सोमवार, 10 नवंबर 2014

05 November 2014(Wednesday)

समसामयिकी घटनाचक्र दैनिकी
05 November 2014(Wednesday)
1.सिंगापुर लेटर्स रोगेटरी पर फौरन कार्रवाई करे : भारत:- भारत ने सिंगापुर से मंगलवार को अनुरोध किया कि उसकी जांच एजेंसियों द्वारा भेजे गए न्यायिक अनुरोध पत्रों का जवाब देने की प्रक्रि या तेज की जाए। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इंटरपोल के पूर्ण सत्र से इतर यहां एक बैठक के दौरान सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री तीयो ची हिन को इस बारे में अवगत कराया। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, कानूनी सहयोग के मु्द्दों पर र्चचा के दौरान गृहमंत्री ने कहा, सिंगापुर में लंबित न्यायिक अनुरोध पत्रों पर वरीयता के आधार पर गौर करना चाहिए। भारत ने टाट्रा वाहन खरीद घोटाला और टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला सहित अन्य मामलों के सिलसिले में सिंगापुर को लेटर्स रोगेटरी भेजा है। लेटर्स रोगेटरी अदालत द्वारा भेजा जाने वाला लिखित रूप में एक औपचारिक अनुरोध पत्र होता है। विदेशी अदालत में या न्यायाधीश के समक्ष कार्रवाई लंबित होने पर या किसी विदेशी अदालत के क्षेत्राधिकार में रहने वाले गवाह की गवाही के लिए इसके तहत अनुरोध किया जाता है जिसे वहां इसके निर्देश पर लिया जा सकता है और इसे ऐसा अनुरोध करने वाली अदालत को भेजा जाता है ताकि वह इसका उपयोग लंबित कार्रवाई में कर सके। सुरक्षा एवं पुलिस विषयों, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के क्षेत्र में सिंगापुर से मिलने वाले सहयोग की सराहना करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि भारत में एक विश्वस्तरीय कौशल विकास केंद्र स्थापित करने पर सिंगापुर विचार कर सकता है। सिंह ने इस बात का जिक्र किया कि छह क्षेत्रों में दोनों देशों के संबंध सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। इनमें रणनीतिक साझेदारी, व्यापार एवं निवेश बढ़ाने, हवाई एवं समुद्री संपर्क को तेज करने, कौशल विकास, कूड़ा एवं जल प्रबंधन के साथ शहरी विकास सहित स्मार्ट सिटी, सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंध पर ध्यान दिया जाना शामिल है। गृहमंत्री ने कहा कि सिंगापुर ‘आसियान’ देशों के लिए एक अहम साझेदार और ‘गेटवे’ है तथा भारत इस सिलसिले में उसके द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना करता है। सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने भारत और सिंगापुर के पुलिस अधिकारियों में बेहतर क्षमता निर्माण के लिए शिक्षकों और प्रशिक्षण का आदान प्रदान करने पर जोर दिया। सिन्हा ने इस मुद्दे पर भारत और सिंगापुर द्वारा एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने का भी प्रस्ताव किया। वहीं, सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री ने भारतीय शिष्टमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर अपनी सहमति जताते हुए गृहमंत्री को सिंगापुर की यात्रा का निमंतण्रदिया।
2. परमाणु सुरक्षा के लिए नियंतण्र सहयोग जरूरी : भारत ने आतंकवाद के खतरे से विश्व समुदाय को चेताया:-परमाणु आतंकवाद के खतरे को रेखांकित करते हुए भारत ने परमाणु सुरक्षा बढ़ाने और संवेदनशील परमाणु सामग्रियों को राज्येतर तत्वों के हाथों में जाने से रोकने के लिए प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सरकारों की ओर से जिम्मेदारी भरी कार्रवाई का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अभिषेक सिंह ने कहा, इस बात की व्यापक मान्यता है कि परमाणु आतंकवाद का खतरा आज अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसलिए संवेदनशील परमाणु सामग्री को राज्येतर तत्वों के हाथ में जाने से रोकने के लिए परमाणु सुरक्षा मजबूत करनी जरूरी है और इसके लिए प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं जिम्मेदार राष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की वार्षिक रिपोर्ट पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए एक बयान में सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत ने परमाणु सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय प्रयासों में मदद करने