाएगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि हर घर को गुणवत्तापूर्ण बिजली मिले। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत किये जाने वाले काम दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना का एक हिस्सा मात्र होंगे।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें