मंगलवार, 18 नवंबर 2014

17 November 2014(Tuesday

17 November 2014(Tuesday)
1.पीएम मोदी के मिशन को बड़ी सफलता : कालेधन पर जी-20 भारत के साथ आया:- जी20 शिखर सम्मेलन में भारत को बड़ी सफलता मिली है। समूह के देशों ने काले धन के मुद्दे पर भारत के रुख का समर्थन करते हुए कर सूचनाएं देने और पारदर्शिता की आवश्यकता का अनुमोदन किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काले धन की समस्या से निपटने के लिए नए नियंतण्र मानक और सूचनाओं के स्वत: आदान प्रदान पर समर्थन का आह्वान किया था। शिखर सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में मोदी ने काले धन की समस्या से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में दुनियाभर के देशों के बीच नजदीकी समन्वय की जोरदार वकालत की। मोदी ने कहा, कर सूचनाएं देने के नए मानकों से विदेशों में छिपाकर रखे गए कालेधन से जुड़ी जानकारी पाने में मदद मिलेगी और इसे देश में वापस लाया जा सकेगा। मोदी ने इस मुद्दे पर भारत के पूर्ण समर्थन का वादा करते हुए दुनिया के सभी देशों विशेषतौर पर कर चोरों की पनाहगाह माने जाने वाले देशों से संधि से जुड़े दायित्वों को निभाते हुए कर संबंधी सूचनाएं देने का आग्रह किया। उन्होंने कर नीति और प्रशासन के मामले में सूचना साझा करने तथा आपसी सहायता को आसान बनाने वाले सभी कदमों के प्रति भारत का समर्थन जताया। दो दिन के इस सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन सहित दुनिया के 20 प्रमुख विकसित और विकासशील देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। सीमा पार कर चोरी तथा अपवंचना पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देशों के बीच पूंजी और प्रौद्योगिकी की आवाजाही बढ़ने से कर अपवंचना तथा मुनाफा इधर-उधर करने की नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां स्थित ‘ब्रिस्बेन प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्र में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दूसरे और आखिरी दिन ‘डिलीवरिंग ग्लोबल इकनॉमिक रेजिलिएर्न्सं’ विषय पर पूर्ण सत्र के दौरान यह बातें कहीं। मोदी ने यह उम्मीद भी जताई कि कर आधार में कमी और मुनाफे का स्थानांतरण (बीईपीएस) जैसी समस्याओं से निपटने के लिए की जा रही व्यवस्था विकासशील एवं विकसित अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं का पूरा समाधान करेगी। रेलमंत्री सुरेश प्रभु तथा विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने कहा कि पारदर्शिता की बात बयान के मसौदे में शामिल नहीं थी लेकिन प्रधानमंत्री के पूर्ण सत्र में मजबूत हस्तक्षेप के बाद अंतिम बयान में इसे शामिल किया गया। संयुक्त बयान के अनुसार, निवेश, व्यापार और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के हमारे कदमों से बेहतर रोजगार सृजित होंगे। हमें बेरोजगारी दूर करने, भागीदारी बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने के लिए हमें और कदम उठाने होंगे। शिखर सम्मेलन से पहले मोदी का मानना था कि रोजगार उन्मुख आर्थिक वृद्धि के लिए केवल वित्तीय बाजार की सेहत जैसे मुद्दे ही जरूरी नहीं है बल्कि लोगों को बेहतर गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देना जरूरी है।
2. जी 20 बैठक बीच में छोड़ पुतिन स्वदेश गए:- जी 20 शिखर बैठक में यूक्रेन के मसले पर रूस को घेरने की नीति का उस समय पटाक्षेप हो गया जब राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन बैठक बीच में ही छोड़कर रविवार सुबह स्वेदश रवाना हो गए। अपने कार्यक्रम में अचानक किए गए इस बदलाव के लिए उन्होंने बड़ी ही अजीब सी दलील देते हुए कहा कि स्वदेश लौटन के लिए के लिए 18 घंटे की लंबी विमान यात्रा करने के बाद उन्हें भरपूर नींद लेने का समय चाहिए क्योंकि सोमवार को काम पर जाना है लिहाजा वह समय से पहले स्वदेश लौट रहे हैं। संवाददाताअों के इस सवाल पर कि क्या मेजबान देश को उनकी इस रवैये से कोई परेशानी नहीं होगी पुतिन ने कहा, नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट ने नो प्राब्लम कहते हुए उन्हें इसकी इजाजत दे दी है। उन्होंने इसके साथ ही एबोट को एक शालीन व्यक्ति बताते हुए उनकी मेजबानी के लिए उनकी प्रशंसा भी की। अफवाहों का बाजार इस बात को लेकर गर्म है कि यूक्रेन में कथित दखलअंदाजी को लेकर शिखर बैठक में सदस्य देशों के तल्ख रवैये के कारण पुतिन ने स्वदेश लौटने का फैसला किया।