और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में आईएईए की महत्वपूर्ण भूमिका का लगातार समर्थन किया है। सिंह ने कहा, परमाणु सुरक्षा कोष में भारत के ऐच्छिक योगदान के लिए आईएईए के साथ की व्यवस्था के तहत इसके परमाणु सुरक्षा विभाग को सूचना सुरक्षा में भारत की विशेषज्ञता निशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा, परमाणु सामग्री भौतिक सुरक्षा संधि :सीपीपीएनएम: को विश्वव्यापी समर्थन और वर्ष 2005 में इसके संशोधन को जल्दी लागू करने से परमाणु सुरक्षा के क्षेत्र में नियंतण्र प्रयासों को मजबूत करने में बहुत मदद मिलेगी। संशोधित संधि विभिन्न देशों को परमाणु प्रतिष्ठानों एवं सामग्री के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए उनका संरक्षण, संग्रहण एवं परिवहन करने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य करती है। सिंह ने कहा, भारत सीपीपीएनएम में एक पक्षकार है और यह उन देशों में से एक है जिन्होंने संधि के वर्ष 2005 के संशोधन को स्वीकार किया है।
3. अमेरिका में पड़े वोट, ओबामा की परीक्षा:- अमेरिका में 2014 के मध्यावधि चुनावों के लिए मंगलवार को वोट डाले गए। इस चुनाव से रिपब्लिकन पार्टी के अमेरिकी सीनेट पर नियंतण्रमजबूत करने की उम्मीद है। यह चुनाव 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले सत्ता के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। प्रतिनिधिसभा में सभी 435 सीटें, सीनेट की 100 में 36 सीटें और 50 में 36 प्रांतों में गवर्नर चुनावों में काफी कुछ दांव पर लगा हुआ है। वाशिंगटन डीसी की तरह इन प्रांतीय विधानसभाओं, नगर परिषदों के लिए भी चुनाव हो रहे हैं। प्रतिनिधिसभा में पहले से ही नियंतण्ररखने वाले रिपब्लिकन को सीनेट में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सिर्फ छह सीटों की जरूरत है। मध्यावधि चुनाव के राष्ट्रीय प्रभाव होते हैं और इसके नतीजे यह तय करेंगे कि ओबामा अपने कार्यकाल के आखिरी दो साल में क्या कर सकते हैं। कांग्रेस के साथ नहीं देने पर ओबामा की चिंताएं बढ़ सकती हैं क्योंकि वह इबोला और इराक एवं सीरिया में मजबूत होते इस्लामिक स्टेट आतंकवादियों का मुकाबला कर रहे हैं जबकि अर्थव्यवस्था में वृद्धि दिखाने के लिए भी वह मशक्कत कर रहे हैं। तीन दर्जन से अधिक भारतीय मूल के अमेरिकी देश में कई पदों के लिए चुनावी दौड़ में शामिल हैं जिनमें गवर्नर से लेकर सदन तक, प्रांतीय विधानसभा से लेकर नगर परिषद तक शामिल हैं। इस सूची में शीर्ष पर निक्की हेली हैं जो दक्षिण कैरोलिना का गवर्नर पद चाहती हैं और कैलिफोर्निया में प्रतिनिधिसभा के लिए एमी बेरा चुनावी दौड़ में हैं। यह दोनों ही अपना पुनर्निर्वाचन चाहते हैं। यंग रो खन्ना ने भारतीय मूल के अमेरीकियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वह अपने ही डेमोक्रेटिक नेता माइक होंडा को चुनौती पेश कर रहे हैं। भारतीय समुदाय प्रथम हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड के चुने जाने को लेकर भी आशावादी है जो हवाई से फिर से निर्वाचित होना चाहती हैं। ताजा चुनाव सव्रेक्षण यह बताते हैं कि लोग ओबामा प्रशासन से निराश हैं। उनके मुताबिक कई सीटों पर कड़ा मुकाबला हो सकता है। उम्मीदवारों की नजरें छोटे समुदायों पर हैं खासतौर पर एशियाई मूल के अमेरिकी पर। शायद यह पहला मौका है जब उम्मीदवार भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के साथ भी विशेष बैठकें कर रहे हैं और देश में उनके बढ़ते राजनीतिक महत्व को मान्यता दे रहे हैं। उदाहरणस्वरूप, वर्जीनिया से सीनेटर मार्क वार्नर न सिर्फ भारतीय मूल के कई समुदायों के कार्यक्र म में शरीक हो रहे हैं बल्कि उनसे वोट की अपील करते हुए क्रांफ्रेंस फोन कॉल भी कर रहे हैं। ऐसा ही सिलिकन वैली में माइक होंडा का मामला है। वह फिर से चुना जाना चाहते हैं और भारतीय मूल के रो खन्ना उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। लुसियाना प्रांत के गवर्नर एवं भारतीय मूल के बॉबी जिंदल ने अपने समर्थकों को एक ईमेल संदेश में कहा, मेरा मानना है कि चुनावी रात रिपब्लिकन पार्टी और अमेरिका के लिए अच्छी होगी। हालांकि सिर्फ चुनाव जीतना ही काफी नहीं होगा..अपने निर्वाचित अधिकारियों को जवाबदेह बनाना होगा। कोलंबिया जिला परिषद के लिए चुनावी दौड़ में शामिल किशन पुत्ता ने कहा कि यह बड़ा दिन है। यदि वह चुनाव जीतते हैं तो वह अमेरिकी राजधानी के निर्वाचित परिषद में भारतीय मूल के प्रथम अमेरिकी होंगे। वाश्ंिागटन पोस्ट ने कहा है कि तीखे बयानबाजी वाले और काफी खर्चीले चुनाव प्रचार के बाद ऐसा लगता है कि सीनेट डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों से निकल सकती है।
