बासेल-।।।: नवीन पहल
IAS /PSC की प्री एवं मुख्य परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण टॉपिक।
क्या है बासेल III -
बैंकिंग क्षेत्र के अंतर्गत विनियमन, पर्यवेक्षण और जोखिम-प्रबंधन में सुधार लाने के लिए निरूपित किए गए सुधारात्मक उपायों का एक व्यापक सेट है बासेल ।।।.
बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासेल समिति ने 2009 के अंत में बासेल III का पहला वर्जन प्रकाशित किया था और बैंकों को समस्त अपेक्षाएँ पूरी करने के लिए लगभग तीन वर्ष का समय दिया था।
मोटे तौर पर, ऋण-संकट के प्रत्युत्तर में बैंकों को उपयुक्त लीवरेज रेश्यो कायम रखना और कतिपय पूंजीगत अपेक्षाएँ पूरी करना आवश्यक है।
नवीन पहल-
बासेल III मानदंड लागू करने में बैंकिंग क्षेत्र की मदद करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 7 मार्च 2014 को वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) के अंतर्गत एक समिति गठित करने की घोषणा की।
समिति का कार्य-
* य़ह समिति बासेल-III पूँजी मानदंड लागू करने हेतु बैंकिंग क्षेत्र के लिए दिशा-निर्देश तय करेगी
महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व-
• वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) की गैर-विधायी सिफारिशों का कार्यान्वयन।
• निवेशकों को वित्तीय परिसंपत्तियों की समस्त श्रेणियों का एक सिंगल व्यू उपलब्ध कराने के लिए एक रिपोजिटरी स्थापित करने का मुद्दा।
• बासेल-III विनियमों और पर्यवेक्षीय पूँजीगत अपेक्षाओं को मद्देनजर रखते हुए अगले पाँच वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र की पूंजीगत आवश्यकताएँ सुझाने के उपाय।
• विभिन्न क्षेत्रों के बीच समान क्रियाकलापों के लिए विनियमों के अत्यधिक सामंजस्य के मुद्दे पर भी विचार किया जायेगा।
• इसमें वित्तीय क्षेत्र के लिए एक कारगर समाधान तंत्र स्थापित करने के उपायों पर भी विचार किया जायेगा।
IAS /PSC की प्री एवं मुख्य परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण टॉपिक।
क्या है बासेल III -
बैंकिंग क्षेत्र के अंतर्गत विनियमन, पर्यवेक्षण और जोखिम-प्रबंधन में सुधार लाने के लिए निरूपित किए गए सुधारात्मक उपायों का एक व्यापक सेट है बासेल ।।।.
बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासेल समिति ने 2009 के अंत में बासेल III का पहला वर्जन प्रकाशित किया था और बैंकों को समस्त अपेक्षाएँ पूरी करने के लिए लगभग तीन वर्ष का समय दिया था।
मोटे तौर पर, ऋण-संकट के प्रत्युत्तर में बैंकों को उपयुक्त लीवरेज रेश्यो कायम रखना और कतिपय पूंजीगत अपेक्षाएँ पूरी करना आवश्यक है।
नवीन पहल-
बासेल III मानदंड लागू करने में बैंकिंग क्षेत्र की मदद करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 7 मार्च 2014 को वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) के अंतर्गत एक समिति गठित करने की घोषणा की।
समिति का कार्य-
* य़ह समिति बासेल-III पूँजी मानदंड लागू करने हेतु बैंकिंग क्षेत्र के लिए दिशा-निर्देश तय करेगी
महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व-
• वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) की गैर-विधायी सिफारिशों का कार्यान्वयन।
• निवेशकों को वित्तीय परिसंपत्तियों की समस्त श्रेणियों का एक सिंगल व्यू उपलब्ध कराने के लिए एक रिपोजिटरी स्थापित करने का मुद्दा।
• बासेल-III विनियमों और पर्यवेक्षीय पूँजीगत अपेक्षाओं को मद्देनजर रखते हुए अगले पाँच वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र की पूंजीगत आवश्यकताएँ सुझाने के उपाय।
• विभिन्न क्षेत्रों के बीच समान क्रियाकलापों के लिए विनियमों के अत्यधिक सामंजस्य के मुद्दे पर भी विचार किया जायेगा।
• इसमें वित्तीय क्षेत्र के लिए एक कारगर समाधान तंत्र स्थापित करने के उपायों पर भी विचार किया जायेगा।
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