3. जीएसटी में अड़चन बन सकती है सालाना कारोबार की सीमा:- वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) लागू करने के रास्ते में केंद्र और राज्यों के बीच नई अड़चन खड़ी हो सकती है। केंद्र जीएसटी के लिए सालाना कारोबार की सीमा को 10 लाख रुपये तक घटाने को राजी नहीं है। राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति ने यह सीमा 25 लाख रुपये से घटाकर 10 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी। केंद्र ने जीएसटी की दोहरी नियंत्रण समिति से इस विषय पर विचार विमर्श कर आपसी सहमति से फैसला लेने को कहा है। राज्यों के वित्त मंत्रियों को लिखे एक पत्र में केंद्र ने इस समिति की जल्द बैठक बुलाने के लिए कहा है। केंद्र का मत है कि जीएसटी के लिए कारोबार की न्यूनतम सीमा ऊंची रखना इसलिए आवश्यक है क्योंकि छोटे कारोबारियों से कर संग्रह की लागत काफी अधिक रहती है। जबकि उनसे प्राप्त होने वाले कर राजस्व की मात्र उतनी अधिक नहीं होती। केंद्र का मानना है कि राज्य 10 से 25 लाख रुपये तक के सालाना कारोबार वाले व्यापारियों से अपने कुल राजस्व का मात्र दो फीसद ही संग्रह करते हैं। जबकि जीएसटी के तहत आने वाले सभी करदाताओं में इस समूह की हिस्सेदारी 60 फीसद है। केंद्र के मुताबिक अगर जीएसटी के दायरे में शामिल करने के लिए सालाना कारोबार की सीमा को 10 लाख रुपये किया जाता है तो ऐसे डीलर भी इसमें शामिल हो जाएंगे जिनका दैनिक कारोबार 2800 रुपये है। केंद्र का इरादा अप्रैल 2016 से देश में जीएसटी लागू करने का है। केंद्र चाहता है कि केंद्रीय जीएसटी और राज्य स्तरीय जीएसटी के दायरे में शामिल होने के लिए सालाना कारोबार की न्यूनतम सीमा 25 लाख रुपये हो। हालांकि, कुछ छोटे राज्य इस सीमा को 10 लाख रुपये करने के पक्ष में है। 20 अगस्त को राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में राज्यों में इस पर सहमति भी बन गई थी। समिति ने अपने इस फैसले से केंद्र को अवगत भी करा दिया था। इसके अतिरिक्त समिति ने केंद्र से राज्यों को 1.5 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार पर टैक्स वसूलने का कानूनी अधिकार देने का आग्रह भी किया था। साथ ही समिति की मांग है कि केंद्र जीएसटी से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक में राज्यों को जीएसटी से होने वाले नुकसान की भरपाई का प्रावधान भी करे। यह और बात है कि मौजूदा पत्र में केंद्र ने इन विषयों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
4. भारत-अमेरिका समझौते का जी20 ने किया स्वागत:- विकसित और विकासशील देशों के संगठन जी20 के नेताओं ने खाद्य सुरक्षा तथा इसके भंडारण के मुद्दे पर भारत तथा अमेरिका के बीच बनी सहमति का रविवार को स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की वार्ता दोबारा पटरी पर लौटेगी। साथ ही व्यापार सुविधा समझौते (टीएफए) के कार्यान्वयन का रास्ता साफ होगा। यह आर्थिक वृद्धि तथा रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है। जी20 बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि सभी सदस्य देश बाली समझौते के सभी पहलुओं के कार्यान्वयन को लेकर प्रतिबद्ध हैं। दोहा विकास एजेंडे के बचे मुद्दों पर डब्ल्यूटीओ कामकाज कार्यक्रम को शीघ्र परिभाषित करने पर भी रजामंदी है। इनका मकसद डब्ल्यूटीओ वार्ता को बहाल करना है। खाद्य सुरक्षा