4. गांधी के अहिंसा आंदोलन का जश्न मनाएगा दक्षिण अफ्रीका:- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को साझा विरासत बताते हुए दक्षिण अफ्रीका ने उनके अ¨हसा आंदोलन की शताब्दी मनाने का फैसला किया है। अगले साल मनाए जाने वाले इस एक वर्षीय कार्यक्रम की शुरुआत जनवरी में आयोजित होने वाले वाइब्रेंट गुजरात से होगी। वहीं दक्षिण अफ्रीका में होने वाले मुख्य समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत अन्य नेताओं को भी न्योता देने की तैयारी है। इस समारोह की तैयारियों पर भारत से विचार विमर्श की कड़ी में दक्षिण अफ्रीका की आवास मंत्री एलएन सिसुलू इन दिनों भारत दौरे पर हैं। साथ ही मौका है दक्षिण अफ्रीका के लंबे स्वाधीनता संघर्ष की बीसवीं सालगिरह है। नई दिल्ली में सिसुलू ने कहा कि उनकी यह यात्र दक्षिण अफ्रीका के स्वाधीनता आंदोलन में भारत से मिली प्रेरणा और मदद पर धन्यवाद कहने का भी एक प्रतीक है। साथ ही महात्मा गांधी की राजनीतिक प्रेरणा की साझी विरासत को मजबूत बनाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान महात्मा गांधी द्वारा दिए गए अ¨हसा आंदोलन के विचार की सौंवी वर्षगांठ को उनकी सरकार ने धूम-धाम से मनाने का फैसला किया है। इसके तहत 2015 में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
5. अमेरिका ने पकड़ी पाक की करतूत:- अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान के परोक्ष युद्ध की पुष्टि की है। पाकिस्तान में आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाहों के बारे में उसने अमेरिकी संसद के समक्ष पाकिस्तान का कच्चा चिट्ठा खोला है। पेंटागन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीधे तौर पर भारतीय सेना का मुकाबला करने में अक्षम पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल करता है। मंगलवार को अमेरिकी संसद में अपनी छमाही रिपोर्ट पेश करते हुए पेंटागन ने कहा है कि अफगानिस्तान और भारत में दहशतगर्दी फैलाने के लिए तैयार किए गए ये आतंकवादी संगठन पाकिस्तान की जमीन से परोक्ष युद्ध छेड़े हुए हैं। भारत और अफगानिस्तान में अशांति और अस्थिरता के मकसद से आतंकी गतिविधियों का संजाल बिछाया गया है। अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति के बारे में पेंटागन ने अमेरिकी संसद को बताया कि पाकिस्तान इन आतंकी बलों का इस्तेमाल अफगानिस्तान में अपने प्रभाव में आई कमी को पूरा करने और भारत की बेहतर सेना से मुकाबला करने के लिए कर रहा है। 100 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा आतंकियों से ये संबंध पाकिस्तान के उस सार्वजनिक रुख के विपरीत हैं, जिसके तहत उसने अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए क्षेत्रीय सहयोगी का समर्थन करने की बात कही थी। ऐसे आतंकी समूह अफगान-पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा करने का भी लगातार काम कर रहे हैं। अफगानिस्तान के हेरात में भारतीय दूतावास पर हमले का जिक्र करते हुए पेंटागन ने कहा कि यह हमला नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने से ठीक पहले किया गया। जून में अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया था कि इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था।
6. कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र में भिड़े भारत-पाक:- संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर मसले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच फिर जुबानी तकरार हुई। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के बेबुनियाद आरोपों का करारा जवाब दिया। उन्होंने पाकिस्तान की बातों को तथ्यात्मक तौर पर गलत करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की वेबसाइट पर महासभा की तीसरी समिति की बैठक के बारे में दी गई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी प्रतिनिधि दियार खान ने कश्मीर का मसला उठाया। उन्होंने कहा, ‘मुङो खेद है कि जम्मू और कश्मीर के लोगों को उनके आत्मनिर्णय लेने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।’ यह समिति सामाजिक, मानवीय और सांस्कृतिक मुद्दों को देखती है। नस्लवाद, नस्ली भेदभाव, विदेशियों के प्रति घृणा और आत्मनिर्णय के अधिकार के मुद्दे पर सोमवार को आयोजित सत्र हिस्सा लेते हुए खान ने कहा कि आत्मनिर्णय के अधिकार का उपयोग दबाव मुक्त माहौल में होना चाहिए। ारतीय प्रतिनिधि का जवाब जानकारी के मुताबिक, बैठक में भारतीय प्रतिनिधि मयंक जोशी ने जोर देकर कहा कि जम्मू और कश्मीर से संबंधित पाकिस्तान की अकारण टिप्पणियां तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। उन्होंने बताया कि उस क्षेत्र में हर स्तर पर नियमित तौर पर स्वतंत्र, निष्पक्ष और खुले चुनाव होते रहते हैं। जोशी ने कहा कि भारत एक बहुधार्मिक, बहु जातीय और बहु भाषी समाज है जो सभी तरह के भेदभाव को खत्म करने लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने चुनावों पर सवाल उठाए। इस पर जोशी ने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधि की टिप्पणियां संदर्भ से बाहर की हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया को नहीं मिली गड़बड़ी इस दौरान खान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कई प्रस्तावों को स्वीकार कर चुका है, जिसमें जम्मू और कश्मीर को एक ‘विवादित क्षेत्र’ घोषित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जम्मू और कश्मीर में चुनावों को यूएन और कश्मीरी लोगों द्वारा खारिज कर दिया गया था। जवाब में भारतीय प्रतिनिधि ने जम्मू और कश्मीर में चुनाव अंतरराष्ट्रीय मीडिया की निगरानी के तहत कराए गए, जिसने इन चुनावों में कोई गड़बड़ी नहीं पाई। पाक को ना कह चुका है यूएन हाल में ही पाकिस्तान ने पत्र लिखकर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून से कश्मीर मुद्दे पर दखल देने की मांग की थी। उन्होंने इस मांग को नकार दिया था।
7. एनसीएईआर ने घटाया आर्थिक विकास दर का अनुमान:- चालू वित्त वर्ष 2014-15 में रफ्तार बढ़ने का सपना संजोए बैठी केंद्र सरकार को आर्थिक थिंक टैंक एनसीएईआर की नई भविष्यवाणी निराश कर सकती है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने मौजूदा आर्थिक परिदृश्य और विकास की संभावनाओं के आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर के पांच फीसद रहने का अनुमान लगाया है। इससे पहले इसी संस्था ने 2014-15 में विकास दर 5.7 फीसद रहने की बात कही थी। एनसीएईआर ने अपने ताजा बयान में कहा है कि उसके मुताबिक आर्थिक विकास की रफ्तार इस वर्ष धीमी रहेगी। विकास को लेकर अब तक जितने आंकड़े आए हैं, वे कमजोर अर्थव्यवस्था की तरफ संकेत कर रहे हैं। केवल महंगाई और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) के आंकड़े ही सरकार को राहत देने वाले हैं। एनसीएईआर का मानना है कि कमजोर मानसून के चलते खेती को हुए नुकसान की भरपायी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के हालत में सुधार ही अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ा सकते हैं। वैसे, पूरी अर्थव्यवस्था की तस्वीर कमजोर दिख रही है और विकास की रफ्तार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। बयान के मुताबिक शेयर बाजार की तेजी के चलते अर्थव्यवस्था की तरफ से मिश्रित संकेत मिल रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआइआइ) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) दोनों में बढ़त बनी रहने से शेयर बाजार के सूचकांक ऊपर की तरफ भाग रहे हैं। इतना ही नहीं बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स भी केंद्र में मजबूत सरकार होने के नाते सेंटीमेंट में इजाफा कर रहा है। थिंक टैंक का मानना है कि खाद्य वस्तुएं और ईंधन की कीमतों में कमी ने अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया है। लेकिन कृषि विकास दर पिछले साल के मुकाबले कम रहने का अंदेशा जताया जा रहा है। मानसून कमजोर रहने से खाद्यान्न पैदावार में भी कमी की आशंका है। यही नहीं सेवा क्षेत्र में भी विकास की रफ्तार धीमी दिख रही है। एनसीएईआर का मानना है कि हैरानी नहीं होगी, अगर इस साल बैंकों की तरफ से वाणिज्यिक क्षेत्र को कर्ज देने की गति धीमी रहे। अमेरिका को छोड़ बाकी ग्लोबल अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए निर्यात के मोर्चे पर भी बहुत अधिक तेज रफ्तार की उम्मीद करना बेकार होगा।
