GAAR (गार) : एक मुल्यांकन
[पार्ट-2]
IAS/PSC की प्री एवं मुख्य परीक्षा हेतु इकॉनमी एवं करंट से सम्बंधित महत्वपूर्ण टॉपिक।
स्रोत-वित् मंत्रालय भारत सरकार
4.समिति का गठन:-
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विवादास्पद सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (गार) के नए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए 13 जुलाई 2012 को ICRIER (Indian Council for Research on International Economic Relations) के प्रमुख तथा कर विशेषज्ञ पार्थसारथी शोम की अध्यक्षता में एक 4 सदस्यीय समिति का गठन किया था।
5.कब से लागु होगा गार-
विशेष समिति ने सुझाव दिया कि सरकार को इसका अनुपालन 2016-17 तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए।
सरकार ने सामान्य कर परिवर्जन-रोधी नियमों (गार) पर गठित विशेषज्ञ समिति की प्रमुख सिफारिशों को कुछ बदलावों के साथ स्वीकार करते हुए ‘गार’ का क्रियान्वयन दो साल के लिए और टाल दिया गया था। अब यह देखना है कि नई सरकार इस विषय में क्या निर्णय लेती है तथा कब तक इसे लागू किया जाता है।
6.समस्याएँ-
गार को लागू करने में प्रमुख समस्या यह बताई जा रही है कि इससे निवेशकों को भरोसा कम होगा तथा निवेश में प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
7.गार से अपवंचन-
* ‘गार’ उन विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) पर लागू नहीं होगा जो समझौते के तहत आयकर अधिनियम की धारा 90 और 90ए के तहत कोई लाभ नहीं लेंगे।
*एफआईआई में जो प्रवासी निवेशक होंगे उनपर भी गार लागू नहीं होगा।
*आयकर की धारा 90 और 90ए के तहत दोहरे कराधान से बचने का समझौता विभिन्न देशों के साथ किया जाता है। इसमें कंपनियों को दोहरे कराधान से बचने की व्यवस्था है।
8.निष्कर्ष-
यदपि गार को लागू किये जाने में निवेश प्रभवित होने की आशंकाएँ जतायी जा रही है नतीजन अभी तक सरकार इसे लागू नहीं कर पा रही। परन्तु एक स्थायी अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है कि एक समतामूलक कर अवश्य हो। देश में आ रहे निवेश का एक बड़ा भाग ब्लैक मनी का ही है जो पुन:निवेश कर दिया जाता है। ब्लैक मनी वह धन है जिसपर कर नहीं चुकाया जाता इसलिए ऐसे धन को कर दायरे में लाया जाना आवश्यक हैं। हाल ही में सरकार ने ब्लैक मनी की संदर्भ में SIT का गठन किया है। देखना है इस दिशा में सरकार का अगला कदम क्या होगा।
[पार्ट-2]
IAS/PSC की प्री एवं मुख्य परीक्षा हेतु इकॉनमी एवं करंट से सम्बंधित महत्वपूर्ण टॉपिक।
स्रोत-वित् मंत्रालय भारत सरकार
4.समिति का गठन:-
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विवादास्पद सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम (गार) के नए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए 13 जुलाई 2012 को ICRIER (Indian Council for Research on International Economic Relations) के प्रमुख तथा कर विशेषज्ञ पार्थसारथी शोम की अध्यक्षता में एक 4 सदस्यीय समिति का गठन किया था।
5.कब से लागु होगा गार-
विशेष समिति ने सुझाव दिया कि सरकार को इसका अनुपालन 2016-17 तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए।
सरकार ने सामान्य कर परिवर्जन-रोधी नियमों (गार) पर गठित विशेषज्ञ समिति की प्रमुख सिफारिशों को कुछ बदलावों के साथ स्वीकार करते हुए ‘गार’ का क्रियान्वयन दो साल के लिए और टाल दिया गया था। अब यह देखना है कि नई सरकार इस विषय में क्या निर्णय लेती है तथा कब तक इसे लागू किया जाता है।
6.समस्याएँ-
गार को लागू करने में प्रमुख समस्या यह बताई जा रही है कि इससे निवेशकों को भरोसा कम होगा तथा निवेश में प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
7.गार से अपवंचन-
* ‘गार’ उन विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) पर लागू नहीं होगा जो समझौते के तहत आयकर अधिनियम की धारा 90 और 90ए के तहत कोई लाभ नहीं लेंगे।
*एफआईआई में जो प्रवासी निवेशक होंगे उनपर भी गार लागू नहीं होगा।
*आयकर की धारा 90 और 90ए के तहत दोहरे कराधान से बचने का समझौता विभिन्न देशों के साथ किया जाता है। इसमें कंपनियों को दोहरे कराधान से बचने की व्यवस्था है।
8.निष्कर्ष-
यदपि गार को लागू किये जाने में निवेश प्रभवित होने की आशंकाएँ जतायी जा रही है नतीजन अभी तक सरकार इसे लागू नहीं कर पा रही। परन्तु एक स्थायी अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है कि एक समतामूलक कर अवश्य हो। देश में आ रहे निवेश का एक बड़ा भाग ब्लैक मनी का ही है जो पुन:निवेश कर दिया जाता है। ब्लैक मनी वह धन है जिसपर कर नहीं चुकाया जाता इसलिए ऐसे धन को कर दायरे में लाया जाना आवश्यक हैं। हाल ही में सरकार ने ब्लैक मनी की संदर्भ में SIT का गठन किया है। देखना है इस दिशा में सरकार का अगला कदम क्या होगा।
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