गुरुवार, 6 नवंबर 2014

भारत, वियतनाम संबंधों से फ़ायदा किसे?:-

भारत, वियतनाम संबंधों से फ़ायदा किसे?:-

चीनी अख़बारों को लगता है कि वियतनाम के साथ संबंधों को मज़बूत बनाने के प्रयास से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है.
कारण यह कि दक्षिण चीन सागर में तेल की खोज करना 'एक बड़ा जोखिम वाला निवेश' होगा.
वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन टैन डंग के दो दिन के भारत के दौरे के संदर्भ में कई चीन के मीडिया प्रतिष्ठानों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
डंग के भारतीय अधिकारियों से मिलने और विवादित दक्षिण चीन सागर में तेल के नए स्रोतों को तलाशने के लिए नए सिरे से सौदों पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद की जा रही हैं.
समद्री जल क्षेत्र को लेकर विवाद

वियतनाम और चीन के बीच समुद्री जल क्षेत्र को लेकर विवाद चल रहा है.
मई में वियतनाम में उस वक्त चीन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे जब चीन का तेल शोधक वाहन वियतनाम के दावे वाले जल क्षेत्र में प्रवेश कर गया था.
चीन ने जुलाई में अपना तेल शोधक वाहन वहां से हटा लिया था. इसके बाद यह कहा गया कि उसने वहां अपना काम पूरा कर लिया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की भूमिका चीनी सरकार को असहज कर देगी. और जिस तरह से डंग के भारत दौरे को कवर किया जा रहा है उससे यह असहजता चीनी मीडिया में दिखने भी लगी हैं.
'द ग्लोबल टाइम' में छपी एक टिप्पणी में वियतनाम के साथ सुरक्षा संबंधों को सुधारने की भारतीय कोशिश पर संदेह जाताया गया है.
चेतावनी

चीनी एकैडमी ऑफ़ सोशल साइंस के विशेषज्ञ शू लिपिंग का कहना है, "भारत और वियतनाम दोनों देश अपने दोतरफा संबंधों में एक सफल मुकाम चाहते हैं. ये वियतनाम के लिए और भी खास है. हालांकि समुद्र में तेल की तलाश एक जोखिम भरा निवेश है और यह भी नहीं पता है कि वियतनाम ने भारत को जो क्षेत्र दिया वहां तेल के भंडार हैं कि नहीं. इसलिए भारत के हिस्सा लेने के बाद भी ये संबंध कितना सफल होगा पता नहीं."
दूसरे विशेषज्ञों को लगता है कि भारत कभी भी वियतनाम का चीन जैसा महत्वपूर्ण सहयोगी नहीं हो सकता है.
चीन न्यूज़ सर्विस में छपे एक लेख में कहा गया है, "भारत और वियतनाम दोनों एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं लेकिन ये संबंध इतने कम समय में चीन के साथ जो संबंध है उससे आगे नहीं निकल सकता."
चीन के कुछ मीडिया आउटलेट ने वियतनाम की अंदरूनी राजनीति में दखल देने के लिए भारत को चेतावनी दी है.
राजनीतिक खींचतान

स्टेट ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी पर छपे एक लेख में डंग के भारतीय दौरे को वियतनाम की अंदरूनी राजनीतिक खींचतान का नतीजा बताया है.
लेख में लिखा गया है,"तेल के नए भंडार खोजने के मसले पर डंग की भारत के साथ किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश वियतनामी कम्युनिस्ट पार्टी के दो धड़ों का राजनीतिक संघर्ष दिखाता है. एक धड़ा चीन का समर्थक है और दूसरा चीन विरोधी. हालांकि चीन ने भी संबंधों को मज़बूत करने के लिए अपने कुटनीतिक प्रयास तेज़ कर दिए हैं. इस प्रयास में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं."
शेनझेन सैटेलाइट टीवी पर एक विश्लेषक ने चेतावनी दी है,"अगर वियतनाम और भारत वाकई में विवादित समुद्री क्षेत्र में तेल के भंडार खोजना शुरू करते हैं तो ये दक्षिण चीन सागर में अस्थिरता की नई शुरूआत होगी और साथ ही साथ चीन-वियतनाम संबंधों में बदलावों की भी."

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