8. सीमा विवाद सुलझाने के लिए चीन ने मांगी मोहलत:- चीनी सैनिकों के वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की घटनाओं के बीच चीन ने सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने का भरोसा जताया है। बीते दिनों भारतीय सीमा में स्थित पेंगांग झील में चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर चीन के राजदूत ली यूछंग ने कहा कि इस मामले को सुलझाने के लिए वक्त की दरकार है। उन्हें भरोसा है कि साझा प्रयासों से सीमा मसले का समाधान संभव है। बीजिंग में शुरू हो रहे एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग सम्मेलन के संबंध में भारत में आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सीमा विवाद आर्थिक सहयोग में आड़े नहीं आना चाहिए। भारत और चीन के बीच सहयोग की दरकार पर जोर देते हुए चीनी राजदूत ने कहा कि यह पूरे एशिया की स्थिरता और विकास के लिए जरूरी है। वहीं बीते दिनों पेंगांग झील में चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में घुसने के वाकये समेत सरहद पर उपजे हालिया तनाव को तूल देने से बचते हुए यूछंग ने कहा कि सीमा मसले को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। हालांकि, बैठक में मौजूद भारतीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के प्रमुख और पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा विवाद को जल्द से जल्द सुलझाया जाना ही बेहतर होगा। इसे अधिक समय तक नहीं टाला जा सकता। सरन का कहना था कि 2005 में दोनों पक्षों ने समाधान के लिए राजनीतिक पैमाने तो बना लिए, लेकिन इनके मुताबिक समाधान का रास्ता अभी तक नहीं निकाला है। चीन के साथ आर्थिक सहयोग का स्वागत करने के साथ ही सरन ने एशिया में सुरक्षा और आर्थिक असंतुलन से बढ़ते तनाव की ओर भी इशारा किया। भारत के साथ सहयोगपूर्ण संबंधों पर जोर देते हुए चीनी राजदूत ने कहा कि उनका देश भारतीय बाजार में अगले पांच सालों में 20 अरब डॉलर का निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। चीनी बिजली उपकरणों के सहारे यदि भारत के उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली आपूर्ति संभव होती है तो यह सहयोग की मिसाल होगी।
9. बढ़ते वायु प्रदूषण से देश में खाद्यान्न उपज आधी:- वायु प्रदूषण से सीधे तौर पर भारत के खाद्यान्न उत्पादन पर बुरा असर पड़ रहा है। देश में बढ़ते प्रदूषित कोहरे (स्मॉग) के कारण फसलों की संभावित उपज आधी रह गई है। सन् 2010 में जितनी फसल संभावित थी, वायु प्रदूषण के चलते पैदावार उसकी 50 फीसद ही हुई। पिछले तीस साल के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए वैानिकों ने भारत का एक सांख्यिकीय मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण सघन बसे राज्यों में गेहूं की उपज 50 फीसद तक कम हो गई है। आवश्यक खाद्य सामग्री के उत्पादन में स्मॉग के कारण 90 फीसद तक की कमी आई है। काले कार्बन और अन्य प्रदूषक तत्वों से बना स्मॉग तेजी से देश की मिट्टी के उपजाऊपन को निगलता जा रहा है। सिर्फ प्रदूषित वायु और काला कोहरा ही नहीं वैश्विक तापमान बढ़ने से मौसम में होने वाले बदलावों के चलते भी खाद्यान्न की दस फीसद उपज कम हो गई। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं और प्रमुख शोधकर्ता जेनिफर बर्नी ने कहा कि सरकारें जब वायु प्रदूषण को दूर करने के उपायों के खर्च और नए कानूनों को बनाने पर चर्चा करती हैं तो वह उस समय कृषि को अपने जहन में नहीं रखतीं। लेकिन अब वह उम्मीद करती हैं कि उनके इस शोध से वायु प्रदूषण को कम करने के उपायों को बल मिलेगा। ये शोधपत्र मौजूदा पर्यावरण और वायु प्रदूषण का भारतीय कृषि पर प्रभाव शीर्षक से नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित किया गया है।

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