मसले पर भारत को इसी सप्ताह बड़ी सफलता मिली। अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर भारत के प्रस्ताव पर सहमति जताई। इसने टीएफए पर तीन महीने से जारी गतिरोध को दूर करने का रास्ता साफ कर दिया। इसके साथ ही जी20 नेताओं ने खुली वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत कारोबार प्रणाली का आह्वान किया ताकि आर्थिक वृद्धि को तेज करने के साथ रोजगार सृजन की रफ्तार बढ़ाई जा सके। जी20 के नेताओं ने ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य निवेश में बाधाओं को दूर करने के साथ क्षेत्र में फंडों के आदान-प्रदान पर सूचना साझा करने की व्यवस्था को सुधारना है। यह केंद्र सिडनी में बनेगा तथा सरकारों, निजी सेक्टर, विकास बैंकों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच नेटवर्क विकसित करने में सहयोग करेगा। समूह के सभी नेताओं ने एक सुर में ग्लोबल अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी राजनीतिक तनाव के बीच अगले पांच साल में ग्लोबल जीडीपी में 20 खरब डॉलर की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। इसे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और आपसी कारोबार बढ़ाकर हासिल किया जाएगा।
5. ईयू से अगले साल तक परमाणु करार:- परमाणु ऊर्जा की अपनी महत्वाकांक्षा को अमली जामा पहनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारत यूरोपीय संघ के साथ एक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत कर रहा है। समझा जाता है कि अगले साल तक इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत जोआओ क्राविन्हो ने पिछले सप्ताह एक आयोजन से इतर बताया ‘समझा जाता है कि भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और यूरोपीय संघ के संयुक्त अनुसंधान केंद्र के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह समझौता मुख्य रूप से अनुसंधान और ऊर्जा के क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।’ क्राविन्हो ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और समझौते पर अगले साल हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। बहरहाल, हस्ताक्षर कब किए जाएंगे, इस बारे में उन्होंने कोई विशेष समय सीमा नहीं बताई। उन्होंने कहा ‘समझौते पर हस्ताक्षर को लेकर कुछ देशों ने चिंता जताई है क्योंकि भारत ने अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। लेकिन इस बारे में फिलहाल आम सहमति है।’ दोनों पक्ष और यूरोपीय संघ के देश मसौदे में उपयोग की जाने वाली ‘भाषा’ को लेकर अपने मतभेद दूर करने के प्रयास कर रहे हैं। क्राविन्हो ने कहा, ‘मसौदे में उपयोग की जाने वाली भाषा पर देश र्चचा कर रहे हैं। इसके हल के बाद, अगले साल तक समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।भारत और यूरोपीय संघ पर्यावरण, सतत विकास, अक्षय ऊर्जा और स्वच्छ प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न पहलुओं पर सहयोग कर रहे हैं। इस समझौते से भारत के कुलीन ‘परमाणु आपूत्तर्िकर्ता समूह’ में प्रवेश होने के प्रयासों को बहुत मदद मिलेगी। नियंतण्र मंच पर इस समूह को यूरोपीय संघ का छोटा हिस्सा माना जाता है। सूत्रों ने बताया कि परमाणु क्षेत्र, खास कर स्वास्थ्य के क्षेत्र के संबंध में विभिन्न पक्षों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से भारत को लाभ मिलेगा। भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक परमाणु समझौते के बाद भारत ने रूस, कजाखस्तान, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, मंगोलिया और फ्रांस के साथ परमाणु समझौते किए। साथ ही भारत ने सितम्बर में ऑस्ट्रेलिया के साथ एक परमाणु सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए जिससे उसके रिएक्टरों के लिए यूरेनियम के आयात का रास्ता साफ हुआ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें