GAAR (गार) : एक मुल्यांकन
[पार्ट-1]
IAS/PSC की प्री एवं मुख्य परीक्षा हेतु इकॉनमी एवं करंट से सम्बंधित महत्वपूर्ण टॉपिक।
स्रोत-वित् मंत्रालय भारत सरकार
इस टॉपिक को निम्न रूप में देखेंगे-
1.गार क्या है
2.गार लाये जाने का मुख्य उद्देश्य क्या है
3.विशेषताएं
4.समिति का गठन
5.कब से लागु होगा गार
6.समस्याए
7.गार से अपवंचन
8.निष्कर्ष
1.गार क्या है-
टैक्स चोरी और काले धन को रोकने हेतु बनाया गया "गार (General Anti Avoidance Rules)" एक प्रकार का नियम है जिसके पीछे सरकार का एक ही लक्ष्य है, जो भी विदेशी कंपनी भारत में निवेश करे, वह यहां पर तय नियमों के मुताबिक टैक्स दे।
2.गार लाये जाने का मुख्य उद्देश्य क्या है-
*गार रूल का मुख्य उद्देश्य उन सौदों या आय को कर के दायरे में लाना है, जिसको केवल करों का भुगतान से बचने के लिए संरचित किया गया हैं।
*कर चोरी को रोक कर सरकारी राजस्व में वृद्धि करना है।
*इसका मुख्य उद्देश्य, "कराधान प्रणाली की खामियां दूर करना तथा कर चोरी करने वालों का पता लगाना है।"
*गार नियमों को लाने का उद्देश्य विदेशी निवेशकों को ऐसे रास्ते अपनाने से रोकना है जिनका ‘मुख्य ध्येय केवल कर लाभ प्राप्त करना हो।’ सरकार ऐसे रास्ते को कर से बचने का एक अमान्य रास्ता मानेगी और उसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।
3.विशेषताएं:-
ये नियम, मूल रूप से प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) 2010 में प्रस्तावित है, जो करों से बचने के लेनदेन को लक्षित कर रहे हैं।
पूर्व वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने आम बजट 2012-13 को प्रस्तुत करते हुए उसमें गार के प्रावधानों का उल्लेख किया था।
संसद ने इसे स्थायी समिति को भेज दिया था। स्थायी समिति की सिफारिशों पर गौर करने के बाद नियमों के प्रावधानों में निम्न संशोधन का प्रस्ताव किया गया है:-
* गार के अंतर्गत कार्यवाही से पहले प्रमाण पेश करने की जिम्मेदारी कर दाता की जगह राजस्व विभाग
को होगी।
* निष्पक्षता और पादर्शिता सुनिश्चित करने के लिए गार की अनुमोदन समिति में एक स्वतंत्र सदस्य
शामिल किया जायेगा। जो कानून मंत्रालय में संयुक्त सचिव या उसके उच्च पद के अधिकारी होते हैं।
* कोई भी कर दाता (आवासी या गैर-आवासी) अग्रिम निर्देश प्राधिकरण (एएआर) के पास निर्देश लेने
के लिए जा सकेगा और पता कर सकेगा कि गार के प्रावधानों के अंतर्गत एएआर द्वारा की जाने वाली
व्यवस्था की अनुमति है या नहीं।
* गार नियमों को लाने का मकसद विदेशी निवेशकों को ऐसे रास्ते अपनाने से रोकना है जिनका
‘ मुख्य ध्येय केवल कर लाभ प्राप्त करना हो।’
* केंद्रीय बजट 2012-13 में प्रस्तावित गार का उद्देश्य और भाषा भी बिल्कुल वही है जो डीटीसी बिल में हैं। वित्त विधेयक 2012 में "गार" को उप-अनुभाग 2 से सेक्शन 90 में प्रस्तुत किया गया है, जिससे भारत द्वारा हस्ताक्षरित संधियों के प्रावधानों को अधिभूत किया जा सके, इसको आयकर अधिनियम-1961 की धारा के द्वारा लागू किया जायेगा।
[पार्ट-1]
IAS/PSC की प्री एवं मुख्य परीक्षा हेतु इकॉनमी एवं करंट से सम्बंधित महत्वपूर्ण टॉपिक।
स्रोत-वित् मंत्रालय भारत सरकार
इस टॉपिक को निम्न रूप में देखेंगे-
1.गार क्या है
2.गार लाये जाने का मुख्य उद्देश्य क्या है
3.विशेषताएं
4.समिति का गठन
5.कब से लागु होगा गार
6.समस्याए
7.गार से अपवंचन
8.निष्कर्ष
1.गार क्या है-
टैक्स चोरी और काले धन को रोकने हेतु बनाया गया "गार (General Anti Avoidance Rules)" एक प्रकार का नियम है जिसके पीछे सरकार का एक ही लक्ष्य है, जो भी विदेशी कंपनी भारत में निवेश करे, वह यहां पर तय नियमों के मुताबिक टैक्स दे।
2.गार लाये जाने का मुख्य उद्देश्य क्या है-
*गार रूल का मुख्य उद्देश्य उन सौदों या आय को कर के दायरे में लाना है, जिसको केवल करों का भुगतान से बचने के लिए संरचित किया गया हैं।
*कर चोरी को रोक कर सरकारी राजस्व में वृद्धि करना है।
*इसका मुख्य उद्देश्य, "कराधान प्रणाली की खामियां दूर करना तथा कर चोरी करने वालों का पता लगाना है।"
*गार नियमों को लाने का उद्देश्य विदेशी निवेशकों को ऐसे रास्ते अपनाने से रोकना है जिनका ‘मुख्य ध्येय केवल कर लाभ प्राप्त करना हो।’ सरकार ऐसे रास्ते को कर से बचने का एक अमान्य रास्ता मानेगी और उसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।
3.विशेषताएं:-
ये नियम, मूल रूप से प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) 2010 में प्रस्तावित है, जो करों से बचने के लेनदेन को लक्षित कर रहे हैं।
पूर्व वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने आम बजट 2012-13 को प्रस्तुत करते हुए उसमें गार के प्रावधानों का उल्लेख किया था।
संसद ने इसे स्थायी समिति को भेज दिया था। स्थायी समिति की सिफारिशों पर गौर करने के बाद नियमों के प्रावधानों में निम्न संशोधन का प्रस्ताव किया गया है:-
* गार के अंतर्गत कार्यवाही से पहले प्रमाण पेश करने की जिम्मेदारी कर दाता की जगह राजस्व विभाग
को होगी।
* निष्पक्षता और पादर्शिता सुनिश्चित करने के लिए गार की अनुमोदन समिति में एक स्वतंत्र सदस्य
शामिल किया जायेगा। जो कानून मंत्रालय में संयुक्त सचिव या उसके उच्च पद के अधिकारी होते हैं।
* कोई भी कर दाता (आवासी या गैर-आवासी) अग्रिम निर्देश प्राधिकरण (एएआर) के पास निर्देश लेने
के लिए जा सकेगा और पता कर सकेगा कि गार के प्रावधानों के अंतर्गत एएआर द्वारा की जाने वाली
व्यवस्था की अनुमति है या नहीं।
* गार नियमों को लाने का मकसद विदेशी निवेशकों को ऐसे रास्ते अपनाने से रोकना है जिनका
‘ मुख्य ध्येय केवल कर लाभ प्राप्त करना हो।’
* केंद्रीय बजट 2012-13 में प्रस्तावित गार का उद्देश्य और भाषा भी बिल्कुल वही है जो डीटीसी बिल में हैं। वित्त विधेयक 2012 में "गार" को उप-अनुभाग 2 से सेक्शन 90 में प्रस्तुत किया गया है, जिससे भारत द्वारा हस्ताक्षरित संधियों के प्रावधानों को अधिभूत किया जा सके, इसको आयकर अधिनियम-1961 की धारा के द्वारा लागू किया जायेगा।
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